वाराणसी: उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट प्रस्तुत करते हुए विकास की नई इबारत लिखने का दावा किया है। बुधवार को पेश किए गए 9 लाख 12 हजार 696 करोड़ 35 लाख रुपये के इस विशाल बजट ने प्रदेश की आर्थिक प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक दृष्टि को स्पष्ट रूप से सामने रखा है। यह बजट पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब एक लाख करोड़ रुपये अधिक है, जो राज्य की बढ़ती राजस्व क्षमता और विकास की गति को दर्शाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बजट पेश करते हुए इसे विकसित भारत के संकल्प और विजन 2047 की दिशा में निर्णायक कदम बताया।
इस बार का बजट वाराणसी जिले के लिए विशेष महत्व लेकर आया है। काशी को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से विश्व मानचित्र पर और सशक्त रूप से स्थापित करने की मंशा साफ झलकती है। बजट में वाराणसी और विंध्याचल में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और पर्यटक सुविधाओं के विस्तार के लिए ठोस प्रावधान किए गए हैं। विंध्यवासिनी देवी धाम तथा वाराणसी में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार हेतु 100 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इन योजनाओं के माध्यम से वाराणसी मिर्जापुर क्षेत्र को एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
सरकार का मानना है कि इन निवेशों से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय रोजगार, होटल उद्योग, हस्तशिल्प और परिवहन क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी। बेहतर संपर्क मार्ग, सुव्यवस्थित यात्री सुविधाएं, आधुनिक सूचना प्रणाली और स्वच्छता प्रबंधन के जरिए पर्यटकों के अनुभव को नया आयाम देने की योजना है। काशी की परंपरा और आधुनिकता के समन्वय का जो प्रयास पिछले वर्षों में शुरू हुआ था, उसे अब और व्यापक स्वरूप देने की तैयारी दिखाई दे रही है।
बजट की एक और महत्वपूर्ण घोषणा बनारस, गोरखपुर और प्रयागराज के लिए मेट्रो सुविधा का प्रस्ताव है। यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती है तो पूर्वांचल के प्रमुख शहरों की यातायात व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे न केवल शहरी परिवहन सुगम होगा बल्कि निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश के बजट आकार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2017-18 में जहां राज्य का बजट लगभग 3.85 लाख करोड़ रुपये था, वहीं 2026-27 में यह बढ़कर लगभग 9.13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। नौ वर्षों में बजट का आकार दोगुने से भी अधिक हो जाना राज्य की वित्तीय स्थिति में आए बदलाव और विकास की प्राथमिकताओं के विस्तार को दर्शाता है।
कुल मिलाकर यह बजट न केवल आंकड़ों के लिहाज से ऐतिहासिक है, बल्कि पूर्वांचल विशेषकर वाराणसी के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलता नजर आता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि घोषित योजनाएं कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ जमीन पर उतरती हैं और काशी को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने के लक्ष्य को किस हद तक साकार कर पाती हैं।
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