ज्ञानपुर में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब 10 करोड़ से अधिक की ठगी का खुलासा
भदोही: ज्ञानपुर पुलिस ने गुरुवार को एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए देशभर में फैले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह निवेश लोन और सरकारी योजनाओं के नाम पर भोले भाले लोगों को निशाना बनाकर अब तक दस करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दे चुका है। इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है जिसने लोगों को ठगी के नए तौर तरीकों के प्रति सतर्क कर दिया है।
सुनियोजित तरीके से चलता था ठगी का खेल
पुलिस लाइन सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने बताया कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से कार्य करता था। आरोपी पहले जरूरतमंद लोगों को लोन दिलाने या सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देते थे। इसके बाद उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाकर पासबुक एटीएम कार्ड और खाते से जुड़े मोबाइल नंबर अपने कब्जे में ले लेते थे। इन खातों का उपयोग देश के अलग अलग हिस्सों में किए गए साइबर फ्रॉड की रकम को मंगाने और निकालने के लिए किया जाता था।
शिकायत से खुला पूरा नेटवर्क
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बालीपुर निवासी अमन कुमार बिंद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि लोन की आवश्यकता के दौरान उनकी मुलाकात अस्तिव वर्मा उर्फ रौनक अंशुल मिश्रा और ध्रुव पाठक से हुई। इन लोगों ने उनका और उनकी बहन का बैंक खाता खुलवाया और एटीएम कार्ड पासबुक तथा सिम कार्ड अपने पास रख लिए। जब अमन ने अपने दस्तावेज वापस मांगे तो आरोपियों ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया जिससे उन्हें धोखाधड़ी का संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
तीन आरोपी गिरफ्तार कई राज्यों से जुड़े तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ जिसमें कई राज्यों के अपराधियों की संलिप्तता सामने आई। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने गोपीगंज ओवरब्रिज के पास से अंशुल मिश्रा मोहम्मद शोएव निवासी बहराइच और कपिल रावत निवासी लखनऊ को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से बरामद मोबाइल फोन में करीब दो सौ बैंक खातों का विवरण मिला है जो इस गिरोह के व्यापक नेटवर्क की पुष्टि करता है।
सोशल मीडिया और फर्जी लिंक से करते थे ठगी
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे निवेश ट्रेडिंग के नाम पर मालवेयर और एपीके फाइलें भेजकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। इसके अलावा शॉपिंग ऑफर और क्रेडिट कार्ड अपडेट के बहाने भी लोगों को ठगा जाता था। व्हाट्सएप टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर गिरोह अपने नेटवर्क को संचालित करता था और अलग अलग राज्यों में ठगी की घटनाओं को अंजाम देता था।
पेट्रोल पंप के जरिए कैश में बदलते थे रकम
गिरोह द्वारा ठगी की गई रकम को ठिकाने लगाने का तरीका भी बेहद चौंकाने वाला सामने आया है। पुलिस अधीक्षक के अनुसार लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित एक पेट्रोल पंप का इस्तेमाल इस अवैध धन को नकदी में बदलने के लिए किया जाता था। गिरोह का सदस्य कपिल रावत वहां कार्यरत था और स्वाइप मशीन के माध्यम से फर्जी लेनदेन कर ठगी की रकम को कैश में परिवर्तित कर देता था। आरोपियों ने स्वीकार किया कि बीते एक वर्ष में उन्होंने इस तरीके से लाखों रुपये निकालकर आपस में बांट लिए।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस अब इस गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी है। बरामद खातों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहराई से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा और पूरे गिरोह का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जाएगा।
सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के झांसे में आकर अपने बैंक खाते या दस्तावेज साझा न करें। निवेश लोन या सरकारी योजना के नाम पर मिलने वाले संदिग्ध कॉल और लिंक से सावधान रहें। यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी चेतावनी है कि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और इससे बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता दोनों बेहद जरूरी हैं।
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