उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए कुशीनगर जनपद स्थित एक पत्राचार पंजीकरण केंद्र पर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में गड़बड़ी पाए जाने के बाद बोर्ड की परीक्षा समिति ने करीब 700 अभ्यर्थियों के पंजीकरण निरस्त करने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई पत्राचार शिक्षा संस्थान के पंजीकरण केंद्र संख्या 901, गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज पडरौना, कुशीनगर में पाई गई अनियमितताओं के आधार पर की गई है।
यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह द्वारा क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर के अपर सचिव को भेजे गए आधिकारिक पत्र में संबंधित परीक्षार्थियों के आवेदन पत्रों को निरस्त कर उनके आवंटित अनुक्रमांकों को फ्रीज अथवा विलोपित किए जाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। यह निर्णय साक्ष्यों के परीक्षण और प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।
शुल्क जमा न करने और अपूर्ण आवेदन की मिली पुष्टि
प्रकरण की जांच के दौरान यह पाया गया कि संबंधित पंजीकरण केंद्र द्वारा विद्यार्थियों का परीक्षा शुल्क निर्धारित समयसीमा के भीतर जमा नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त आवेदन पत्रों की मूल प्रति के स्थान पर फोटो कॉपी जमा की गई थी, जो परीक्षा नियमावली के विरुद्ध है। कई आवेदन पत्रों में आवश्यक विवरण अधूरे पाए गए तथा एक वर्षीय या दो वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित अर्हता प्रमाणपत्र भी संलग्न नहीं किए गए थे।
जांच में यह भी सामने आया कि नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर के स्थान पर प्रधान लिपिक द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे, जो प्रक्रिया का उल्लंघन है। पत्राचार अनुसरण प्रमाणपत्रों की अनुमति पत्राचार शिक्षा संस्थान से विधिवत नहीं ली गई थी तथा प्रमाणपत्रों के क्रमांक बिना अनुमति के प्रयुक्त किए गए। इन तथ्यों को परीक्षा समिति ने गंभीर लापरवाही माना है।
विद्यार्थी पंजीकृत नहीं थे, अंतिम तिथि के बाद भरे गए फार्म
क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर के अपर सचिव की आख्या तथा पत्राचार शिक्षा संस्थान द्वारा 24 दिसंबर 2025, 30 दिसंबर 2025, 23 जनवरी 2026 और 27 जनवरी 2026 को जारी पत्रों के परीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित विद्यार्थी पत्राचार शिक्षा संस्थान में विधिवत पंजीकृत नहीं थे। जिला विद्यालय निरीक्षक कुशीनगर द्वारा 13 जनवरी 2026 को भेजी गई रिपोर्ट में भी इस तथ्य की पुष्टि की गई।
यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए परीक्षा फार्म भरने की अंतिम तिथि 27 सितंबर 2025 निर्धारित थी। चूंकि संबंधित विद्यार्थी उस तिथि तक पात्र नहीं थे, इसलिए उनके आवेदन नियम विरुद्ध पाए गए। इसी आधार पर परीक्षा समिति ने सभी 700 अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त करने का निर्णय लिया।
दोषियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय
प्रकरण में केंद्र के नोडल अधिकारी पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय इंटर कॉलेज बिंदवलिया, कुशीनगर के प्रधानाचार्य विकास मणि त्रिपाठी तथा गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज पडरौना के प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने का निर्णय लिया गया है। पत्राचार शिक्षा संस्थान उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के अपर निदेशक सीएल चौरसिया ने जिला विद्यालय निरीक्षक कुशीनगर को दोष निर्धारित कर विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश में 396 पंजीकरण केंद्र, 11 हजार छात्र पंजीकृत
प्रदेश भर में पत्राचार शिक्षा संस्थान के कुल 396 पंजीकरण केंद्र संचालित हैं। इंटरमीडिएट स्तर पर लगभग 11000 छात्र छात्राएं पंजीकृत हैं। ऐसे में कुशीनगर केंद्र पर सामने आई गड़बड़ी को बोर्ड प्रशासन ने गंभीरता से लिया है ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबंधित आधिकारिक जानकारी परिषद की वेबसाइट upmsp.edu.in पर उपलब्ध है। बोर्ड प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का अनुपालन सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रभाव
इस निर्णय से प्रभावित 700 विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आवेदन निरस्त करना अनिवार्य था। प्रशासनिक स्तर पर यह भी संकेत दिए गए हैं कि यदि किसी विद्यार्थी के साथ धोखाधड़ी या गलत मार्गदर्शन हुआ है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता अत्यंत आवश्यक है। परीक्षा शुल्क जमा करने, मूल दस्तावेज संलग्न करने और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना संस्थानों की जिम्मेदारी है। इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नियमों की अनदेखी का परिणाम सीधे विद्यार्थियों पर पड़ सकता है।
प्रशासनिक संदेश
यूपी बोर्ड की यह कार्रवाई प्रदेश के अन्य पंजीकरण केंद्रों के लिए भी एक संदेश मानी जा रही है। बोर्ड प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी ऐसे मामलों की सघन जांच की जाएगी। परीक्षा प्रक्रिया को त्रुटिरहित बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
फिलहाल संबंधित विद्यार्थियों के अनुक्रमांक फ्रीज किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और आगे की विधिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई जारी है।
LATEST NEWS