वाराणसी: रामनगर पुलिस का ऑपरेशन रेस्क्यू महज़ 48 घंटों में तोड़ा अपराधियों का चक्रव्यूह सुरक्षित बची मासूम की अस्मत सलाखों के पीछे पहुँचा शातिर राहुल
वाराणसी/रामनगर: अपराध की बिसात पर जब कोई शातिर मोहरा किसी मासूम की जिंदगी और एक परिवार की खुशियों को अपनी सनक से रौंदने की हिमाकत करता है तब कानून के रखवाले अपनी वर्दी की आन बान और शान के लिए ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही हैरतअंगेज और मिसाली कारनामा कर दिखाया है वाराणसी कमिश्नरेट की रामनगर थाना पुलिस ने। जिसने महज़ 48 घंटे के भीतर एक बेहद पेचीदा और संवेदनशील मामले का न सिर्फ पर्दाफाश किया बल्कि एक 16 साल की नाबालिग कली को बिखरने से पहले ही दरिंदगी के चंगुल से सकुशल आजाद करा लिया। रामनगर पुलिस के इस सुपरफास्ट एक्शन ने यह साबित कर दिया है कि जब खाकी अपने पूरे जलाल और कर्तव्यबोध के साथ मैदान में उतरती है तो अपराधियों के हौसले पस्त होने में चंद लम्हे भी नहीं लगते।
साजिश का वो स्याह पन्ना जब एक पिता की आँखों में तैर आया खौफ
कहानी की शुरुआत बीते 15 मई 2026 को हुई जब रामनगर थाने की चौखट पर एक बेबस और लाचार पिता अपनी आँखों में आंसुओं का सैलाब लिए पहुँचा। पिता की कांपती जुबान ने जब पुलिस को बताया कि उसकी महज़ 16 वर्ष की मासूम बेटी को किसी बहरूपिये ने अपने जाल में फंसाकर बहला फुसलाकर अगवा कर लिया है तो थाने का माहौल गंभीर हो गया। मामले की नजाकत को भांपते हुए रामनगर पुलिस ने बिना एक पल गंवाए तत्परता की मिसाल पेश करते हुए उसी दिन 15 मई मुकदमा अपराध संख्या 118/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की धारा 137 (2), 87 और 351 (2) जैसी संगीन और गैर जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके साथ ही शुरू हुआ खाकी का वो अभियान जिसकी गूंज आज पूरे जिले में सुनाई दे रही है।
रामनगर पुलिस की चक्रव्यूह रचना आधुनिक तकनीक और जांबाजी का बेजोड़ संगम
मामले की गंभीरता को देखते हुए वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के आलाधिकारियों ने सीधे तौर पर इस केस की कमान अपने हाथ में ली। पुलिस आयुक्त पुलिस उपायुक्त काशी जोन और अपर पुलिस उपायुक्त काशी जोन के कड़े और स्पष्ट निर्देशों के बाद एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया। इस विशेष टीम की अगुवाई खुद सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली और रामनगर थाने के तेजतर्रार प्रभारी निरीक्षक कर रहे थे।
अपराधी कितना भी शातिर हो वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता। आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था और पुलिस को छकाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन रामनगर पुलिस की टीम और सर्विलांस सेल की पैनी नजरों से बचना नामुमकिन था। आधुनिक साइबर सर्विलांस के जरिए आरोपी के डिजिटल पदचिह्नों का पीछा किया गया। आखिरकार 17 मई 2026 को सर्विलांस की स्क्रीन पर वो आखिरी लोकेशन कौंधी जिसका पुलिस को बेसब्री से इंतजार था। लोकेशन थी टेंगरा मोड़।
टेंगरा मोड़ पर हाई वोल्टेज ड्रामा ऐसे दबोचा गया लाला
सटीक लोकेशन मिलते ही प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार मिश्र की अगुवाई में रामनगर पुलिस की टीम ने टेंगरा मोड़ के आस पास ऐसा अभेद्य किला तैयार किया कि परिंदा भी पर न मार सके। सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने जैसे ही आरोपी को घेरा वैसे ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पुलिस टीम ने बिजली जैसी फुर्ती दिखाते हुए मुख्य अभियुक्त संजय उर्फ राहुल उर्फ लाला उम्र लगभग 20 वर्ष पुत्र राजन को धर दबोचा। यह शातिर अपराधी मूल रूप से बिहार के रोहतास सासाराम जिले के शिवसागर थाना अंतर्गत सागर गांव का रहने वाला है जो यहाँ अपनी घिनौनी साजिश को अंजाम देने आया था।
पुलिस की इस कामयाबी का सबसे खूबसूरत और सुकून देने वाला पहलू यह रहा कि आरोपी के चंगुल से उस मासूम डरी सहमी नाबालिग किशोरी को पूरी तरह सुरक्षित अक्षत और सकुशल बरामद कर लिया गया।
सलाम खाकी इन जांबाजों ने लिखी सफलता की अमर इबारत
इस पूरे ऑपरेशन को 48 घंटे में अंजाम देकर जनता के दिलों में खाकी के प्रति विश्वास को और गहरा करने वाले रामनगर पुलिस के ये चार स्तंभ आज तारीफों के हकदार हैं।
प्र.नि. संजय कुमार मिश्र थाना रामनगर एक कुशल सेनापति की तरह जिन्होंने इस पूरे ऑपरेशन की रणनीति बनाई और फ्रंट फुट पर रहकर टीम का नेतृत्व किया।
उ.नि. शिवम सोनी थाना रामनगर अपनी बेजोड़ फील्ड इंटेलिजेंस और त्वरित निर्णय क्षमता से आरोपी के भागने के सारे रास्ते बंद किए।
उ.नि. पंकज मिश्रा थाना रामनगर जिन्होंने कानूनी बारीकियों और दबिश के दौरान कानूनी शिकंजे को इतना मजबूत रखा कि अपराधी को संभलने का मौका नहीं मिला।
म.का. सोनी गौड़ थाना चितईपुर जिन्होंने इस संवेदनशील घड़ी में बरामद की गई नाबालिग पीड़िता को न सिर्फ संभाला बल्कि एक बड़ी बहन की तरह उसे संबल और सुरक्षा का अहसास कराया।
जनता ने किया खाकी का वंदन जीरो टॉलरेंस की जीती जागती मिसाल
वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के सोशल मीडिया सेल द्वारा इस शानदार कामयाबी की आधिकारिक घोषणा के बाद से ही रामनगर पुलिस की चौतरफा वाहवाही हो रही है। सोशल मीडिया से लेकर रामनगर की गलियों तक हर कोई पुलिस टीम की इस मुस्तैदी को सलाम कर रहा है। पीड़ित परिवार की आँखों से जो आंसू दो दिन पहले खौफ के थे आज वो राहत और कृतज्ञता के आंसुओं में तब्दील हो चुके हैं।
रामनगर पुलिस की इस जादूगरी ने अपराधियों को यह कड़ा और साफ संदेश दे दिया है कि काशी की पवित्र धरती पर मासूमों और महिलाओं की अस्मत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी का हश्र सिर्फ और सिर्फ जेल की काल-कोठरी ही होगा। कानून का यह इकबाल ही उत्तर प्रदेश की असली पहचान बन चुका है।
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