नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा 2026 के दौरान देशभर के छात्रों से सीधा संवाद करते हुए उन्हें पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि आत्मविकास का माध्यम बनाने का संदेश दिया। दिल्ली स्थित अपने आवास पर आयोजित इस नवें संस्करण में प्रधानमंत्री ने बेहद सहज और अपनत्व भरे माहौल में छात्रों की जिज्ञासाओं को सुना और जीवन से जुड़े उदाहरणों के जरिए उत्तर दिए।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की सीखने की शैली अलग होती है और छात्रों को चाहिए कि वे सभी की सलाह सुनें लेकिन अपनी आदतों में बदलाव तभी करें जब उन्हें स्वयं लगे कि वह उनके लिए उपयोगी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि माता पिता शिक्षक और समाज सभी शुभचिंतक होते हैं लेकिन अंतिम निर्णय छात्र को अपनी समझ और अनुभव के आधार पर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे भोजन करने के तरीके हर व्यक्ति के अलग होते हैं वैसे ही पढ़ाई का समय और तरीका भी अलग हो सकता है। कोई सुबह पढ़ता है तो कोई रात में और दोनों ही सही हैं यदि मन जुड़ा हो।
प्रधानमंत्री ने छात्रों और शिक्षकों के बीच तालमेल पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि शिक्षक की गति छात्रों से बहुत आगे नहीं होनी चाहिए बल्कि एक कदम आगे हो ताकि जिज्ञासा बनी रहे और लक्ष्य कठिन जरूर हो लेकिन असंभव न लगे। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि शिक्षक पहले से यह बता दें कि आने वाले सप्ताह में कौन से अध्याय पढ़ाए जाएंगे तो छात्र पहले से तैयारी कर सकते हैं और कक्षा में प्रश्न पूछने की क्षमता बढ़ेगी। इससे पढ़ाई में रुचि और आत्मविश्वास दोनों मजबूत होंगे। उन्होंने किसानों के खेत जोतने के उदाहरण से समझाया कि जैसे भूमि को तैयार किया जाता है वैसे ही छात्रों के मन को भी धीरे धीरे तैयार करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में उपयोगी होनी चाहिए और अंक कभी भी जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकते।
संवाद के दौरान कला संस्कृति और रचनात्मकता के कई रंग भी देखने को मिले। सिक्किम की एक छात्रा द्वारा रचित देशभक्ति गीत और अन्य छात्रों की गायन प्रस्तुति ने माहौल को भावनात्मक बना दिया। प्रधानमंत्री ने इन प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने असम के गमोंसा का उल्लेख करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण और उत्तर पूर्व की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया।
कौशल और अंकों के बीच संतुलन पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन कौशल और व्यावसायिक कौशल दोनों समान रूप से जरूरी हैं। बिना ज्ञान के कौशल अधूरा है और बिना कौशल के ज्ञान अधूरा। उन्होंने डॉक्टर वकील और अन्य पेशों के उदाहरण देकर समझाया कि निरंतर अभ्यास और सीख ही सफलता की कुंजी है।
प्रधानमंत्री ने परीक्षा के दबाव तनाव समय प्रबंधन और भविष्य के सपनों पर भी छात्रों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सपने देखना जरूरी है लेकिन उन्हें साकार करने के लिए दैनिक आदतों और अनुशासन का होना अनिवार्य है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने कार्यों की योजना बनाएं समय का मूल्य समझें और स्वयं से ईमानदार रहें। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं बल्कि एक जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनना है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वदेशी अपनाएं स्वच्छता स्वास्थ्य और कौशल विकास को अपना कर्तव्य समझें। अंत में उन्होंने कहा कि आज के युवाओं के पास तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे साधन हैं जिनका सही उपयोग उन्हें नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। परीक्षा पे चर्चा का यह संवाद छात्रों के लिए प्रेरणा आत्मविश्वास और स्पष्ट दिशा देने वाला साबित हुआ।
