गोंडा में दहेज मांग से टूटी शादी, आहत युवती ने लगाई फांसी
गोंडा। जिले में दहेज प्रथा से जुड़ा एक बेहद दुखद मामला सामने आया है, जहां शादी टूटने से आहत एक युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
आठ माह पहले तय हुई थी शादी
परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, युवती की शादी करीब आठ महीने पहले एक युवक के साथ तय हुई थी, जो चांदनी चौक क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। विवाह तय होने के बाद युवक का युवती के घर आना-जाना शुरू हो गया था और दोनों के बीच बातचीत भी होने लगी थी।
इसी दौरान युवक ने भरोसा दिलाकर युवती से नजदीकियां बढ़ाईं और उसे शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए।
दहेज की बढ़ती मांग बनी वजह
परिजनों का आरोप है कि प्रारंभ में विवाह के लिए एक लाख रुपये दहेज तय हुआ था, लेकिन बाद में युवक और उसके परिवार ने पांच लाख रुपये की मांग करनी शुरू कर दी।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण युवती का परिवार यह मांग पूरी नहीं कर सका। इसके बाद युवक ने शादी से साफ इनकार कर दिया और दूसरी जगह विवाह तय कर लिया।
अवसाद में थी युवती
इस घटना के बाद युवती गहरे मानसिक तनाव और अवसाद में चली गई थी। परिजनों के अनुसार, वह पिछले एक सप्ताह से काफी परेशान और चुपचाप रहने लगी थी।
गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे वह घर की छत पर बने कमरे में गई, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटी। देर रात करीब एक बजे जब परिजन उसे देखने पहुंचे और दरवाजा खोला तो वह साड़ी के फंदे से लटकी मिली।
अस्पताल में मृत घोषित
परिजन तत्काल उसे नीचे उतारकर अयोध्या मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवती की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया है।
पुलिस जांच में जुटी
थानाध्यक्ष प्रबोध कुमार ने बताया कि परिजनों की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की पुष्टि होगी और आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों में आक्रोश
घटना के बाद गांव में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि दहेज प्रथा के कारण एक और बेटी की जान चली गई, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
स्थानीय लोगों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि ऐसे मामलों में कठोर कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
दहेज प्रथा पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर समाज में व्याप्त दहेज प्रथा की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। कानून के बावजूद इस कुप्रथा का प्रभाव ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और मानसिकता में बदलाव के बिना इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।
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