वाराणसी: बसंत महिला इंटर कॉलेज की जमीन पर होटल निर्माण को लेकर विवाद गहराया

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Sandeep Srivastava
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कमच्छा क्षेत्र स्थित थियोसोफिकल सोसाइटी की पुरानी संपत्ति, जहां होटल निर्माण विवाद चल रहा है।

वाराणसी में बसंत महिला इंटर कॉलेज की जमीन पर होटल निर्माण को लेकर विवाद

वाराणसी शहर में बसंत महिला इंटर कॉलेज से सटी जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। कमच्छा क्षेत्र में स्थित थियोसोफिकल सोसाइटी की 150 वर्ष पुरानी संपत्ति का एक हिस्सा होटल निर्माण के लिए तीस वर्षों की लीज पर दिए जाने से स्थानीय नागरिकों, शिक्षाविदों और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़े पूर्व छात्रों में नाराजगी है। यह जमीन गर्ल्स हॉस्टल के बगल में स्थित है और पहले इसे शैक्षणिक उपयोग से जुड़ा माना जाता रहा है। अब इसी परिसर में होटल निर्माण शुरू होने से काशी के बौद्धिक वर्ग में इसे सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत के विपरीत कदम माना जा रहा है।

एनी बेसेंट की विरासत पर बहस

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना में 0 की भूमिका ऐतिहासिक रही है और थियोसोफिकल सोसाइटी की भूमि से जुड़ी संस्थाएं उनके विचारों से प्रेरित होकर संचालित होती रही हैं। ऐसे में शिक्षा और अध्यात्म से जुड़ी परंपरा वाले परिसर में होटल का निर्माण उनके आदर्शों के विपरीत माना जा रहा है। बीएचयू से जुड़े पूर्व छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता इस निर्णय को काशी की परंपरा के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं।

किसे मिली जमीन और कौन कर रहा विरोध

थियोसोफिकल सोसाइटी की संपत्ति का एक हिस्सा दयाल ग्रुप को तीस वर्षों के लिए लीज पर दिया गया है। इस फैसले के सामने आने के बाद वाराणसी के बौद्धिक वर्ग में हलचल मच गई। समाजवादी पार्टी के विधायक और बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री और सामाजिक न्याय मंच के संयोजक डॉ सुभेदार सिंह ने इसे काशी की धरोहर से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए विरोध दर्ज कराया है।

बसंत कन्या महाविद्यालय और उसकी पृष्ठभूमि

बसंत कन्या इंटर कॉलेज और बसंत कन्या महाविद्यालय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान हैं। इनकी स्थापना उन्नीस सौ चौवन में डॉ रोहित मेहता ने की थी। एनी बेसेंट के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने महिलाओं की शिक्षा को सेवा का माध्यम मानते हुए इन संस्थानों की नींव रखी। यह महाविद्यालय बेसेंट एजुकेशन फेलोशिप द्वारा संचालित है और कमच्छा स्थित थियोसोफिकल सोसाइटी परिसर में स्थित है। इसी परिसर से सटी जमीन पर होटल निर्माण शुरू हुआ है जिसे लेकर असहमति सामने आ रही है।

होटल निर्माण स्थल और परियोजना का विवरण

रथयात्रा चौराहे के समीप निर्माणाधीन रोपवे स्टेशन से सटे क्षेत्र में दयाल ग्रुप का होटल बन रहा है। दयाल प्राइवेट लिमिटेड की ओर से यहां पैंसठ कमरों वाला थ्री स्टार होटल विकसित किया जा रहा है। पिछले नौ महीनों से निर्माण कार्य चल रहा है और इसके पूरा होने में लगभग एक वर्ष का समय और लगने का अनुमान है। निर्माण से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि वाराणसी विकास प्राधिकरण से स्वीकृति मिलने के बाद ही काम शुरू किया गया है।

स्थानीय विरोध और कानूनी चेतावनी

स्थानीय अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है कि गर्ल्स हॉस्टल के पास व्यावसायिक होटल का निर्माण सामाजिक दृष्टि से उचित नहीं है। बीएचयू के पूर्व छात्र और समाजवादी नेता कुंवर सुरेश सिंह ने ऐलान किया है कि इक्कीस फरवरी को होटल निर्माण के विरोध में धरना दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को न्यायालय तक ले जाया जाएगा।

संस्था का पक्ष और आधिकारिक बयान

थियोसोफिकल सोसाइटी के सचिव शशिनंदन राजदर ने कहा कि जिस भूमि पर होटल का निर्माण हो रहा है वह संस्था की संपत्ति है और नियमानुसार उसे तीस वर्षों की लीज पर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी इस स्थान पर व्यावसायिक गतिविधियां हो चुकी हैं और इससे संस्था को अतिरिक्त आय प्राप्त होती रही है। उनके अनुसार इस आय से संस्था द्वारा संचालित शैक्षणिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होटल का संचालन शैक्षणिक संस्थानों और छात्रावासों से अलग दायरे में होगा और किसी भी प्रकार से छात्रों की गतिविधियों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।

रोपवे परियोजना के लिए दी गई भूमि का संदर्भ

संस्था की ओर से यह भी बताया गया कि इससे पहले वाराणसी के हित में रोपवे स्टेशन के लिए भी भूमि दी गई थी। उनका कहना है कि होटल के लिए जमीन लीज पर देने का उद्देश्य केवल आय का स्रोत बढ़ाना है ताकि शिक्षा और अध्यात्म से जुड़ी संस्थाओं का संचालन बिना बाधा के किया जा सके। फिलहाल इस पूरे मामले पर शहर के शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों की निगाहें टिकी हुई हैं और आने वाले दिनों में विरोध का स्वर और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।