ग्राम पंचायत कचनरवा के टोला हडवरिया में रविवार की शाम रोज की तरह ही सामान्य थी, लेकिन रात होते-होते वहां मातम पसर गया। बुजुर्ग दंपती, जाशो देवी और उनके पति जगन राम, कड़ाके की ठंड से बचने के लिए अपनी फूस की झोपड़ी के भीतर अलाव जलाकर बैठे थे। राहत की गर्मी पाने की उम्मीद में बुजुर्ग महिला ने जैसे ही अलाव में थोड़ा सा पुआल डाला, आग ने भयानक रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते आग की लपटें इतनी बेकाबू हो गईं कि उन्होंने पूरी झोपड़ी को अपनी आगोश में ले लिया। आग का विकराल रूप देख पति जगन राम तो किसी तरह लड़खड़ाते हुए बाहर निकल आए, लेकिन वृद्धा जाशो देवी को संभलने और बाहर निकलने का एक पल भी नसीब नहीं हुआ। वह आग के उस दरिया में फंसी रह गईं और झोपड़ी उनकी चिता बन गई।
घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब तक आसपास के ग्रामीण चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पड़ोसियों और ग्रामीणों ने अदम्य साहस दिखाते हुए जलस्रातों और बाल्टियों से आग बुझाने का अथक प्रयास किया, लेकिन सूखी झोपड़ी और तेज लपटों के आगे उनकी एक न चली। काफी मशक्कत के बाद जब आग बुझी, तो अंदर का दृश्य देख हर किसी की रूह कांप गई। वहां बुजुर्ग महिला का शरीर पूरी तरह जलकर खाक हो चुका था और शेष बची थीं तो सिर्फ हड्डियां। यह दृश्य इतना वीभत्स था कि मौके पर मौजूद ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल गमगीन हो गया। मृतका पूर्व प्रमुख वंशीधर की चाची बताई जा रही हैं, जिससे इस घटना की खबर और तेजी से पूरे क्षेत्र में फैल गई।
सूचना मिलते ही सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ और ग्राम प्रधान मौके पर जमा हो गए। ग्रामीणों ने दबी जुबान में बताया कि यह दंपती अपनी गरीबी और ठंड से लड़ने के लिए रोज इसी तरह झोपड़ी में अलाव जलाकर गुजारा करता था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यही अलाव उनकी मौत का कारण बन जाएगा। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया। मौके पर पहुंचे एसओ संजीव सिंह ने स्थिति का जायजा लिया और बताया कि पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
सोनभद्र में लगातार हो रहे ऐसे हादसों ने प्रशासन और आम जनता दोनों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है कि ठंड से बचाव के दौरान थोड़ी सी असावधानी जीवन भर का दर्द दे सकती है।

