ईरान-इजरायल युद्ध का असर: खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिक महंगे किराए देकर लौटने को मजबूर
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : ईरान और इजरायल के बीच जारी तनावपूर्ण स्थिति अब व्यापक युद्ध का रूप लेती दिख रही है, जिसका सीधा असर खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों पर पड़ रहा है। बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन, इराक, ओमान, तुर्की और सीरिया जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामकाजी और व्यवसायिक गतिविधियों के लिए मौजूद हैं, लेकिन मौजूदा हालात के चलते वे असुरक्षा और अनिश्चितता के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
तीन-चार गुना महंगे हुए हवाई किराए
युद्ध के लंबे खिंचने की आशंका के बीच भारतीय नागरिक अब तेजी से स्वदेश लौटने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। हवाई टिकटों के दाम सामान्य से तीन से चार गुना तक बढ़ गए हैं। कई यात्रियों ने बताया कि मजबूरी में उन्हें महंगे टिकट खरीदकर किसी तरह भारत लौटना पड़ रहा है, जबकि कुछ लोग टिकट के बढ़े हुए दाम के कारण अभी भी विदेशों में फंसे हुए हैं।
उड़ानें रद्द, बढ़ी चिंता
हवाई हमलों और सुरक्षा कारणों से कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं। इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों की उड़ानें बार-बार कैंसिल हो रही हैं, जिससे उनका मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है। एयरलाइंस कंपनियां भी स्पष्ट रूप से यह नहीं बता पा रही हैं कि स्थिति कब सामान्य होगी।
पूर्वांचल के युवाओं पर सबसे ज्यादा असर
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़, जौनपुर और मऊ जिलों के हजारों युवा खाड़ी देशों में रोजगार के लिए गए हुए हैं। युद्ध के कारण इन जिलों के परिवारों में चिंता का माहौल है। आजमगढ़ के देवगांव निवासी अब्दुल कलाम ने बताया कि वह ईद के मौके पर घर आना चाहते थे, लेकिन उनकी 18 मार्च की फ्लाइट अचानक रद्द हो गई। बाद में उन्हें बेंगलुरु के रास्ते टिकट लेकर यात्रा करनी पड़ी।
इसी तरह पिंडरा के अरशद खान ने भी उड़ान रद्द होने की समस्या का सामना किया। जौनपुर के जनीद अख्तर ने फोन पर बताया कि रोज काम पर जाते समय उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर बना रहता है।
व्यवसायी भी प्रभावित, किसी तरह लौट रहे लोग
जौनपुर के केराकत निवासी यासीर शेख, जो दुबई में लांड्री का व्यवसाय करते हैं, ने बताया कि उन्होंने तीन गुना किराया देकर किसी तरह लखनऊ तक का टिकट लिया और वहां से सड़क मार्ग से अपने घर लौटने की कोशिश की। वहीं, शारजाह में सीसीटीवी का काम करने वाले समीर खान कैफी ने बताया कि वह घर लौटना चाहते हैं, लेकिन अत्यधिक महंगे टिकट के कारण फिलहाल नहीं आ पा रहे हैं।
जौनपुर के जहांगीर ने बताया कि उनकी शादी 20 अप्रैल को तय है, लेकिन वह पिछले 45 दिनों से भारत लौटने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक उनकी चार उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जिससे परिवार में चिंता बढ़ गई है।
ट्रैवल एजेंटों को भी भारी नुकसान
इस संकट का असर ट्रैवल इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। उड़ानों के रद्द होने और रूट बदलने के कारण ट्रैवल एजेंटों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब यूरोप जाने वाली अधिकांश उड़ानें दुबई के बजाय अफ्रीका के रास्ते संचालित हो रही हैं, जिससे किराया कई गुना बढ़ गया है। ट्रैवेल्स संचालक प्रदीप चौरसिया ने बताया कि उन्हें कई टूर पैकेज रद्द करने पड़े हैं, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ है।
वाराणसी-शारजाह उड़ान भी प्रभावित
वाराणसी से शारजाह के बीच संचालित होने वाली उड़ान 28 फरवरी से ही रद्द चल रही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस के स्थानीय प्रबंधक विक्रांत के अनुसार, मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि उड़ान सेवाएं कब तक सामान्य हो पाएंगी।
खाड़ी देशों में भारतीयों की संख्या
खाड़ी और आसपास के देशों में भारतीयों की बड़ी संख्या निवास करती है, जिनमें सऊदी अरब में लगभग 25 से 30 लाख, दुबई में 15 से 20 लाख, कुवैत में 10 से 11 लाख, कतर और ओमान में 7 से 7.5 लाख, तथा बहरीन में 3 से 3.2 लाख भारतीय शामिल हैं।
इसके अलावा, इजरायल में करीब 20 हजार, जॉर्डन में 20 हजार, तुर्की में लगभग 3 हजार, ईरान में 9 हजार, इराक में 200 से 300 और सीरिया में 100 से कम भारतीय नागरिक मौजूद हैं।
परिजनों में चिंता, सुरक्षित वापसी की उम्मीद
खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। भारत में उनके परिजन भी उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर चिंतित हैं और सरकार से राहत एवं सहायता की उम्मीद कर रहे हैं। मौजूदा हालात में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जल्द से जल्द स्थिति सामान्य हो और फंसे हुए नागरिक सुरक्षित अपने घर लौट सकें।
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