उत्तर प्रदेश में 15 वर्ष बाद फिर शुरू होगी जनगणना, 27 जिलों से प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2011 के बाद एक बार फिर जनगणना प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। लगभग 15 वर्षों के अंतराल के बाद होने जा रही यह जनगणना प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य सरकार ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं और पहले चरण में 27 जिलों के मास्टर ट्रेनरों को विशेष प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। यह प्रशिक्षण 17 फरवरी से 20 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य जनगणना कार्य को व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करना है।
मास्टर ट्रेनर करेंगे फील्ड कर्मियों को प्रशिक्षित
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जिलों में फील्ड स्तर पर कार्य करने वाले जनगणना कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। इन कर्मियों को घर-घर जाकर डाटा संग्रह करना होगा, इसलिए उन्हें तकनीकी और व्यवहारिक दोनों प्रकार की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में सर्वे की प्रक्रिया, मोबाइल एप का उपयोग, डाटा एंट्री, सत्यापन प्रणाली और संभावित तकनीकी समस्याओं के समाधान पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इन 27 जिलों से होगी शुरुआत
पहले चरण में जिन 27 जिलों को शामिल किया गया है, उनमें आगरा, अलीगढ़, अमरोहा, बागपत, गाजियाबाद, बलिया, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, देवरिया, गौतम बुद्ध नगर, गाजीपुर, हापुड़, हाथरस, झांसी, ललितपुर, मथुरा, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, रामपुर, सहारनपुर, संभल, शामली, सोनभद्र और वाराणसी शामिल हैं। इन जिलों में प्रशिक्षण के बाद सर्वेक्षण कार्य की शुरुआत की जाएगी। दूसरे चरण में शेष जिलों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
20 मई से 20 जून तक होगा हाउसहोल्ड सर्वे
जनगणना का पहला चरण हाउसहोल्ड सर्वे के रूप में 20 मई से 20 जून के बीच संचालित किया जाएगा। इस दौरान जनगणना कर्मी घर-घर जाकर कुल 33 प्रश्नों के आधार पर जानकारी एकत्र करेंगे। पूरी प्रक्रिया डिजिटल मोबाइल एप के माध्यम से संचालित की जाएगी, जिससे डाटा संग्रहण में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित की जा सके। डिजिटल माध्यम अपनाने से त्रुटियों की संभावना भी कम होगी और रीयल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी।
सर्वे में पूछे जाएंगे 33 महत्वपूर्ण प्रश्न
हाउसहोल्ड सर्वे के दौरान भवन संख्या, परिवार क्रमांक, परिवार के मुखिया का नाम, परिवार के सदस्यों की संख्या, पेयजल की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति, रसोई गैस की सुविधा, उपयोग में आने वाला प्रमुख अनाज, घरेलू विद्युत कनेक्शन, अर्जित परिसंपत्तियां और अन्य सामाजिक-आर्थिक जानकारी दर्ज की जाएगी। इन आंकड़ों के आधार पर प्रदेश की वास्तविक जनसंख्या संरचना और जीवन स्तर का आकलन किया जाएगा।
विकास योजनाओं के लिए अहम होगी जनगणना
लंबे अंतराल के बाद शुरू हो रही यह जनगणना राज्य की विकास योजनाओं के लिए आधार तैयार करेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए अद्यतन जनसंख्या आंकड़े आवश्यक होते हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों का आकलन कर संसाधनों का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
सरकार का लक्ष्य है कि जनगणना कार्य पारदर्शी, त्रुटिरहित और निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से डाटा संकलन से पूरी प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी। लंबे समय बाद शुरू हो रही यह जनगणना प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे की नई तस्वीर प्रस्तुत करेगी, जो भविष्य की नीतियों और योजनाओं को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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