वाराणसी में हाइड्रोपोनिक गांजा तस्करी का खुलासा, दो गिरफ्तार; घाट क्षेत्रों में हो रही थी महंगी सप्लाई
संयुक्त कार्रवाई में मिली बड़ी सफलता
वाराणसी: मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। थाना लंका पुलिस और एएनटीएफ (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) की संयुक्त टीम ने सुनियोजित कार्रवाई करते हुए 145 ग्राम अवैध हाइड्रोपोनिक (ऑर्गेनिक) गांजा के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई 1 अप्रैल 2026 की रात रविंद्रपुरी पुलिया के पास की गई, जहां पुलिस टीम पहले से ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी।
गिरफ्तार आरोपी और ऑपरेशन की रणनीति
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान आदित्य सिंह (26 वर्ष, निवासी गोरखपुर) और वासू केडिया (28 वर्ष, निवासी भेलूपुर, वाराणसी) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई वाराणसी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में चलाई जा रही मुहिम का हिस्सा थी, जिसमें एसीपी भेलूपुर और थाना लंका की टीम ने समन्वित तरीके से काम किया। लंबे समय से मिल रहे इनपुट के आधार पर सटीक समय पर दबिश दी गई और दोनों आरोपियों को मौके से ही पकड़ लिया गया।
घाट क्षेत्रों में फैला था सप्लाई नेटवर्क
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि यह एक संगठित नेटवर्क के तहत संचालित हो रहा था। पुलिस के मुताबिक, आदित्य सिंह गोरखपुर से हाइड्रोपोनिक गांजा लाकर वाराणसी में वासू केडिया को सप्लाई करता था। इसके बाद वासू इसे छोटे-छोटे पैकेट्स में तैयार कर घाट क्षेत्रों में ऊंचे दामों पर बेचता था।
घाटों पर पर्यटकों और युवाओं की अधिक आवाजाही को देखते हुए नशीले पदार्थों की मांग भी अपेक्षाकृत ज्यादा रहती है। इसी का फायदा उठाकर आरोपी इस अवैध कारोबार को लगातार विस्तार दे रहे थे। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार अन्य जिलों और राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।
हाइड्रोपोनिक गांजा: अधिक ताकतवर और महंगा नशा
हाइड्रोपोनिक गांजा सामान्य गांजे से अलग और अधिक प्रभावशाली माना जाता है। इसे पारंपरिक मिट्टी में उगाने के बजाय विशेष तकनीक के जरिए पानी और पोषक तत्वों के मिश्रण में उगाया जाता है। इस प्रक्रिया में तापमान, रोशनी और आर्द्रता जैसे कारकों को नियंत्रित रखा जाता है, जिससे इसकी गुणवत्ता और नशे की तीव्रता बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह से तैयार गांजे में THC (टेट्राहाइड्रोकैनाबिनॉल) की मात्रा अधिक होती है, जिससे इसका असर ज्यादा तेज और लंबे समय तक रहता है। यही वजह है कि बाजार में इसकी कीमत सामान्य गांजे की तुलना में कई गुना अधिक होती है और इसे प्रीमियम श्रेणी का नशीला पदार्थ माना जाता है।
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
हालांकि इसकी बढ़ी हुई शक्ति इसे अधिक खतरनाक भी बनाती है। इसके सेवन से मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिसमें चिंता, अवसाद, भ्रम और नशे की लत जैसी समस्याएं शामिल हैं। युवाओं के बीच इसका बढ़ता प्रचलन समाज और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई
इस मामले में थाना लंका में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच उपनिरीक्षक शैलेष शर्मा को सौंपी गई है, जो अब इस नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों और सप्लाई चेन की कड़ियों की जांच में जुटे हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह हाइड्रोपोनिक गांजा कहां और किस माध्यम से तैयार किया जा रहा था।
पुलिस का सख्त संदेश
वाराणसी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी तरह की तस्करी या अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने युवाओं से अपील की है कि वे नशे से दूर रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
यह कार्रवाई न केवल पुलिस की सतर्कता को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि आधुनिक तकनीकों से तैयार किए जा रहे नशीले पदार्थ अब छोटे शहरों तक पहुंच चुके हैं, जिन पर समय रहते नियंत्रण बेहद जरूरी है।
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