गोरखपुर में भोजपुरी संस्कृति और समाज सेवा पर आधारित स्नेहिल मुलाक़ात
गोरखपुर: शहर में कला, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण और आत्मीय क्षण देखने को मिला, जब राष्ट्रीय अध्यक्ष, भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया “भाई” के डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने सांसद एवं फ़िल्म अभिनेता रवि किशन से शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाक़ात केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक स्नेहिल संवाद में तब्दील हो गई, जिसमें दोनों व्यक्तित्वों के बीच समाज और संस्कृति के प्रति साझा संवेदनाएँ स्पष्ट रूप से झलकती रहीं। डॉ. श्रीवास्तव ने इस अवसर पर रवि किशन को अपने एक निजी आयोजन हेतु आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने हृदयपूर्वक स्वीकार किया और भोजपुरी संस्कृति के संवर्धन से जुड़े हर प्रयास में सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।
भोजपुरी भाषा और लोकसंस्कृति पर विचार विमर्श
बैठक के दौरान समाज, संस्कृति और भोजपुरी लोकधारा के संवर्धन से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। चर्चा का मुख्य केंद्र भोजपुरी भाषा की समृद्ध विरासत, लोककलाओं का संरक्षण, युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की आवश्यकता और क्षेत्रीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर सशक्त उपस्थिति दिलाने जैसे मुद्दे रहे। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया भाई निरंतर ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने, लोकधुनों को संरक्षित करने और भाषा-संस्कृति के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इस पर रवि किशन ने कहा कि भोजपुरी लोकधारा भारत की सांस्कृतिक आत्मा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे समय की धूल से बचाकर नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी का साझा दायित्व है।
सांस्कृतिक प्रतिबद्धता और सामाजिक प्रभाव
न्यूज़ रिपोर्ट से विशेष बातचीत में डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने रवि किशन की आत्मीयता, सरलता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी संवेदनशील दृष्टि और कलाकार के रूप में उनकी लोकप्रियता मिलकर समाज में सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करती हैं। डॉ. श्रीवास्तव ने यह भी जोड़ा कि ऐसे व्यक्तित्वों का साथ सामाजिक-सांस्कृतिक अभियानों को नई ऊर्जा और व्यापक पहुँच प्रदान करता है। उन्होंने इस मुलाक़ात को केवल औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि भविष्य के साझा प्रयासों की मजबूत नींव के रूप में देखा।
भोजपुरी समाज और लोकसंस्कृति के प्रति रवि किशन का दृष्टिकोण
इस अवसर पर रवि किशन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे भोजपुरी भाषा और संस्कृति के उत्थान से जुड़े हर रचनात्मक प्रयास में साथ हैं। उनके अनुसार लोकसंस्कृति केवल विरासत नहीं, बल्कि समाज की जीवंत धड़कन है, जिसे सहेजना और आगे बढ़ाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि मंच, संसाधन और अन्य साधनों के माध्यम से वे ऐसे अभियानों का समर्थन करते रहेंगे जो भोजपुरी समाज की पहचान को और अधिक सशक्त बनाएंगे।
मुलाक़ात का समापन और भविष्य की दिशा
मुलाक़ात का समापन सौहार्द, विश्वास और भविष्य की आशाओं के साथ हुआ। डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने कामना व्यक्त की कि रवि किशन समाज और राष्ट्रसेवा में निरंतर सक्रिय रहें और उनके योगदान से सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा मिले। यह भेंट केवल दो व्यक्तियों के बीच की मुलाक़ात नहीं रही, बल्कि संस्कृति के संरक्षण और समाज के उत्थान की दिशा में प्रेरक कदम का प्रतीक बनकर उभरी। इस स्नेहिल संवाद ने साबित कर दिया कि साझा संकल्प और भावनात्मक जुड़ाव समाज और संस्कृति के स्थायी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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