यूपी विधान परिषद में सपा का हंगामा, विकास प्राधिकरणों में भ्रष्टाचार और वाराणसी के मुद्दों पर टकराव
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में बुधवार को विकास प्राधिकरणों में कथित भ्रष्टाचार, किसानों को भूमि का उचित मूल्य न मिलने और वाराणसी में अवैध निर्माण जैसे मुद्दों को लेकर समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बाद सपा सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।
शून्यकाल में उठे वाराणसी और किसानों से जुड़े मुद्दे
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव समेत सपा सदस्य आशुतोष सिन्हा, डॉ. मान सिंह यादव, शाहनवाज खान और मुकुल यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश के विकास प्राधिकरण किसानों की जमीन का अधिग्रहण तो कर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा। उन्होंने यह भी कहा कि वाराणसी में अवैध कब्जों के नाम पर मंदिरों और दुकानों को गिराया गया है, जबकि घाटों के पास कथित रूप से अवैध होटल निर्माण पर कार्रवाई नहीं की जा रही।
सपा सदस्यों का आरोप था कि एक ओर गरीबों से सख्ती की जा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया।
सत्ता पक्ष का पलटवार, विपक्ष पर लगाया विकास विरोधी होने का आरोप
सरकार की ओर से अनिल राजभर ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि जब सनातन की विचारधारा और विकास कार्य आगे बढ़ते हैं तो विपक्ष को असहजता होती है। उन्होंने सपा को विकास विरोधी करार दिया। इसके बाद सपा सदस्यों ने नारेबाजी की और सदन से वाकआउट कर दिया।
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में कानून व्यवस्था और बेरोजगारी का मुद्दा
भोजनावकाश के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान भी विपक्ष ने सरकार को घेरने का प्रयास किया। नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए और कहा कि बेरोजगारी बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीआरटी की किताबें छात्रों को समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने किसानों की आय दोगुनी करने के वादे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर इसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंचा है। साथ ही महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी और शैक्षिक ढांचे की स्थिति पर भी सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया।
सत्ता पक्ष के सदस्यों ने रखा पक्ष
भाजपा के संतोष सिंह, योगेश चौधरी, साकेत मिश्रा, रमा निरंजन और अवनीश कुमार सिंह ने राज्यपाल के अभिभाषण पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और कानून व्यवस्था की स्थिति पहले से बेहतर हुई है।
दिनभर चली बहस और हंगामे के बीच विधान परिषद की कार्यवाही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में रही। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस से यह स्पष्ट हुआ कि भूमि अधिग्रहण, शहरी विकास और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे आगामी समय में भी राजनीतिक विमर्श के प्रमुख विषय बने रहेंगे।
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