ज़हर बनता पानी खामोश तंत्र रामनगर में बदबूदार जल से उठी चीख एक महीने से बेपरवाह सिस्टम पर गंभीर सवाल
वाराणसी: रामनगर गंगा किनारे बसे आध्यात्मिक नगर रामनगर में इन दिनों हालात ऐसे बन गए हैं कि जीवनदायिनी कही जाने वाली जलापूर्ति अब लोगों के लिए भय और बीमारी का कारण बनती जा रही है। वार्ड नंबर 65 पुराना रामनगर क्षेत्र में बीते लगभग एक महीने से नगर निगम की पाइपलाइन से आ रहा पानी न केवल गंदा है बल्कि उसमें ऐसी तीखी दुर्गंध है कि लोग उसे हाथ लगाने से भी कतरा रहे हैं। यह समस्या अब सामान्य शिकायत नहीं बल्कि एक गंभीर जनस्वास्थ्य आपदा का रूप ले चुकी है।
घरों में नलों से निकलता यह काला मटमैला और बदबूदार पानी हर रोज लोगों को यह एहसास करा रहा है कि व्यवस्था किस हद तक संवेदनहीन हो चुकी है। महिलाएं पीने के पानी के लिए दूर दराज से बोतलें भरने को मजबूर हैं बच्चे असुरक्षित पानी के कारण बीमार पड़ रहे हैं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति किसी त्रासदी से कम नहीं है। जिन घरों में आर्थिक स्थिति कमजोर है वहां यह संकट और भी विकराल हो गया है जहां विकल्प ही नहीं वहां मजबूरी ही नियति बन जाती है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा बार बार आवाज उठाने के बावजूद जिम्मेदार विभागों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। वार्ड नंबर 65 के पार्षद रामकुमार यादव ने इस मुद्दे को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ भी हासिल नहीं हुआ। अंततः जब हालात असहनीय हो गए तो पार्षद ने रामनगर जोनल अधिकारी को औपचारिक पत्र सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
पार्षद का कहना है कि यह समस्या कोई एक दो दिन की नहीं बल्कि पूरे एक महीने से लगातार बनी हुई है। हमने हर स्तर पर इसकी सूचना दी लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई। यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि जनता के साथ खुला अन्याय है। उनके इस बयान में उस पीड़ा और आक्रोश की झलक साफ दिखाई देती है जो आज हर रामनगरवासी महसूस कर रहा है।
यह भी कम विडंबनापूर्ण नहीं है कि इस मुद्दे को पहले भी मीडिया द्वारा प्रमुखता से उठाया गया था। खबरें छपीं तस्वीरें सामने आईं लोगों की तकलीफें उजागर हुईं लेकिन प्रशासनिक तंत्र पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। ऐसा प्रतीत होता है जैसे रामनगर जोन की समस्याएं किसी प्राथमिकता सूची में हैं ही नहीं। सवाल उठता है कि क्या इस क्षेत्र की जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा।
रामनगर की आधी से अधिक आबादी नगर निगम की जलापूर्ति पर निर्भर है। ऐसे में जब वही पानी दूषित होकर घरों तक पहुंचे तो यह केवल एक तकनीकी खामी नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता है। कहीं पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवर का पानी मिल रहा है तो कहीं रखरखाव की अनदेखी ने हालात बिगाड़ दिए हैं। लेकिन इन सबके बीच जो सबसे ज्यादा खटकता है वह है जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और निष्क्रियता।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रामनगर के साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। शहर के अन्य हिस्सों में जहां छोटी छोटी समस्याओं पर भी तुरंत कार्रवाई होती है वहीं रामनगर की इतनी बड़ी समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह भेदभाव न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है बल्कि जनता के विश्वास को भी गहरा आघात पहुंचाता है।
स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि अब लोग खुले तौर पर आंदोलन की बात करने लगे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। गंदे पानी के कारण फैलने वाली बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है और यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट किसी बड़े स्वास्थ्य आपदा में बदल सकता है।
अब पूरा मामला प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही की कसौटी पर खड़ा है। क्या संबंधित विभाग इस चेतावनी को गंभीरता से लेगा क्या रामनगर की जनता को स्वच्छ पानी का उनका मूल अधिकार मिलेगा या फिर यह समस्या भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।
रामनगर आज सिर्फ पानी नहीं बल्कि न्याय की मांग कर रहा है और इस बार उसकी आवाज पहले से कहीं ज्यादा तेज गूंजदार और निर्णायक है।
LATEST NEWS