औरंगाबाद के हसपुरा अंचल में लिपिक 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार, बेउर जेल भेजा गया
बिहार के औरंगाबाद जिले के हसपुरा अंचल कार्यालय में सोमवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लिपिक श्लोक कुमार को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। करीब 80 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पाने वाले लिपिक की गिरफ्तारी के बाद जिले के सरकारी दफ्तरों में हड़कंप मच गया। निगरानी की टीम उन्हें कार्यालय से सीधे पटना ले गई, जहां मंगलवार को न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बेउर जेल भेज दिया गया।
निगरानी टीम ने बिछाया जाल
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की पटना से आई टीम ने मामले का सत्यापन किया। शिकायत सही पाए जाने पर जाल बिछाया गया और तय योजना के तहत लिपिक को कार्यालय में ही रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ लिया गया। बताया जा रहा है कि संबंधित लिपिक ने दाखिल खारिज से जुड़े कार्य के बदले रुपये की मांग की थी।
जिला पदाधिकारी ने किया निलंबित
कार्रवाई के बाद जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने त्वरित कदम उठाते हुए श्लोक कुमार को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वहन भत्ता दिया जाएगा। स्थापना शाखा के प्रभारी पदाधिकारी ने पुष्टि की कि लिपिक की नियुक्ति करीब सात वर्ष पूर्व अनुकंपा के आधार पर हुई थी। कम समय में बेहतर वेतन प्राप्त करने के बावजूद रिश्वत लेने की घटना ने विभाग की छवि को प्रभावित किया है।
सीओ के नाम पर मांगने की चर्चा
गिरफ्तारी के बाद अंचल कार्यालय से लेकर समाहरणालय तक तरह तरह की चर्चाएं होती रहीं। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि लिपिक ने अंचलाधिकारी के नाम पर राशि की मांग की थी। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दाखिल खारिज में रिश्वत की शिकायतें
स्थानीय लोगों का कहना है कि हसपुरा ही नहीं बल्कि अन्य अंचलों में भी बिना रिश्वत के दाखिल खारिज का कार्य कराना कठिन माना जाता है। ऐसे आरोप समय समय पर सामने आते रहे हैं। कार्रवाई के बावजूद जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतें पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई हैं।
राज्य स्तर पर अव्वल रहा अंचल अब चर्चा में
विडंबना यह है कि हसपुरा अंचल लंबित मामलों के निष्पादन में राज्य स्तर पर पहला स्थान प्राप्त कर चुका है। बेहतर रैंकिंग के बावजूद रिश्वतखोरी की घटना ने उस उपलब्धि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि आंकड़ों में सुधार दिखाने के साथ साथ कार्यप्रणाली में पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस वर्ष निगरानी की दूसरी बड़ी कार्रवाई
जिले में इस वर्ष निगरानी की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 19 जनवरी को दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल में कार्यरत एक लिपिक को जीएनएम अर्चना कुमारी से छुट्टी स्वीकृति के बदले दो हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। उसे भी न्यायिक प्रक्रिया के बाद बेउर जेल भेजा गया था।
वर्ष 2025 में भी अंचल और थाना स्तर पर कई कार्रवाई की गई थीं। 12 अगस्त 2025 को ओबरा अंचल के सोनहुली पंचायत के राजस्व कर्मचारी प्रमोद कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। इसके करीब पंद्रह दिन बाद नगर थाना गेट के पास एक दारोगा को अधिवक्ता से 20 हजार रुपये लेते पकड़ा गया था। देव अंचल में भी राजस्व कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर पर रिश्वतखोरी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।
कार्रवाई के बाद भी नहीं थम रही रिश्वतखोरी
लगातार हो रही गिरफ्तारियों से यह स्पष्ट है कि निगरानी एजेंसियां सक्रिय हैं, लेकिन रिश्वतखोरी पर पूर्ण नियंत्रण अब भी चुनौती बना हुआ है। हर बड़ी कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बनता है, लेकिन समय बीतने के साथ स्थितियां फिर सामान्य हो जाती हैं। प्रशासन का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त निगरानी और जन जागरूकता दोनों आवश्यक हैं, ताकि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
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