वाराणसी: घमहापुर मॉब लिंचिंग केस में पुलिस का बड़ा प्रहार, मनीष सिंह हत्याकांड के दो और आरोपी गिरफ्तार, लगातार कार्रवाई से फरार आरोपियों में बढ़ी बेचैनी
वाराणसी: फूलपुर थाना क्षेत्र के घमहापुर गांव में हुए चर्चित मनीष सिंह हत्याकांड में पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और वांछित आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सड़क हादसे के बाद भड़की भीड़ और उसके बाद हुई हिंसक घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया था। इस बहुचर्चित प्रकरण में अब पुलिस की लगातार कार्रवाई और कड़ी निगरानी का असर साफ दिखाई देने लगा है। एक के बाद एक गिरफ्तारी से जहां फरार आरोपियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं वहीं पुलिस की सक्रियता अपराधियों के लिए लगातार दबाव का कारण बनती जा रही है।
फूलपुर पुलिस की गठित टीम ने मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर कठिराव तिराहे के पास घेराबंदी करते हुए दो वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान राजेश प्रजापति और बृजेश प्रजापति के रूप में हुई है। दोनों लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर थे और लगातार स्थान बदलकर बचने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस टीम उनकी तलाश में लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी।
एक सड़क हादसा और उसके बाद भड़की हिंसा ने लिया था भयावह रूप
बताया जा रहा है कि 26 अप्रैल 2026 को घमहापुर गांव में एक अनियंत्रित कार से महिला को टक्कर लगने के बाद हालात अचानक बिगड़ गए थे। घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा उफान पर पहुंच गया और देखते ही देखते स्थिति ने हिंसक रूप धारण कर लिया। आरोप है कि भीड़ ने कार चालक मनीष सिंह को घेर लिया और उसके साथ मारपीट की गई। इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुए मनीष सिंह की बाद में मौत हो गई थी।
घटना की जानकारी सामने आते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं रहा बल्कि भीड़ के उग्र रूप और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले गंभीर मामले के रूप में सामने आया। मृतक के परिजनों की तहरीर पर फूलपुर थाने में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया और इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच को तेज कर दिया।
लगातार दबिश और रणनीतिक कार्रवाई से पुलिस ने बढ़ाया दबाव
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शुरुआत से ही इस प्रकरण को प्राथमिकता दी। फरार आरोपियों तक पहुंचने के लिए लगातार दबिश अभियान चलाया गया। तकनीकी सर्विलांस, स्थानीय सूचना तंत्र और विशेष टीमों की मदद से पुलिस ने ऐसे सभी संभावित स्थानों पर निगरानी बढ़ाई जहां आरोपियों के छिपे होने की आशंका थी।
फरार आरोपियों पर पहले पच्चीस हजार रुपये और बाद में पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। पुलिस के लगातार दबाव और बढ़ती घेराबंदी का असर यह हुआ कि कई आरोपी या तो गिरफ्तार हुए या फिर उन्होंने न्यायालय का रास्ता चुना।
पहले भी कई आरोपी पहुंच चुके हैं सलाखों के पीछे
इस मामले में पुलिस पहले ही चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इतना ही नहीं फरार आरोपियों को शरण देने वालों पर भी कार्रवाई की गई और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा चार मई को पुलिस मुठभेड़ के दौरान दो पचास पचास हजार के इनामी आरोपी आशीष राजभर और मनीष राजभर भी गिरफ्तार किए गए थे। पुलिस के अनुसार उनके कब्जे से अवैध तमंचे और कारतूस भी बरामद किए गए थे।
लगातार बढ़ते पुलिस दबाव का असर आठ मई को भी दिखाई दिया जब दो अन्य इनामी आरोपी नागेंद्र राजभर और गोविंद राजभर ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि लगातार कार्रवाई और सख्त निगरानी के कारण आरोपियों के लिए बच निकलना मुश्किल होता जा रहा है।
दो और आरोपी गिरफ्त में, पूछताछ में जुटी पुलिस
ताजा कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए राजेश प्रजापति उम्र लगभग तैंतीस वर्ष और बृजेश प्रजापति उम्र लगभग तीस वर्ष दोनों ग्राम घमहापुर थाना फूलपुर वाराणसी के निवासी बताए गए हैं। पुलिस दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में अभी भी कुछ आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश तेजी से जारी है।
भीड़तंत्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश
घमहापुर की यह घटना समाज के लिए कई गंभीर सवाल छोड़ गई थी। किसी भी घटना के बाद कानून को अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति किस प्रकार भयावह परिणाम तक पहुंच सकती है यह इस मामले में साफ दिखाई दिया। पुलिस की लगातार कार्रवाई अब यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ कार्रवाई निश्चित है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई जारी है और अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल शेष आरोपियों की भी जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम पर जिले की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में मामले से जुड़े और खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
साभार: विजय लक्ष्मी तिवारी
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