वाराणसी: रामनगर में धूमधाम से मनी बाबा साहेब की जयंती विचारों को आत्मसात करने का लिया संकल्प
वाराणसी/रामनगर: सामाजिक न्याय समानता और मानवाधिकारों के महान पुरोधा तथा भारतीय संविधान के शिल्पकार भारत रत्न श्रद्धेय बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती मंगलवार को पूरे उत्साह श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई गई। कैंट विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बूथ संख्या 357 रामपुर तथा ग्राम सभा भीटी रामनगर में आयोजित कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर बाबा साहेब की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया और उनके विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया गया।
सुबह से दिखा उत्सव जैसा माहौल
सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर उत्सव जैसा वातावरण देखने को मिला। जगह जगह फूलों से सजी प्रतिमाएं हाथों में मालाएं लिए लोग और बाबा साहेब के जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष समर्पण और परिवर्तन का प्रतीक है जो आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने रखे अपने विचार
नगर पालिका परिषद रामनगर की पूर्व अध्यक्ष सुश्री आशा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहेब केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचारधारा हैं। उन्होंने समाज के हर वर्ग को समान अधिकार दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को उनके संघर्षों से प्रेरणा लेकर समाज में समानता और न्याय की स्थापना के लिए आगे आना चाहिए।
जिला मंत्री पूर्व अशोक जायसवाल ने कहा कि बाबा साहेब का संविधान आज भी देश को मजबूती से जोड़े हुए है। उन्होंने कहा कि यदि आज देश में लोकतंत्र मजबूत है तो इसका सबसे बड़ा श्रेय बाबा साहेब को जाता है। उनके बनाए संविधान ने हर नागरिक को अधिकार और सम्मान प्रदान किया है।
महानगर मंत्री डॉ अनुपम गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताया था। उन्होंने कहा कि यदि समाज को आगे बढ़ाना है तो शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के आदर्शों को अपनाकर एक सशक्त राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
महामंत्री जितेंद्र पांडे उर्फ झुनझुन जी ने बाबा साहेब के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपनी प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति से इतिहास रच दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने समाज में व्याप्त भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई और समानता का मार्ग प्रशस्त किया।
पार्षद लल्लन सोनकर ने कहा कि बाबा साहेब ने हमें आत्मसम्मान के साथ जीना सिखाया। उन्होंने कहा कि आज भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस समय थे। वहीं महामंत्री रितेश पाल गौतम ने कहा कि बाबा साहेब का सपना एक ऐसे भारत का था जहां हर व्यक्ति को बराबरी का अधिकार मिले और किसी के साथ भेदभाव न हो।
बड़ी संख्या में लोगों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में पूर्व पार्षद मीना सोनकर राजाराम खरवार भैयालाल सोनकर सुनील श्रीवास्तव सुनील राजपूत ललित सिंह मंजय पाल पंकज बारी जवाहर यादव विवेक पटेल आनंद टीटू सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक साथ मिलकर बाबा साहेब के जन्मोत्सव को हर्षोल्लास और गरिमा के साथ मनाया।
बाबा साहेब का जीवन और योगदान
डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त कर न केवल खुद को स्थापित किया बल्कि पूरे समाज के लिए एक नई दिशा तय की। वे एक महान विधिवेत्ता अर्थशास्त्री समाज सुधारक और दूरदर्शी नेता थे। उन्होंने भारतीय संविधान की रचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी दी गई।
बाबा साहेब ने दलितों पिछड़ों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने सामाजिक भेदभाव और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई और एक समतामूलक समाज की स्थापना के लिए काम किया। शिक्षा समानता और अधिकारों की उनकी विचारधारा आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
क्यों मनाई जाती है जयंती
हर वर्ष 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती उनके योगदान और विचारों को याद करने के लिए मनाई जाती है। यह दिन केवल एक उत्सव नहीं बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात करने और समाज में समानता न्याय और भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लेने का अवसर होता है।
रामनगर में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक बना बल्कि यह भी संदेश दे गया कि बाबा साहेब के विचार आज भी समाज की आत्मा में जीवित हैं और आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते रहेंगे।
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