वाराणसी की डिजाइनर आकांक्षा सिंह ने बनाई ओलंपिक खिलाड़ियों के लिए खास टाई, बनारस की संस्कृति को मिला वैश्विक मंच
वाराणसी की फैशन डिजाइनर आकांक्षा सिंह ने अपनी रचनात्मकता और सांस्कृतिक समझ के जरिए एक ऐसा अनूठा कार्य किया है, जिसने बनारस की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने पेरिस ओलंपिक में भाग लेने वाली भारतीय हॉकी टीम के उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए विशेष टाई डिजाइन की, जिसमें बनारस की पारंपरिक कला और संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।
शौक को बनाया पहचान, कला से रचा नया आयाम
आकांक्षा सिंह फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक डिजाइनर तक सीमित नहीं है। उनकी कला में प्रयोगधर्मिता और सांस्कृतिक गहराई साफ दिखाई देती है। जब भी वह अपने हुनर को कागज या कपड़े पर उतारती हैं, तो उसमें कुछ नया और अलग देखने को मिलता है।
उनका यह विशेष क्रिएशन तब चर्चा में आया जब उन्होंने ओलंपिक जैसे वैश्विक मंच के लिए भारतीय खिलाड़ियों के परिधान का हिस्सा बनने वाली टाई तैयार की।
बनारस की हस्तकला और परंपरा का समावेश
इस विशेष टाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें वाराणसी के हाथ से बने कपड़े का उपयोग किया गया है। इसके रंग पूरी तरह केमिकल मुक्त हैं, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाते हैं। साथ ही टाई के डिजाइन में बनारस के प्रसिद्ध घाटों और मंदिरों की झलक को भी शामिल किया गया है।
आकांक्षा सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल एक फैशन प्रोडक्ट तैयार करना नहीं था, बल्कि इसके जरिए बनारस की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना था।
ओलंपियन ललित उपाध्याय ने की सराहना
अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित और भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी ललित उपाध्याय ने इस टाई की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक परिधान नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास खिलाड़ियों को आत्मविश्वास देते हैं और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
ललित उपाध्याय के अनुसार, यह टाई भारतीय खेलों में एक नई पहचान जोड़ती है और खिलाड़ियों को वैश्विक मंच पर अलग पहचान दिलाने में मदद करती है।
स्थानीय कारीगरों को मिला रोजगार
इस टाई के निर्माण में स्थानीय कारीगरों की अहम भूमिका रही है। आकांक्षा सिंह ने बताया कि उन्होंने बनारस के कारीगरों के साथ मिलकर इस डिजाइन को तैयार किया। इससे न केवल स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा मिला, बल्कि कारीगरों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हुए।
यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा को भी मजबूत करती है, जिसमें स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
बनारस की पहचान को मिला वैश्विक विस्तार
वाराणसी सदियों से अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं के लिए विश्व प्रसिद्ध रहा है। आकांक्षा सिंह की यह पहल इस विरासत को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
उन्होंने बताया कि इस टाई के माध्यम से बनारस की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निखारने में मदद मिली है। यह न केवल खिलाड़ियों के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे शहर के लिए सम्मान का विषय है।
अन्य डिजाइनों से भी बटोरी सुर्खियां
आकांक्षा सिंह इससे पहले भी अपने विशेष डिजाइनों को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं। राम नवमी के अवसर पर उनके द्वारा तैयार किए गए विशेष डिजाइन बैग भी काफी सराहे गए थे।
उनकी कोशिश रहती है कि हर डिजाइन में भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक हो, जिससे आधुनिकता और परंपरा का सुंदर समन्वय देखने को मिले।
फैशन के साथ संस्कृति का संदेश
आकांक्षा सिंह का यह प्रयास यह दर्शाता है कि फैशन केवल दिखावे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कृति और पहचान का भी माध्यम बन सकता है। उनकी डिजाइन की गई यह टाई इस बात का प्रमाण है कि यदि रचनात्मकता को सही दिशा मिले, तो वह स्थानीय पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचा सकती है।
उनका यह कार्य न केवल अन्य डिजाइनरों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
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