यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 में नकल के मामलों पर नई नीति
प्रयागराज में जारी एक अहम सूचना में बोर्ड ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी किए हैं। परिषद ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों का प्रयोग करते हुए पकड़े जाने वाले परीक्षार्थियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। परिषद के अनुसार यह फैसला विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि किसी एक गलती के कारण उनके जीवन पर लंबे समय तक कानूनी बोझ न पड़े।
निर्देशों की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
परिषद सचिव द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि परीक्षा व्यवस्था की शुचिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि कम उम्र के छात्रों को आपराधिक प्रक्रिया में उलझाना शिक्षा के मूल उद्देश्य के अनुरूप नहीं है। इसलिए परिषद ने संतुलन बनाते हुए यह तय किया है कि नकल के मामलों में छात्रों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनुशासन बना रहे और साथ ही छात्रों का भविष्य अनावश्यक कानूनी दायित्व से प्रभावित न हो।
शैक्षणिक दंड लागू रहेंगे
परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि आपराधिक मुकदमे से छूट का अर्थ यह नहीं है कि नकल करने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। यदि कोई छात्र अनुचित साधनों का प्रयोग करते हुए पकड़ा जाता है तो संबंधित विषय की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। नियमों के अनुसार परिणाम निरस्त किया जा सकता है या घोषित न करने का निर्णय लिया जा सकता है। गंभीर मामलों में वर्तमान या भविष्य की परीक्षाओं से वंचित किया जाना भी संभव है। परिषद का मानना है कि शैक्षणिक दंड व्यवस्था अनुशासन बनाए रखने के लिए पर्याप्त और प्रभावी है।
संगठित नकल नेटवर्क पर सख्ती
नई नीति में यह भी कहा गया है कि यह रियायत केवल छात्रों तक सीमित रहेगी। पेपर लीक सॉल्वर गैंग और संगठित नकल नेटवर्क के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाले बाहरी तत्वों और अधिनियम के तहत आने वाले व्यक्तियों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। परिषद के अधिकारियों के अनुसार परीक्षा की शुचिता से समझौता करने वाले किसी भी संगठित प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक बयान और आगे की तैयारी
परिषद सचिव के बयान में कहा गया है कि शासन और परीक्षा प्राधिकरण नकलविहीन पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षाएं कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्रों के भविष्य पर अनावश्यक आपराधिक दायित्व न थोपा जाए। आगामी परीक्षा सत्र के लिए केंद्रों की निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ की जाएगी और पर्यवेक्षकों को स्पष्ट दिशा निर्देश दिए जाएंगे ताकि अनुशासन बनाए रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
शिक्षा जगत की प्रतिक्रिया
शिक्षाविदों का मानना है कि यह फैसला परीक्षा प्रणाली की साख बनाए रखने और छात्रों के हितों की रक्षा के बीच संतुलन स्थापित करता है। परिषद की इस पहल से जहां एक ओर अनुशासन पर जोर बना रहेगा वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों को जीवन भर के कानूनी दायित्व से बचाया जा सकेगा। प्रयागराज सहित प्रदेश भर में यह नीति आगामी परीक्षाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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