प्रयागराज की गोशालाओं में अनियमितता उजागर, गोवंश को नहीं मिल रहा हरा चारा
प्रयागराज जिले की सरकारी गोशालाओं में बड़ी अनियमितता सामने आई है। यहां संरक्षित गोवंश को निर्धारित मानकों के अनुसार हरा चारा नहीं मिल रहा, बल्कि उन्हें केवल सूखा भूसा और पुआल खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जबकि प्रशासनिक स्तर पर दावा किया जा रहा है कि सभी गोशालाओं में हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था है।
121 गोशालाओं में 25 हजार से अधिक गोवंश
जिले के गंगापार और यमुनापार क्षेत्रों में स्थायी और अस्थायी मिलाकर कुल 121 गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें करीब 25 हजार गोवंश संरक्षित हैं। शासन द्वारा प्रति गोवंश प्रतिदिन 50 रुपये भरण पोषण के लिए दिए जा रहे हैं।
इसके बावजूद गोशालाओं में मवेशियों को संतुलित आहार नहीं मिल पा रहा है, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जमीनी हकीकत और दावों में बड़ा अंतर
अधिकारियों का दावा है कि सभी गोशालाओं में हरा चारा उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन जमीनी जांच में स्थिति इसके विपरीत मिली। कौड़िहार, जसरा, कोरांव, शंकरगढ़ और मऊआइमा ब्लॉक क्षेत्रों की करीब 15 गोशालाओं की पड़ताल में केवल कौधियारा ब्लॉक की कुल्हड़िया गोशाला में ही साइलेज मिला, जबकि अन्य स्थानों पर हरे चारे का अभाव देखा गया।
व्यवस्थाएं कागजों तक सीमित
शासन ने हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों की खाली पड़ी जमीनों पर चारा बोने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही किसानों से चारा खरीदने और साइलेज की आपूर्ति के लिए कार्यदायी संस्था भी तय की गई थी।
हालांकि, इनमें से अधिकांश व्यवस्थाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं दिखीं। कई ग्राम प्रधानों को साइलेज के बारे में जानकारी तक नहीं है और कई जगह सिर्फ कागजी खानापूरी की गई।
45 गोशालाओं में नहीं हुई चारे की बोआई
रिपोर्ट के अनुसार जिले की 121 गोशालाओं में से 45 में हरे चारे की बोआई ही नहीं की गई। कुछ स्थानों पर बोआई के नाम पर औपचारिकता पूरी कर दी गई, जिससे गोवंश के लिए चारे की समस्या बनी हुई है।
ग्राम पंचायतों की लापरवाही
गोशालाओं का संचालन करने वाली ग्राम पंचायतें केवल मवेशियों की संख्या दर्ज कराने और बजट प्राप्त करने तक ही सीमित नजर आ रही हैं। गोवंश के वास्तविक भरण पोषण पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अधिकारियों का दावा
इस मामले में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवनाथ यादव का कहना है कि सभी गोशालाओं में गोवंश को हरा चारा दिया जा रहा है और जहां कमी होती है वहां साइलेज की व्यवस्था भी की गई है।
हालांकि, जमीनी स्थिति और प्रशासनिक दावों के बीच अंतर ने गोशालाओं की व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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