सोनभद्र में चेक डैम से मिले 35 शिशु मगरमच्छ वन विभाग ने सुरक्षित सोन नदी में छोड़ा ग्रामीणों में रही उत्सुकता
सोनभद्र: जुगैल वन रेंज क्षेत्र में रविवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने ग्रामीणों के साथ साथ वन विभाग के अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। जुगैल वन रेंज के सेमिया गांव के छितीरपुरवा टोला स्थित एक चेक डैम के पानी में एक साथ 35 शिशु मगरमच्छ पाए गए। डैम के किनारे मगरमच्छ के पांच अंडे भी मिले। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी शिशु मगरमच्छों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालकर उनके प्राकृतिक आवास सोन नदी में छोड़ दिया। वन विभाग के अनुसार यह पूरी घटना मगरमच्छों के प्राकृतिक प्रजनन चक्र का हिस्सा है और इसमें किसी तरह की असामान्य स्थिति नहीं पाई गई।
पानी कम होने पर सुनाई दी आवाजें तब सामने आया पूरा मामला
ग्रामीणों के अनुसार चेक डैम में पानी का स्तर घटने के बाद वहां से कुछ अलग तरह की आवाजें सुनाई देने लगीं। पहले लोगों ने इसे सामान्य घटना समझा लेकिन जब वे आवाज की दिशा में पहुंचे तो पानी के किनारे बड़ी संख्या में छोटे छोटे मगरमच्छ दिखाई दिए। यह दृश्य देखते ही ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने बिना देर किए मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कराया ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो और शिशु मगरमच्छों को भी कोई नुकसान न पहुंचे।
वन विभाग और पुलिस की टीम ने चलाया सुरक्षित रेस्क्यू अभियान
घटना की जानकारी मिलते ही वन दारोगा अविनाश सिंह वन्य जीव रक्षक सौरभ उपाध्याय तथा पीआरवी पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू अभियान के दौरान स्थानीय मल्लाह वीरेंद्र साहनी और टिम्मल साहनी ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। सभी 35 शिशु मगरमच्छों को बेहद सावधानी के साथ बोरियों में रखा गया ताकि उन्हें किसी प्रकार की चोट न पहुंचे। इसके बाद वन विभाग की टीम ने सभी शिशु मगरमच्छों को उनके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित जीवन के लिए सोन नदी में छोड़ दिया। पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा के सभी आवश्यक उपाय अपनाए गए।
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया प्रजनन काल की स्वाभाविक प्रक्रिया
जुगैल वन रेंज के वन क्षेत्राधिकारी अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रजनन काल के दौरान संभवतः किसी मादा मगरमच्छ ने इस स्थान पर अंडे दिए होंगे। समय पूरा होने के बाद अंडों से बच्चे निकल आए और धीरे धीरे पानी तक पहुंच गए। मौके पर कोई वयस्क मगरमच्छ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि वन विभाग पूरे क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है और यदि भविष्य में भी इस तरह की कोई सूचना मिलती है तो तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मगरमच्छ का प्रजनन कैसे होता है
मगरमच्छ अंडे देने वाला सरीसृप है। सामान्य रूप से मादा मगरमच्छ नदी तालाब या जलाशय के किनारे रेत अथवा मिट्टी में घोंसला बनाती है और एक बार में लगभग 20 से 80 अंडे देती है। इसके बाद वह अंडों को रेत मिट्टी या सूखी पत्तियों से ढक देती है ताकि उनका तापमान बना रहे। लगभग 80 से 90 दिनों के भीतर अंडों से बच्चे निकलते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार घोंसले का तापमान यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि बच्चे नर होंगे या मादा। जब अंडों से बाहर निकलने का समय आता है तब शिशु मगरमच्छ विशेष प्रकार की आवाज निकालते हैं जिसे सुनकर मादा मगरमच्छ घोंसले की मिट्टी हटाकर उन्हें सुरक्षित पानी तक पहुंचाने में मदद करती है।
वन्य जीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में शिशु मगरमच्छों का मिलना इस क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि क्षेत्र के जल स्रोत मगरमच्छों के प्रजनन के लिए उपयुक्त बने हुए हैं। वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि यदि भविष्य में कहीं भी मगरमच्छ या अन्य वन्य जीव दिखाई दें तो उन्हें नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें बल्कि तुरंत वन विभाग को सूचना दें ताकि वन्य जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ग्रामीणों की सतर्कता से सुरक्षित बच सके शिशु मगरमच्छ
इस पूरी घटना में ग्रामीणों की सतर्कता और समय पर दी गई सूचना सबसे महत्वपूर्ण साबित हुई। यदि समय रहते वन विभाग को सूचना नहीं मिलती तो शिशु मगरमच्छों के लिए खतरा बढ़ सकता था। वन विभाग ने भी स्थानीय लोगों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि वन्य जीव संरक्षण में जनभागीदारी की भूमिका बेहद अहम होती है। समय पर सूचना मिलने से सभी 35 शिशु मगरमच्छों को सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास में पहुंचा दिया गया और क्षेत्र में किसी प्रकार की अप्रिय घटना भी नहीं हुई।
LATEST NEWS