वाराणसी की ऐतिहासिक दालमंडी में सोमवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब सड़क चौड़ीकरण और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच एक भवन मालिक ने अपनी ही इमारत में आग लगा दी। अचानक हुई इस घटना से पूरे इलाके में अफरातफरी फैल गई और प्रशासन को सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए कार्रवाई रोकनी पड़ी। मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और किसी भी तरह की जनहानि से बचने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।
दरअसल दालमंडी चौड़ीकरण योजना के तहत मकान संख्या सीके 39 9 पर ध्वस्तीकरण प्रस्तावित था। प्रशासनिक टीम जब वहां पहुंची और भवन खाली कराने को लेकर दबाव बढ़ा, उसी दौरान भवन स्वामी ने छत के रास्ते सड़क की ओर पेट्रोल फेंककर आग लगा दी। इसके बाद उसने बर्तन में भरे ज्वलनशील पदार्थ को बाहर मौजूद लोगों की ओर छिड़कने का भी प्रयास किया। आग लगते ही धुएं का गुबार उठने लगा और आसपास मौजूद लोग दहशत में इधर उधर भागने लगे। कुछ ही पलों में स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार आग लगते ही पूरे इलाके में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। दुकानदारों ने अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए और आसपास के मकानों से लोग बाहर निकल आए। पुलिस ने तुरंत इलाके की घेराबंदी कर दी और फायर बाइक सर्विस को भी एहतियातन मौके पर बुलाया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने भवन स्वामी को समझाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में उनकी बातों का कोई असर नहीं हुआ। युवक आग फैलने के बाद खुद को बचाने के लिए अंदर कमरे में चला गया और दरवाजा बंद कर लिया।
पुलिस के अनुसार युवक ने कार्रवाई रोकने के उद्देश्य से बोतल में भरे ज्वलनशील पदार्थ को मकान के अगले हिस्से पर छिड़ककर आग लगाई थी। आग फैलती देख वह भीतर चला गया और दावा करने लगा कि उसके भवन पर कोर्ट से स्थगन आदेश मिला हुआ है, इसके बावजूद ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। पुलिस बल ने काफी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया। लगभग आधे घंटे बाद प्रशासन ने हालात सामान्य किए और उसी भवन से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई दोबारा शुरू की गई।
दालमंडी पुलिस चौकी प्रभारी के अनुसार युवक ने स्वयं को जलाने की भी कोशिश की थी, लेकिन समय रहते पुलिस और दमकल व्यवस्था की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। युवक की पहचान और उसके दावों की भी जांच की जा रही है।
इस घटना ने दालमंडी में चल रही ध्वस्तीकरण प्रक्रिया को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच संवाद की कमी को उजागर कर दिया है। सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्य अपनी जगह जरूरी हैं, लेकिन प्रभावित लोगों के साथ बेहतर संवाद और भरोसा कायम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दालमंडी की यह घटना न केवल प्रशासन के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भविष्य में ऐसी अप्रिय स्थितियों से बचने के लिए पारदर्शिता और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।
