एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई, फर्जी दस्तावेज बनाकर मुद्रा लोन के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाला मास्टरमाइंड आमिर अहसन गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर विभिन्न बैंकों से मुद्रा लोन के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले संगठित गिरोह के मास्टरमाइंड को लखनऊ से गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरफ्तारी 15 फरवरी 2026 को आईआईएम रोड के निकट सहारा होम्स, थाना मड़ियांव क्षेत्र से सुबह 11:40 बजे की गई। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान आमिर अहसन पुत्र स्वर्गीय डॉ. एजाज अहसन निवासी सैयदवाड़ा मोहम्मदाबाद गोहना थाना मोहम्मदाबाद गोहना जनपद मऊ उम्र 31 वर्ष के रूप में हुई है।
शिकायत से खुला करोड़ों की ठगी का जाल
एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ को प्राप्त एक शिकायत के आधार पर इस प्रकरण की जांच शुरू की गई थी। शिकायत में उल्लेख किया गया था कि व्यवसाय के लिए ऋण दिलाने के नाम पर कुछ लोगों ने बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर विभिन्न व्यक्तियों, कंपनियों और फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपये का मुद्रा लोन स्वीकृत कराया। पीड़ितों को लंबे समय तक यह जानकारी नहीं थी कि उनके नाम पर ऋण लिया जा चुका है।
शिकायतकर्ता राज बहादुर गुरूंग ने बताया था कि उन्हें उनके परिचित इंद्रजीत सिंह ने एक व्यक्ति नावेद अहसन से मिलवाया, जिसने स्वयं को विभिन्न बैंकों के मैनेजरों से परिचित बताया। व्यवसाय विस्तार के लिए ऋण की आवश्यकता बताने पर उनसे आधार, पैन और अन्य दस्तावेज लिए गए। कुछ दिनों बाद उन्हें बैंक शाखा में बुलाकर कई कागजातों पर हस्ताक्षर कराए गए। बाद में लोन न होने की बात कही गई, लेकिन लगभग पांच से छह महीने बाद ईएमआई बकाया का संदेश आने पर उन्हें पता चला कि उनके नाम पर दो लोन स्वीकृत हो चुके हैं।
तकनीकी जांच में सामने आया गिरोह का नेटवर्क
एसटीएफ की साइबर टीम ने तकनीकी विश्लेषण, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। 13 सितंबर 2025 को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की जानकीपुरम शाखा के प्रबंधक गौरव सिंह सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ और दस्तावेजों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि पूरे नेटवर्क का संचालन आमिर अहसन कर रहा था, जो पर्दे के पीछे रहकर योजना बनाता और गिरोह को निर्देश देता था।
फर्जी आधार, पैन और कंपनियों के जरिए लोन स्वीकृति
पूछताछ में आमिर अहसन ने स्वीकार किया कि वर्ष 2018 में उसकी मुलाकात नावेद से हुई थी। इसके बाद दोनों ने मिलकर लोगों के आधार और पैन कार्ड पर लगे फोटो को एडिट कर गिरोह के सदस्यों की फोटो लगाने की योजना बनाई। फर्जी पते पर कंपनियां बनाई जाती थीं और उनके नाम से कोटेशन तैयार किए जाते थे। बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से मुद्रा लोन योजना के तहत अलग अलग बैंकों से ऋण स्वीकृत कराया जाता था।
गिरोह द्वारा जनरेटर, उपकरण और छोटे उद्योग के नाम पर लगभग दस लाख रुपये तक के कई लोन स्वीकृत कराए गए। आरोपियों ने कमीशन के आधार पर बैंक कर्मियों और अन्य सहयोगियों को हिस्सेदारी दी। जांच में सामने आया है कि 100 से अधिक व्यक्तियों और फर्मों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन स्वीकृत कराए गए।
करोड़ों रुपये की अवैध कमाई
प्रारंभिक जांच और उपलब्ध अभिलेखों से यह संकेत मिला है कि गिरोह ने अब तक करोड़ों रुपये की ठगी की है। लोन की राशि विभिन्न खातों और डिजिटल वॉलेट के माध्यम से निकाली जाती थी और बाद में आपस में बांट ली जाती थी। एसटीएफ इन खातों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है।
बरामदगी में वाहन, कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
गिरफ्तार आमिर अहसन के कब्जे से एक मोबाइल फोन, आधार कार्ड, तीन क्रेडिट और डेबिट कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस, चार चार पहिया वाहन जिनमें दो इनोवा क्रिस्टा, एक एक्सयूवी 500 और एक सियाज शामिल हैं, तथा 730 रुपये नकद बरामद हुए हैं। एसटीएफ द्वारा बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फोरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा, जिससे डिजिटल साक्ष्य और नेटवर्क की कड़ियों का पता लगाया जा सके।
आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा
आरोपी के विरुद्ध थाना साइबर क्राइम लखनऊ में मुकदमा संख्या 139/2025 धारा 34, 419, 420, 465, 467, 468, 471 भारतीय दंड संहिता तथा 66सी और 66डी आईटी एक्ट के तहत दर्ज है। स्थानीय पुलिस द्वारा आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।
अन्य सहयोगियों की तलाश जारी
एसटीएफ ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की जा चुकी है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। आरोपी द्वारा बताए गए बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और संदिग्ध लेनदेन की जांच की जा रही है।
बैंकिंग प्रणाली में मिलीभगत की जांच
प्रकरण में बैंक कर्मियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। पहले गिरफ्तार किए गए शाखा प्रबंधक सहित अन्य कर्मचारियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। एसटीएफ का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर मिलीभगत सिद्ध होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जनता से सतर्क रहने की अपील
एसटीएफ ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आधार, पैन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को न दें। बैंकिंग प्रक्रिया में स्वयं उपस्थित रहकर दस्तावेजों की जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन को दें।
इस कार्रवाई को प्रदेश में संगठित बैंकिंग और साइबर ठगी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे गिरोहों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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