वाराणसी में ई-रजिस्ट्री योजना के विरोध में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन, रामनगर उप निबंधन कार्यालय पर गरजे वकील; योजना वापस लेने की उठी मांग
वाराणसी/रामनगर: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में सोमवार को रामनगर स्थित उप निबंधन कार्यालय परिसर अधिवक्ताओं के आक्रोश का केंद्र बन गया। रामनगर दी लायर्स एसोसिएशन के बैनर तले बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने धरना-प्रदर्शन करते हुए सरकार से ई-रजिस्ट्री योजना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व संस्था के अध्यक्ष विनय सिंह ‘पिस्टल’ ने किया। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त तैयारी, आवश्यक संसाधनों और अधिवक्ताओं सहित आम नागरिकों की व्यावहारिक समस्याओं को समझे प्रदेशभर में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू करने का निर्णय जल्दबाजी में लिया गया है, जिससे आम जनता, दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता और रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े हजारों लोगों के सामने गंभीर कठिनाइयां खड़ी हो सकती हैं।
बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति, सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय
रामनगर दी लायर्स एसोसिएशन की एक आवश्यक बैठक 28 जून को आयोजित की गई थी, जिसमें संस्था के सभी अधिवक्ताओं ने विस्तार से ई-रजिस्ट्री व्यवस्था पर चर्चा की। बैठक में अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्तमान स्वरूप में लागू की जा रही यह योजना व्यावहारिक नहीं है। बैठक के दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार से इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की जाएगी तथा इसके विरोध में 29 जून को उप निबंधन कार्यालय रामनगर में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ता उप निबंधन कार्यालय पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में संस्था के संरक्षक मंडल सदस्य रविन्द्र पाण्डेय, रामचंद्र यादव, विष्णु श्रीवास्तव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरुण जायसवाल, महामंत्री अविनाश चौहान, कार्यकारिणी सदस्य सुरेन्द्र यादव, अतुल मेहरा, श्याम जी सिंह, विनय सिंह, संतोष राय, विनय मौर्य, राजेश सिंह, आशीष चौहान सहित अनेक अधिवक्ता मौजूद रहे।
क्या है ई-रजिस्ट्री योजना?
ई-रजिस्ट्री व्यवस्था का उद्देश्य संपत्ति के पंजीकरण की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाना है। इस व्यवस्था के तहत दस्तावेजों का ऑनलाइन सत्यापन, डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया तथा कई चरणों का डिजिटलीकरण किया जाना प्रस्तावित है। शासन का मानना है कि इससे फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा, रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और नागरिकों को भविष्य में सुविधा मिलेगी।
हालांकि अधिवक्ताओं का कहना है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को पर्याप्त प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधन और मजबूत डिजिटल व्यवस्था उपलब्ध कराना आवश्यक है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, तकनीकी जानकारी और आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अध्यक्ष विनय सिंह ‘पिस्टल’ ने क्या कहा?
एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय सिंह ‘पिस्टल’ ने कहा कि अधिवक्ता आधुनिक तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसी भी व्यवस्था को बिना पर्याप्त तैयारी के लागू करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि ई-रजिस्ट्री योजना वर्तमान स्वरूप में आम जनता और अधिवक्ताओं के हितों के अनुरूप नहीं है। यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता और सुविधा चाहती है तो पहले अधिवक्ताओं एवं संबंधित पक्षों से संवाद स्थापित करे, तकनीकी कमियों को दूर करे और उसके बाद ही ऐसी व्यवस्था लागू करे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक सरकार इस योजना पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक अधिवक्ताओं का लोकतांत्रिक विरोध जारी रहेगा।
रविन्द्र पाण्डेय बोले— संवाद के बिना लिया गया निर्णय स्वीकार्य नहीं
संरक्षक मंडल सदस्य रविन्द्र पाण्डेय ने कहा कि प्रदेश के लाखों लोगों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी व्यवस्था में व्यापक परामर्श आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और आम नागरिकों की राय लिए बिना इस प्रकार का निर्णय लागू करना उचित नहीं है। उनका कहना था कि सरकार को पहले जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं का अध्ययन करना चाहिए और सभी पक्षों को विश्वास में लेकर ही किसी नई व्यवस्था को लागू करना चाहिए।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरुण जायसवाल ने जताई तकनीकी चुनौतियों की चिंता
एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरुण जायसवाल ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था तभी सफल हो सकती है जब प्रदेश के प्रत्येक उप निबंधन कार्यालय में मजबूत तकनीकी ढांचा, प्रशिक्षित कर्मचारी और निर्बाध इंटरनेट सुविधा उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कई स्थानों पर तकनीकी बाधाएं सामने आती हैं, जिससे आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ सकती है। उनका कहना था कि सरकार को पहले आधारभूत व्यवस्थाओं को मजबूत करना चाहिए और उसके बाद नई प्रणाली लागू करनी चाहिए।
लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा विरोध
धरना-प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने सरकार से ई-रजिस्ट्री योजना पर पुनर्विचार करने तथा वर्तमान स्वरूप में इसे तत्काल वापस लेने की मांग दोहराई। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। अधिवक्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि ऐसी प्रणाली सुनिश्चित कराना है जिससे आम नागरिकों, अधिवक्ताओं और पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों के हित सुरक्षित रह सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।
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