हर मजदूर मेरे परिवार का अंग है जनचौपाल में गूंजा मानवीय संवेदना का स्वर श्रमिकों के हक की लड़ाई में डटे दिखे सतेंद्र बारी बीनू जी
गौतम बुद्ध नगर: विकास भवन का सभागार उस समय जनआस्था संवेदनशीलता और न्याय की बुलंद आवाज का केंद्र बन गया जब राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य सतेंद्र बारी उर्फ बीनू जी ने जनचौपाल के मंच से श्रमिकों के अधिकारों को लेकर स्पष्ट दृढ़ और मानवीय संदेश दिया। यह आयोजन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रहा बल्कि यह उन मेहनतकश लोगों की आवाज बन गया जिनकी मेहनत पर समाज की नींव टिकी हुई है।
जनचौपाल में उमड़ी भीड़ और उम्मीदें
जनचौपाल में जिले के दूर दराज गांवों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक के लोग बड़ी उम्मीदों के साथ पहुंचे थे। कोई रोजगार की समस्या लेकर आया था तो कोई न्याय की आस में पहुंचा था। हर चेहरे पर एक अलग कहानी थी और हर कहानी में संघर्ष की झलक साफ दिखाई दे रही थी। इस पूरे माहौल को विशेष बनाया सतेंद्र बारी की कार्यशैली ने जिन्होंने हर व्यक्ति की बात को गंभीरता से सुना और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट और समयबद्ध निर्देश दिए। कई मामलों का तत्काल समाधान कर उन्होंने यह संदेश दिया कि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो समस्याएं फाइलों में नहीं अटकतीं बल्कि जमीन पर हल होती हैं।
घनश्याम बारी का मामला बना चर्चा का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान नोएडा की एक कंपनी में कार्यरत रहे घनश्याम बारी का मामला सामने आया तो पूरे सभागार में सन्नाटा छा गया। एक औद्योगिक हादसे में उनका हाथ कट जाना केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं बल्कि श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। इस पीड़ा को समझते हुए सतेंद्र बारी ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ित को आर्थिक सहायता उचित मुआवजा बेहतर चिकित्सा सुविधा और पुनर्वास की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनकी संवेदनशीलता ने यह स्पष्ट किया कि प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल अधिकार नहीं बल्कि मानवीयता से भी जुड़ी होती है।
गौतम बारी के मामले में सख्त रुख
इसी क्रम में गौतम बारी का मामला भी सामने आया जिन्हें एक निजी कंपनी द्वारा बिना किसी सूचना के नौकरी से निकाल दिया गया और उनका बकाया वेतन भी रोक लिया गया। इस पर सतेंद्र बारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी कि श्रमिकों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए पीड़ित को न्याय दिलाने के निर्देश दिए।
मानवीय सोच और स्पष्ट संदेश
अपने संबोधन में सतेंद्र बारी ने कहा कि हर मजदूर मेरे परिवार का अंग है। उनका यह वक्तव्य केवल शब्द नहीं बल्कि उनके विचार और दृष्टिकोण का स्पष्ट प्रतिबिंब था। उन्होंने कहा कि जब किसी मजदूर के साथ अन्याय होता है तो वह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है। उनकी प्राथमिकता है कि किसी भी पीड़ित को न्याय के लिए भटकना न पड़े और उसे समय पर उसका अधिकार मिले।
उप-संपादक से बातचीत में स्पष्ट किया संकल्प
कार्यक्रम के बाद फोन पर हमारे उप-संपादक संदीप श्रीवास्तव जी से बातचीत में सतेंद्र बारी ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि इसे जमीन पर लागू करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर पीड़ित तक न्याय पहुंचाना उनके लिए केवल कर्तव्य नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है जिसे वे पूरी निष्ठा के साथ निभाते रहेंगे।
जनचौपाल बनी भरोसे की नई शुरुआत
इस जनचौपाल ने यह साबित कर दिया कि जब जनप्रतिनिधि जनता के दर्द को समझते हैं तो प्रशासनिक व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव स्वतः दिखाई देता है। सतेंद्र बारी की सक्रियता और संवेदनशीलता ने लोगों के बीच भरोसा मजबूत किया और यह संदेश दिया कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत नेतृत्व उनके साथ खड़ा है।
कार्यक्रम के समापन के बाद सभागार से बाहर निकलते लोगों के चेहरों पर संतोष और उम्मीद साफ नजर आ रही थी। लोगों को विश्वास है कि अब उनकी आवाज सुनी जाएगी उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे और उनके संघर्ष को मजबूत नेतृत्व का साथ मिलेगा। यही इस जनचौपाल की सबसे बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आया है।
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