काशी: आस्था का महाकुंभ भीषण तपन पर भारी पड़ा बाबा विश्वनाथ का अनुराग कतारों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
वाराणसी: सनातन संस्कृति की शाश्वत राजधानी और महादेव की परम पावन नगरी काशी इन दिनों एक अद्भुत और अलौकिक दृश्य की गवाह बन रही है। जेठ के महीने की तपती दुपहरी में जब सूर्य की किरणें धरती पर आग बरसाती नजर आ रही हैं और गर्म हवाएं जनजीवन की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं तब भी बाबा विश्वनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था अपने चरम पर दिखाई दे रही है। काशी की फिजाओं में भीषण गर्मी की तपिश से अधिक हर हर महादेव और बम बम भोले के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। सोमवार को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा क्षेत्र शिवभक्तों से भर गया। ज्ञानवापी कॉरिडोर से लेकर बाहर की सड़कों तक करीब एक किलोमीटर से अधिक लंबी कतारों में श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए।
वाराणसी में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने के बावजूद बाबा के दर्शन की इच्छा श्रद्धालुओं पर भारी पड़ती नजर आई। हाथों में गंगाजल और बेलपत्र लिए श्रद्धालु नंगे पैर घंटों धूप में खड़े रहे। कतार में मौजूद लोगों के चेहरों पर थकान से अधिक श्रद्धा और संतोष का भाव दिखाई दिया। दूरदराज के राज्यों से आए श्रद्धालुओं का कहना है कि महादेव की भक्ति से मिलने वाली शांति के आगे यह गर्मी कोई मायने नहीं रखती। उनके लिए यह केवल यात्रा नहीं बल्कि आस्था का अनुभव है।
सांस्कृतिक चेतना का संगम छुट्टियों में परिवारों का बढ़ा रुझान
देशभर के विद्यालयों में चल रही गर्मी की छुट्टियों का असर धार्मिक स्थलों पर भी दिखाई दे रहा है। बड़ी संख्या में परिवार अपने बच्चों के साथ धार्मिक यात्राओं पर निकले हैं। मंदिर मार्ग पर ऐसे कई परिवार नजर आए जो अपने बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के उद्देश्य से काशी पहुंचे हैं। कई श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा को व्यापक स्वरूप दिया है जिसमें काशी दर्शन के बाद अयोध्या और प्रयागराज की यात्रा भी शामिल है।
अपने परिवार के साथ कतार में खड़ी महिला श्रद्धालु रीता ने बताया कि आधुनिक समय में बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं से परिचित कराना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल दर्शन करना नहीं बल्कि बच्चों को सनातन संस्कृति के जीवंत स्वरूप से जोड़ना भी है।
व्यवस्थाओं को लेकर श्रद्धालुओं की मिली जुली प्रतिक्रिया
इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच व्यवस्थाओं को लेकर अलग अलग अनुभव सामने आए हैं। दिल्ली से आए श्रद्धालु आदित्य कुमार ने बताया कि वह एक घंटे से अधिक समय से कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कतार के बीच में अनधिकृत तरीके से प्रवेश करने का प्रयास कर रहे हैं जिससे अन्य श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। उन्होंने प्रशासन से कतार व्यवस्था को और सख्त करने की मांग की।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बाबा के दर्शन के लिए धैर्य के साथ इंतजार करना भी भक्ति का हिस्सा है और लंबे इंतजार के बाद दर्शन का अनुभव अलग ही संतोष देता है।
गर्मी से राहत के लिए विशेष इंतजाम
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और भीषण गर्मी को देखते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने कई विशेष इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर और पहुंच मार्गों पर बड़े हैंगर लगाए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को धूप से राहत मिल सके। इनके नीचे बड़ी संख्या में पंखे और कूलर लगाए गए हैं जो लगातार ठंडी हवा उपलब्ध करा रहे हैं। परिसर में अलग अलग स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था भी की गई है।
स्वयंसेवकों की टीमें लगातार सक्रिय हैं जो बुजुर्गों महिलाओं और बच्चों को सहायता प्रदान कर रही हैं। सोमवार को भीड़ अधिक होने पर प्रशासन ने चार प्रवेश द्वारों को खोल दिया ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही तेज की जा सके और उन्हें कम समय धूप में रहना पड़े।
मंदिर प्रशासन ने बताई आगे की तैयारी
मंदिर के कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक बढ़ी है। इसे देखते हुए अतिरिक्त व्यवस्थाएं पहले से तैयार रखी गई हैं। उन्होंने कहा कि यदि भीड़ और बढ़ती है तो पांचों द्वारों से दर्शन की व्यवस्था लागू करने की योजना तैयार है। फिलहाल चार द्वारों के जरिए भीड़ का संचालन किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मंदिर प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली विशेष सेवाओं जैसे सुगम दर्शन और मंगला आरती के लिए अब पहचान पत्र अनिवार्य किया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक श्रद्धालुओं को सुविधाओं का लाभ सुचारू रूप से मिल सकेगा।
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