हिमाचल दिवस पर शहीद स्मारक में प्रोटोकॉल को लेकर विवाद, विधायक के व्यवहार का वीडियो वायरल
हिमाचल प्रदेश के ऊना में हिमाचल दिवस के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे समारोह की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए। एमसी पार्क स्थित शहीद स्मारक पर वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे, लेकिन श्रद्धांजलि अर्पित करने के क्रम को लेकर उत्पन्न विवाद ने माहौल को असहज बना दिया।
शिक्षा मंत्री ने किया कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर द्वारा शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर वीर जवानों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इस दौरान स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य शहीदों के बलिदान को याद करना और उन्हें सम्मान देना था, लेकिन आगे की घटनाओं ने इस उद्देश्य को कुछ समय के लिए पीछे कर दिया।
प्रोटोकॉल को लेकर उत्पन्न हुआ विवाद
शिक्षा मंत्री के बाद एक कर्मचारी द्वारा एससी आयोग के चेयरमैन एवं पूर्व मंत्री कुलदीप धीमान को श्रद्धांजलि देने के लिए आमंत्रित किया गया। इसी दौरान गगरेट विधानसभा क्षेत्र के विधायक राकेश कालिया इस क्रम से नाराज हो गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने मौके पर ही कर्मचारी को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हें पहले बुलाया जाना चाहिए था क्योंकि वे चार बार के विधायक हैं।
विधायक की इस प्रतिक्रिया से कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोग एक पल के लिए स्तब्ध रह गए। माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और सभी की नजरें इस घटनाक्रम पर टिक गईं। यह पूरा दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए अप्रत्याशित था, खासकर उस मौके पर जब शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही थी।
कुलदीप धीमान ने दिखाई संयम
इस स्थिति में एससी आयोग के चेयरमैन कुलदीप धीमान ने सूझबूझ का परिचय देते हुए कोई विवाद खड़ा नहीं किया। उन्होंने परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए पीछे हटना ही उचित समझा और विधायक को पहले श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर दे दिया। उनके इस व्यवहार की सराहना की जा रही है, क्योंकि इससे कार्यक्रम में और अधिक विवाद बढ़ने से टल गया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंटरनेट मीडिया पर लोग इस घटना को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई यूजर्स ने शहीदों के सम्मान के मौके पर इस तरह के व्यवहार को अनुचित बताया है और इसकी आलोचना की है।
कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों में व्यक्तिगत अहम और पद की प्राथमिकता को दरकिनार कर शहीदों के प्रति सम्मान को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। वहीं, कई यूजर्स ने कार्यक्रम के दौरान हुए इस विवाद को राजनीतिक शिष्टाचार के विपरीत बताया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
घटना के बाद से यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा भी इस पर प्रतिक्रिया दी जा रही है। हालांकि संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सार्वजनिक जीवन में कार्यरत लोगों को ऐसे संवेदनशील अवसरों पर अधिक संयम और जिम्मेदारी का परिचय नहीं देना चाहिए। शहीदों को श्रद्धांजलि देने जैसे कार्यक्रमों में इस तरह के विवाद न केवल आयोजन की गरिमा को प्रभावित करते हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देते हैं।
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