धर्म और आस्था की नगरी वाराणसी में महाशिवरात्रि महापर्व को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। 15 फरवरी को पड़ने वाले इस पर्व पर काशी विश्वनाथ धाम में 15 से 20 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस कमिश्नरेट और मंदिर प्रशासन संयुक्त रूप से सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की व्यापक योजना लागू कर रहे हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, गंगा घाटों और प्रमुख चौराहों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन मिल सके।
कॉरिडोर और घाटों का सघन निरीक्षण
डीआईजी शिव हरी मीणा, एसीपी अतुल अंजान त्रिपाठी सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, दशाश्वमेध घाट, गोदौलिया चौराहा और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मार्गों पर किए गए अतिक्रमण को हटवाया गया और अस्थायी दुकानदारों को निर्धारित स्थान पर ही व्यवसाय करने की सख्त हिदायत दी गई। प्रशासन का स्पष्ट निर्देश है कि महाशिवरात्रि के दौरान किसी भी प्रकार का अतिक्रमण श्रद्धालुओं की आवाजाही में बाधा नहीं बनेगा।
घाटों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। जल पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है ताकि गंगा स्नान के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता की जांच की गई है और कंट्रोल रूम से निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। अधिकारियों ने स्थानीय व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं से भी संवाद कर सुरक्षा सुझाव लिए।
भीड़ प्रबंधन के लिए पलट प्रवाह मॉडल
महाकुंभ की तर्ज पर इस बार महाशिवरात्रि में पलट प्रवाह मॉडल लागू किया जा रहा है। इस मॉडल के तहत श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास मार्ग अलग-अलग निर्धारित किए गए हैं ताकि भीड़ का दबाव एक स्थान पर न बने। प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से लंबी कतारों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन का अवसर मिलेगा।
पुलिस कमिश्नरेट और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के बीच समन्वय बैठकें पहले ही संपन्न हो चुकी हैं। यातायात योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। पार्किंग स्थलों का निर्धारण कर दिया गया है और बाहरी जिलों से आने वाले वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार किए गए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद
महाशिवरात्रि के दौरान पूरे क्षेत्र को सुरक्षा के लिहाज से जोन और सेक्टर में बांटा गया है। प्रत्येक जोन में पुलिस अधिकारी और पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। संवेदनशील स्थलों पर क्यूआरटी टीम और ड्रोन निगरानी की भी व्यवस्था की गई है। गंगा तटों पर नावों की नियमित जांच की जा रही है और जल पुलिस लगातार गश्त कर रही है।
जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट varanasi.nic.in के माध्यम से भी श्रद्धालुओं को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें। डायल 112 सेवा को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
श्रद्धालुओं से अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अनुशासन बनाए रखने और निर्धारित मार्गों का पालन करने की अपील की है। भीड़ अधिक होने की स्थिति में धैर्य रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के हर पहलू पर नजर रखी जा रही है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी है।
शाम होते ही काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। बाबा दरबार परिसर में लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि इस बार की व्यवस्थाएं पूर्व वर्षों की तुलना में अधिक सुदृढ़ हैं। घाटों, कॉरिडोर और बाजारों को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
पृष्ठभूमि और धार्मिक महत्व
महाशिवरात्रि काशी के लिए केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सांस्कृतिक आस्था का केंद्र भी है। इस दिन देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। काशी विश्वनाथ धाम का आधिकारिक विवरण और दर्शन समय की जानकारी मंदिर की वेबसाइट kashivishwanathtemple.com पर उपलब्ध है। प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण में पूजा अर्चना का अवसर मिले और काशी की परंपरा और गरिमा बनी रहे।
अधिकारियों का कहना है कि इस बार महाशिवरात्रि को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए हर स्तर पर समन्वय स्थापित किया गया है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए पुलिस और प्रशासन चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं।
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