गाजीपुर में ट्रामा सेंटर के संचालन को लेकर खींचतान, मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग आमने-सामने
गाजीपुर के सदर जिला अस्पताल परिसर में बने ट्रामा सेंटर के संचालन को लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग के बीच खींचतान की स्थिति बनी हुई है। एक ओर जिला चिकित्सालय का संचालन पूरी तरह राजकीय मेडिकल कॉलेज कर रहा है, वहीं उसी परिसर में स्थित ट्रामा सेंटर अभी भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अधीन संचालित हो रहा है। संसाधनों की कमी और दवा आपूर्ति पोर्टल बंद होने से मरीजों को उपचार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
संसाधनों के अभाव में प्रभावित हो रही इमरजेंसी सेवा
ट्रामा सेंटर का निर्माण कई वर्ष पहले किया गया था, लेकिन लंबे समय तक यह पूरी तरह संचालित नहीं हो पाया। पिछले वर्ष अप्रैल में सीएमओ डॉ. सुनील कुमार पांडेय के प्रयासों से ट्रामा सेंटर को चालू कराया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से डॉक्टरों की तैनाती की गई ताकि इमरजेंसी मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके।
हालांकि, शासन स्तर से एक्सरे मशीन, सीटी स्कैन और ऑपरेशन थिएटर से जुड़ी अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं। इसके कारण गंभीर मरीजों को ट्रामा सेंटर से मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजना पड़ता है। शुरूआती दिनों में ट्रामा सेंटर के मरीजों को मेडिकल कॉलेज में एक्सरे कराने में दिक्कतें आईं, बाद में व्यवस्था बनाई गई। फिर भी मरीजों को अलग से पर्ची कटानी पड़ती है, जिससे समय और असुविधा दोनों बढ़ते हैं।
दवा आपूर्ति पोर्टल बंद, सीएमओ स्तर से हो रही व्यवस्था
शासन द्वारा जिन तीन सौ से अधिक अस्पतालों को निष्क्रिय दर्शाया गया है, उनमें ट्रामा सेंटर का नाम भी शामिल कर दिया गया है। इसके चलते ट्रामा सेंटर के लिए दवा आपूर्ति पोर्टल बंद कर दिया गया। परिणामस्वरूप पिछले कई दिनों से निर्धारित दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। फिलहाल सीएमओ स्तर से दवाओं की व्यवस्था की जा रही है, ताकि मरीजों को इलाज में बाधा न आए।
ट्रामा सेंटर को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध करने की तैयारी
अंदरखाने चर्चा है कि ट्रामा सेंटर को राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध करने की मंशा है। यदि ऐसा होता है तो संचालन पूरी तरह मेडिकल कॉलेज के अधीन आ जाएगा। हालांकि, सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के अधीन तैनात डॉक्टर और कर्मचारी कहां जाएंगे। चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा विभाग अलग संरचनाओं के तहत काम करते हैं, ऐसे में कर्मचारियों के समायोजन को लेकर पेंच फंसा हुआ है।
शासन स्तर पर लंबित है निर्णय
सीएमओ डॉ. सुनील कुमार पांडेय का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार ट्रामा सेंटर को संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है। ट्रामा सेंटर की संबद्धता को लेकर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जाएगा।
फिलहाल स्थिति यह है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज जिला चिकित्सालय का संचालन कर रहा है, जबकि उसी परिसर में बना ट्रामा सेंटर सीएमओ के अधीन है। संसाधनों की कमी और प्रशासनिक असमंजस का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। इमरजेंसी मरीजों को ट्रामा सेंटर से मेडिकल कॉलेज तक ले जाना पड़ता है, जिससे उपचार में देरी की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि ट्रामा सेंटर को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं या स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय लेकर एकीकृत व्यवस्था बनाई जाए, ताकि मरीजों को भटकना न पड़े और इमरजेंसी सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें।
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