कानपुर में फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर ठगी करने वाला आरोपी गिरफ्तार
कानपुर पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराने धमकाने और नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी कर रहा था। आरोपी की पहचान संजय कुमार के रूप में हुई है जो उन्नाव का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार आरोपी पुलिस की वर्दी पहनकर घूमता था ताकि उस पर किसी को शक न हो। जांच में यह भी सामने आया कि वह अपने साथ लाइटर जैसी दिखने वाली खिलौना पिस्तौल रखता था जिससे लोगों पर रौब जमाया जा सके।
फर्जी पहचान पत्र और सरकारी नंबर प्लेट का इस्तेमाल
पुलिस तलाशी के दौरान संजय कुमार के पास से उत्तर प्रदेश पुलिस और सीबीआई के कई फर्जी पहचान पत्र बरामद किए गए। इनमें से कुछ पहचान पत्रों पर उन्नाव पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के डीआईजी की मुहर लगी हुई थी। पुलिस के अनुसार यह सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। इसके साथ ही आरोपी की कार पर फर्जी सरकारी नंबर प्लेट लगी हुई थी। कार एक आई20 थी जिस पर यूपी32ईजी2250 नंबर प्लेट लगी थी जो लखनऊ आयकर संयुक्त आयुक्त के नाम पर पंजीकृत बताई गई थी। जांच में सामने आया कि वाहन का वास्तविक पंजीकरण नंबर यूपी35बीके8203 है। पुलिस ने नकली पिस्तौल और प्लास्टिक के कारतूस भी जब्त किए हैं।
डीसीपी सेंट्रल का बयान
डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि संजय कुमार पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को नौकरी दिलाने तबादले कराने और पदोन्नति करवाने का लालच देता था। इसके बदले वह उनसे पैसे ऐंठता था। पुलिस को मंगलवार को अनवरगंज थाना क्षेत्र से सूचना मिली थी कि पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति संदिग्ध रूप से घूम रहा है। सूचना पर पहुंची पुलिस टीम ने उसे मौके पर हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से फर्जी पहचान पत्र और खिलौना पिस्तौल बरामद हुई।
होटलों और स्कूलों में फर्जी इंटरव्यू
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों को भरोसे में लेने के लिए होटलों और स्कूलों में फर्जी इंटरव्यू आयोजित करता था। वह खुद को अधिकारी बताकर उम्मीदवारों से संपर्क करता और उन्हें नियुक्ति पत्र दिलाने का आश्वासन देता था। इसके बाद उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है। पुलिस अब पीडितों की पहचान कर उनके बयान दर्ज कर रही है।
साथियों की भूमिका और जांच
पूछताछ में संजय कुमार ने दावा किया है कि पुलिस की वर्दी और अन्य उपकरण दुर्गेश के थे। उसने यह भी बताया कि दुर्गेश खुद को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का पीएसओ बताता था और उसी ने फर्जी सरकारी नंबर प्लेट उपलब्ध कराई थी। संजय का कहना है कि उसकी मुलाकात दुर्गेश से करीब सात से आठ महीने पहले उन्नाव आते जाते समय हुई थी। उसने यह भी बताया कि वह पहले टोइंग वाहन का काम करता था लेकिन लगभग डेढ साल पहले उसने यह काम छोड़ दिया था। उसके अनुसार वाहन की किस्त बकाया होने के कारण फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि इस मामले में दुर्गेश और विजय नाम के दो अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है। दोनों फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के नेटवर्क और इसके जरिये की गई ठगी की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही जिन लोगों से नौकरी और स्थानांतरण के नाम पर पैसा लिया गया है उनसे संपर्क कर मामले को मजबूत किया जा रहा है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के ऐसे दावों पर भरोसा न करें और किसी तरह की ठगी की आशंका होने पर तुरंत नजदीकी थाने में सूचना दें।
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