वाराणसी: तपती धूप में कर्तव्य निभाती खाकी का मानवीय चेहरा, नमो घाट पर बिछड़ी मासूम को पर्यटक पुलिस ने परिजनों से मिलाया
वाराणसी: काशी की पहचान केवल उसके घाटों, मंदिरों और आध्यात्मिक विरासत से नहीं है, बल्कि यहां सेवा और संवेदनशीलता की परंपरा भी हमेशा जीवंत दिखाई देती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कमिश्नरेट वाराणसी की पर्यटक पुलिस ने एक बार फिर ऐसा कार्य किया जिसने खाकी के उस मानवीय चेहरे को सामने ला दिया, जिसे देखकर लोगों का भरोसा और मजबूत होता है। तपती धूप, बढ़ती गर्मी और लगातार ड्यूटी के बीच भी पर्यटक पुलिस अपने कर्तव्यों का निर्वाह पूरी जिम्मेदारी और सजगता के साथ कर रही है।
पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के निर्देशानुसार पर्यटकों की सुरक्षा और व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए आज थानाध्यक्ष पर्यटक गौरव कुमार अपनी टीम के साथ नमो घाट क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे। उनके साथ उप निरीक्षक अंकित कुलश्रेष्ठ, हेड कांस्टेबल राजकुमार, कांस्टेबल आदर्श और कांस्टेबल द्विजेश त्रिपाठी भी मौजूद रहे। पूरी टीम लगातार घाट क्षेत्र में भ्रमण कर रही थी और आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क नजर रखे हुए थी।
नाविकों को दिए गए सुरक्षा के कड़े निर्देश
नमो घाट पर गश्त के दौरान पुलिस टीम ने वहां संचालित नाव सेवाओं का भी निरीक्षण किया। नाविकों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी नाविकों को सुरक्षा मानकों का पालन करने और अनिवार्य रूप से लाइफ जैकेट का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि घाटों पर आने वाले हजारों पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गश्त के दौरान मिली संवेदनशील सूचना
इसी दौरान भ्रमण के बीच पुलिस टीम को एक सूचना मिली कि नमो घाट पर बने फोल्डिंग हैंड के नीचे एक छोटी बच्ची रो रही है और काफी घबराई हुई अवस्था में इधर उधर भटक रही है। सूचना मिलते ही पर्यटक पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। वहां पहुंचकर पुलिस टीम ने देखा कि मासूम बच्ची डरी और सहमी हुई दिखाई दे रही थी। आसपास भीड़ तो थी लेकिन बच्ची अपने परिजनों से दूर होकर बेहद परेशान नजर आ रही थी।
थानाध्यक्ष गौरव कुमार ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बच्ची को अपने संरक्षण में लिया और उसे ढांढस बंधाया। पुलिस टीम ने बच्ची को शांत कराया और उससे बातचीत कर जानकारी जुटाने का प्रयास किया। इसके बाद तत्काल बच्ची के परिजनों की तलाश शुरू कर दी गई।
सूझबूझ और तत्परता से परिवार तक पहुंची पुलिस
पर्यटक पुलिस की तत्परता और सूझबूझ का परिणाम यह रहा कि कुछ ही समय में बच्ची के परिजनों का पता लगा लिया गया। आवश्यक पूछताछ और तस्दीक के बाद मासूम बच्ची को सकुशल उसके परिवार को सौंप दिया गया। बच्ची की पहचान अनायत वारसी के रूप में हुई। परिजनों ने बताया कि वे गोपीगंज से नमो घाट घूमने आए थे और फोटो खिंचवाने के दौरान उनकी बेटी अचानक उनसे बिछड़ गई थी।
अपनी मासूम बच्ची को अचानक गायब देखकर परिवार बेहद घबरा गया था और उसकी तलाश में इधर उधर दौड़ रहा था। लेकिन जब पर्यटक पुलिस ने उनकी बच्ची को सुरक्षित उनके हवाले किया तो परिवार की आंखें भर आईं। अपने कलेजे के टुकड़े को सुरक्षित देखकर परिजनों ने राहत की सांस ली और भावुक होकर पूरी पुलिस टीम का आभार व्यक्त किया।
मानवता और सेवा की मिसाल बनी खाकी
इस घटना के बाद नमो घाट पर मौजूद स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने भी पर्यटक पुलिस की जमकर सराहना की। लोगों का कहना था कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं है बल्कि जरूरत पड़ने पर वह एक संरक्षक और सहारा बनकर भी सामने आती है। पर्यटक पुलिस का यह मानवीय कार्य लोगों के दिलों को छू गया।
वाराणसी में आने वाले लाखों पर्यटकों के बीच सुरक्षा और विश्वास का वातावरण बनाए रखने में पर्यटक पुलिस की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। यह घटना केवल एक बच्ची को उसके परिवार से मिलाने की कहानी नहीं बल्कि खाकी के उस जिम्मेदार और संवेदनशील स्वरूप की तस्वीर है जो हर परिस्थिति में लोगों के साथ खड़ा दिखाई देता है।
साभार: विजय लक्ष्मी तिवारी
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