उत्तर प्रदेश में चल रहे 40 दिवसीय उत्तर प्रदेश राज्यमाता अभियान के 11वें दिन, दिनांक 09.02.2026 को परमाराध्य उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने श्री विद्यामठ, काशी में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान प्रदेश सरकार की नीतियों पर तीखा प्रतिवाद दर्ज कराया। उन्होंने बढ़ते मांस उत्पादन, राजकीय संरक्षण में संचालित वधशालाओं और गौ संरक्षण को लेकर किए जा रहे दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
पत्रकारों को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि माघ मेले के दौरान प्रदेश सरकार ने उनसे 24 घंटे में शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा था, जिसे समयसीमा के भीतर प्रस्तुत कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सरकार को स्वयं के असली हिंदू होने का प्रमाण देने के लिए 40 दिन का समय दिया था, जिसमें अब 10 दिन पूरे हो चुके हैं। उनका कहना था कि इस अवधि में सरकार ने अपने आचरण से किसी भी प्रकार की धार्मिक प्रतिबद्धता सिद्ध नहीं की, बल्कि इसके विपरीत ऐसे संकेत दिए हैं जो उसकी नीतियों पर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि पशुपालन मंत्री के माध्यम से सरकार ने यह स्वीकार किया है कि उत्तर प्रदेश में गाय नहीं बल्कि भैंस, बकरा और सुअर का वध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बात हर उस व्यक्ति को पीड़ा पहुंचाने वाली है जो स्वयं को सनातन परंपरा से जुड़ा मानता है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बजट 2026 में मांस निर्यात को बढ़ावा देने वाले प्रावधानों का स्वागत कर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता धर्म मर्यादा नहीं बल्कि आर्थिक लाभ है।
आंकड़ों का हवाला देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में मांस उत्पादन लगभग 7.5 लाख टन था, जो अब बढ़कर 13 लाख टन से अधिक हो गया है। उनका दावा है कि भले ही वधशालाओं की संख्या कागजों में कम दिखाई जा रही हो, लेकिन पशु वध की मात्रा और गति में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को पहले अपराधी माना जाता था, उन्हें अब उद्योग का दर्जा देकर 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी, जो कि 5 करोड़ रुपये तक है, दी जा रही है।
शंकराचार्य ने दावा किया कि योगी सरकार के लगभग 9 वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश में 16 करोड़ से अधिक निरपराध पशुओं का वध हुआ है, जिनमें लगभग 4 करोड़ भैंस वंश शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतने बड़े पैमाने पर हो रही हिंसा एक योगी मुख्यमंत्री के अंतःकरण तक नहीं पहुंचती।
उन्होंने यह भी कहा कि जहां एक ओर किसान संकट में है, वहीं बड़े मांस निर्यातकों को राजकीय संरक्षण और चुनावी चंदा प्राप्त हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गुजरात में हाल ही में 32 करोड़ रुपये के बूचड़खाना बजट को वापस कराया गया, जिससे यह सिद्ध होता है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो नीतियों में बदलाव संभव है।
शास्त्रीय दृष्टिकोण रखते हुए शंकराचार्य ने कहा कि सिद्ध सिद्धांत पद्धति के अनुसार संन्यासी के लिए वेतन विष के समान है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उसी राजकोष से वेतन और सुविधाएं ले रहे हैं जो वधशालाओं से प्राप्त राजस्व से भरा हुआ है। उनके अनुसार एक महंत और एक सेक्युलर मुख्यमंत्री की दो विरोधी शपथों के बीच धर्म रक्षा संभव नहीं है।
इस संदर्भ में उन्होंने आगामी कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए बताया कि 19.02.2026 को देश भर में स्वतंत्र विमर्श आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 01.03.2026 को काशी में अखिल भारतीय संत और विद्वद गोष्ठी के अंतर्गत वेतन और वैराग्य विषय पर शास्त्रार्थ कराया जाएगा। अभियान का अंतिम निष्कर्ष और आगामी दिशा 11.03.2026 को लखनऊ में प्रस्तुत की जाएगी।
शंकराचार्य ने आशा व्यक्त की कि शेष अभियान अवधि में प्रदेश सरकार आत्मचिंतन करेगी और गोमाता को राज्यमाता घोषित कर पशु वध से जुड़े इस क्रूर कारोबार पर रोक लगाएगी। इस पत्रकारवार्ता के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में इसके प्रभाव को लेकर सभी की निगाहें काशी पर टिकी हैं।
