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तीज व्रत: जानिए पूजा विधि, पौराणिक कथा, नियम और माता पार्वती की तपस्या का महत्व

Sandeep Srivastava Sub Editor News Report Newspaper
Last updated: 14/09/2026 09:09
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Sandeep Srivastava
Sandeep Srivastava Sub Editor News Report Newspaper
BySandeep Srivastava
Sandeep Srivastava serves as a Sub Editor at News Report, a registered Hindi newspaper dedicated to ethical, accurate, and reader-focused journalism. He is responsible for copy...
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11 Min Read
माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या करती हुई या शिव-पार्वती की पूजा।
तीज व्रत में माता पार्वती की तपस्या और शिव-पार्वती के मिलन का महत्व है।
Contents
  • तीज व्रत आज माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है परंपरा जानिए पूजा विधि पौराणिक कथा और व्रत के नियम
  • माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है तीज की पौराणिक कथा
  • तीज व्रत में शिव और पार्वती की पूजा का विशेष महत्व
  • तीज और गणेश चौथ का संयोग क्यों माना जाता है खास
  • तीज व्रत की पूजा विधि
  • सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा
  • तीज व्रत के प्रमुख नियम
  • निर्जला व्रत रखने वालों के लिए जरूरी सावधानी
  • तीज व्रत का धार्मिक और सामाजिक संदेश
  • तीज पूजा में किन बातों का रखें ध्यान
  • तीज का सार

तीज व्रत आज माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है परंपरा जानिए पूजा विधि पौराणिक कथा और व्रत के नियम

तीज का व्रत हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सुखी दांपत्य जीवन पति की दीर्घायु अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख समृद्धि की कामना करती हैं। तीज का पर्व केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है बल्कि इसके साथ माता पार्वती की कठोर तपस्या भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा और संकल्प की पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक कठिन तपस्या की थी। उनकी तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी धार्मिक प्रसंग के कारण तीज व्रत को दांपत्य जीवन और सौभाग्य की कामना से जोड़ा जाता है।

माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है तीज की पौराणिक कथा

तीज व्रत की पौराणिक मान्यता माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह से जुड़ी हुई है। धार्मिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी साधना जारी रखी और भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा को कमजोर नहीं होने दिया। माता पार्वती के इसी अटूट संकल्प और तपस्या को तीज व्रत की धार्मिक भावना का आधार माना जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

इस पौराणिक प्रसंग में माता पार्वती को शक्ति श्रद्धा धैर्य और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। तीज के दिन महिलाएं माता पार्वती का पूजन करते हुए अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम विश्वास और सुख की कामना करती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं भी धार्मिक आस्था के अनुसार अच्छे जीवनसाथी की कामना से माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। इस प्रकार तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दांपत्य स्वरूप को स्मरण करने का अवसर माना जाता है।

तीज व्रत में शिव और पार्वती की पूजा का विशेष महत्व

तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। पूजा में भगवान शिव को जल दूध पुष्प चंदन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। माता पार्वती को भी पुष्प अक्षत रोली चंदन और सुहाग से जुड़ी सामग्री अर्पित करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। महिलाएं माता पार्वती से अपने सुहाग की रक्षा परिवार की खुशहाली और वैवाहिक जीवन में सुख शांति की प्रार्थना करती हैं। पूजा के दौरान तीज की कथा सुनने या पढ़ने की भी परंपरा है।

तीज और गणेश चौथ का संयोग क्यों माना जाता है खास

तीज के अवसर पर भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं। इसी कारण शिव पार्वती की पूजा के साथ गणेश जी का स्मरण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि तीज के साथ गणेश चौथ का संयोग बनता है तो श्रद्धालु गणेश जी भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर परिवार के सुख समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं।

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भगवान गणेश की पूजा सामान्य तौर पर किसी भी शुभ धार्मिक कार्य की शुरुआत में की जाती है। तीज की पूजा में भी पहले गणेश जी का स्मरण करके उसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन किया जा सकता है। श्रद्धालु गणेश जी से जीवन के विघ्नों को दूर करने और परिवार में सुख शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।

तीज व्रत की पूजा विधि

तीज के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। पूजा के लिए जल दूध पुष्प अक्षत रोली चंदन धूप दीप फल और नैवेद्य जैसी सामग्री रखी जा सकती है। स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री में अंतर हो सकता है।

पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से की जाती है। इसके बाद भगवान शिव को जल अर्पित कर उनकी पूजा की जाती है। माता पार्वती को पुष्प अक्षत रोली चंदन और सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद तीज व्रत की कथा पढ़ी या सुनी जाती है। भगवान शिव माता पार्वती और गणेश जी की आरती की जाती है। पूजा के अंत में परिवार के सुख शांति स्वास्थ्य समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगल कामना की जाती है।

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सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा

तीज के अवसर पर कई स्थानों पर महिलाएं माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करती हैं। इसमें सिंदूर चूड़ी बिंदी मेहंदी चुनरी और अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं भी नए वस्त्र और आभूषण पहनकर तीज का व्रत करती हैं। हाथों में मेहंदी लगाने और पारंपरिक श्रृंगार करने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है। इन परंपराओं को माता पार्वती के सौभाग्य और दांपत्य जीवन की मंगल कामना से जोड़ा जाता है।

तीज व्रत के प्रमुख नियम

तीज व्रत के नियम अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकते हैं। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं जबकि कुछ महिलाएं अपनी स्वास्थ्य स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार या जल ग्रहण करती हैं। धार्मिक दृष्टि से व्रत का मूल भाव श्रद्धा संयम और संकल्प माना जाता है। इसलिए व्रत अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार रखना उचित माना जाता है।

व्रत के दौरान सात्विक आचरण रखने भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करने पूजा पाठ करने और तीज की कथा सुनने की परंपरा है। क्रोध विवाद और नकारात्मक व्यवहार से बचने का प्रयास किया जाता है। पूजा के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रत खोलने का समय स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार निर्धारित किया जाता है। इसलिए पारण के सही समय के लिए स्थानीय पंचांग का अनुसरण करना उचित रहता है।

निर्जला व्रत रखने वालों के लिए जरूरी सावधानी

धार्मिक परंपरा में तीज के दिन निर्जला व्रत का उल्लेख मिलता है लेकिन हर व्यक्ति के लिए निर्जला उपवास करना आवश्यक या सुरक्षित नहीं होता। गर्भवती महिलाओं बच्चों बुजुर्गों बीमार व्यक्तियों और नियमित दवा लेने वाले लोगों को लंबे समय तक बिना भोजन या पानी के रहने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। अस्वस्थ महसूस होने पर व्रत की कठोरता कम करना स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित हो सकता है।

तीज व्रत का धार्मिक और सामाजिक संदेश

तीज भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में श्रद्धा और पारिवारिक मंगल से जुड़ा पर्व है। माता पार्वती की तपस्या की कथा महिलाओं को धैर्य श्रद्धा और संकल्प का संदेश देती है। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा दांपत्य जीवन में प्रेम विश्वास और आपसी सम्मान की भावना से जोड़ी जाती है। तीज के अवसर पर महिलाएं अपने परिवार के सुख शांति और समृद्धि की कामना करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा करती हैं लोकगीत गाती हैं और पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ पर्व मनाती हैं।

तीज पूजा में किन बातों का रखें ध्यान

तीज के दिन पूजा स्थल को स्वच्छ रखना चाहिए। भगवान शिव माता पार्वती और गणेश जी का विधि विधान से पूजन करना चाहिए। पूजा सामग्री अपनी सुविधा और स्थानीय परंपरा के अनुसार रखी जा सकती है। धार्मिक अनुष्ठान में दिखावे के बजाय श्रद्धा और संयम को महत्व देना चाहिए। व्रत के दौरान स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। विशेष रूप से निर्जला व्रत रखने वालों को अपने शरीर की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।

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तीज का सार

तीज व्रत माता पार्वती की तपस्या भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा और शिव पार्वती के दांपत्य स्वरूप की धार्मिक मान्यता से जुड़ा पर्व है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर पति की दीर्घायु सुखी दांपत्य जीवन अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख समृद्धि की कामना करती हैं। भगवान गणेश के प्रथम पूज्य स्वरूप का स्मरण भी इस अवसर की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तीज की पौराणिक कथा श्रद्धालुओं को यह संदेश देती है कि आस्था धैर्य और दृढ़ संकल्प का धार्मिक जीवन में विशेष महत्व है। तिथि पूजा विधि और व्रत पारण का समय क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है इसलिए स्थानीय मान्य पंचांग के अनुसार पूजा और पारण करना उचित माना जाता है।

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