वाराणसी: काशी के 300 साल पुराने ऐतिहासिक रामकुंड अखाड़े पर ‘महासंग्राम’, वट सावित्री पूजा के बीच दबंगों का तांडव, खाकी से भी भिड़े अराजक तत्व
वाराणसी: महादेव की नगरी मोक्ष की वैश्विक राजधानी काशी के लक्सा क्षेत्र में उस समय कानून व्यवस्था के परखच्चे उड़ गए, जब लगभग तीन शताब्दियों के गौरवशाली इतिहास को अपनी छाती में समेटे ऐतिहासिक रामकुंड अखाड़े पर अवैध कब्जे की नीयत से आए दो दर्जन से अधिक दबंगों ने जमकर तांडव मचाया। यह दुस्साहस और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा थी कि जब पूरा परिसर वट सावित्री व्रत के पावन अवसर पर सुहागिन महिलाओं की अटूट आस्था, मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों से गुंजायमान था, ठीक उसी समय इस ऐतिहासिक धरोहर को अपवित्र और लहूलुहान करने का प्रयास किया गया। अखाड़ा समिति का आरोप है कि भू माफियाओं और दबंगों ने न केवल माननीय न्यायालय के आदेशों को ठेंगा दिखाया, बल्कि मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए मौके पर पहुंची पुलिस टीम की वर्दी पर भी हाथ डालने की जुर्रत की। इस अप्रत्याशित महासंग्राम ने पूरी काशी को उद्वेलित कर दिया है।
आस्था पर प्रहार: लाठी डंडों से लैस 20 से अधिक हमलावरों ने महिलाओं को खदेड़ा, पूजा सामग्री की तहस नहस
रामकुंड अखाड़ा समिति के महामंत्री विजय कुमार द्वारा लक्सा थाने में दी गई आधिकारिक और लिखित शिकायत के अनुसार शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे का समय था। अखाड़े के प्राचीन वट वृक्ष के नीचे सैकड़ों महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के साथ धार्मिक अनुष्ठान में लीन थीं। इसी बीच अचानक 20 से अधिक लाठी डंडों और हथियारों से लैस चिन्हित व अज्ञात दबंगों का एक आक्रामक झुंड अखाड़ा परिसर में जबरन दाखिल हुआ।
आरोप है कि इन उपद्रवियों ने आते ही चीखते चिल्लाते हुए सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपरा को बलपूर्वक रोकने का प्रयास किया। जब महिलाओं ने इसका विरोध किया तो इन अराजक तत्वों ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं। सुहागिन महिलाओं के साथ घोर अभद्रता, गाली गलौज और दुर्व्यवहार किया गया। इतना ही नहीं आस्था के प्रतीक पूजन पंडाल को उजाड़ दिया गया और पवित्र पूजा सामग्रियों को पैरों तले रौंद डाला गया, जिससे पूरे परिसर में चीख पुकार मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।
वर्दी को चुनौती: जब खाकी से भी भिड़ गए बेखौफ दबंग, सोशल मीडिया पर विस्फोटक वीडियो वायरल
अखाड़े के भीतर मचे इस हाहाकार और हंगामे की सूचना मिलते ही लक्सा थाने की भारी पुलिस फोर्स आनन फानन में संकटमोचक बनकर मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत मोर्चा संभाला और उत्तेजित उपद्रवियों को पीछे खदेड़ने का प्रयास किया। लेकिन सत्ता और रसूख के नशे में चूर इन दबंगों के हौसले इस कदर बुलंद थे कि उन्होंने कानून के रखवालों को ही निशाने पर ले लिया।
कानून को ठेंगा: अपराधियों ने वर्दी की धौंस को दरकिनार करते हुए कर्तव्य पर तैनात जांबाज पुलिसकर्मियों के साथ सरेआम तीखी नोकझोंक, बदसलूकी और धक्का मुक्की की। खाकी के साथ हुई इस अभद्रता का एक बेहद विस्फोटक वीडियो सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद पूरे शहर के प्रबुद्ध जनों और खेल प्रेमियों में भारी आक्रोश है। हालांकि जिम्मेदार पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए हमारी न्यूज रिपोर्ट इस वायरल वीडियो की सत्यता की तकनीकी पुष्टि नहीं करती है। यह पूरी तरह से पुलिस प्रशासन की फॉरेंसिक और कानूनी जांच का विषय है।
300 साल पुरानी काशी की अनमोल धरोहर: आंध्र प्रदेश से भी जुड़ा है गहरा धार्मिक नाता
यह विवाद सिर्फ जमीन के एक टुकड़े का नहीं बल्कि काशी की उस प्राचीन आत्मा का है जो इस अखाड़े में बसती है। रामकुंड अखाड़ा लगभग 300 वर्ष पुराना एक ऐसा ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल है जिसने देश को कई नामचीन पहलवान और मल्ल योद्धा दिए हैं। यहां पीढ़ियों से युवा मिट्टी की सोंधी महक के बीच कसरत और प्राचीन भारतीय कुश्ती परंपरा का रियाज करते आ रहे हैं।
रामकुंड अखाड़े की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता
300 वर्षों का स्वर्णिम इतिहास: यह अखाड़ा काशी की मल्लविद्या और अखाड़ा संस्कृति का मुख्य केंद्र बिंदु रहा है।
अंतरराज्यीय आस्था: पिछले करीब 150 वर्षों से विशेष रूप से आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत से आने वाली महिलाएं यहां आकर वट सावित्री की पूजा करती हैं।
सरकारी संरक्षण: इस धरोहर की महत्ता को स्वीकार करते हुए पूर्व में स्वयं नगर निगम वाराणसी द्वारा इसके संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष बजट जारी कर कार्य कराया जा चुका है।
अदालत की चौखट पर मामला, फिर भी जबरन कब्जे का दुस्साहस, क्या करेगी पुलिस
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस बेशकीमती जमीन का मालिकाना हक और प्रबंधन संबंधी विवाद वर्तमान में माननीय न्यायालय के विचाराधीन है। ऐसे में न्यायालय के आदेशों और कानून की गरिमा को ताक पर रखकर किया गया यह दुस्साहसिक हमला सीधे तौर पर न्यायपालिका को चुनौती है।
अखाड़ा समिति ने सूबे के मुख्यमंत्री और पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाई है कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल की अस्मिता को अक्षुण्ण रखा जाए। महिलाओं का अपमान करने वाले और पुलिस की छाती पर हाथ डालने वाले इन सफेदपोश गुंडों पर गैंगस्टर और रासुका जैसी कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई हो। फिलहाल मौके पर पैदा हुए सांप्रदायिक और सामाजिक तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पीएसी और पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। लक्सा पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के दावों, राजस्व अभिलेखों और वायरल वीडियो के एक एक फ्रेम की बारीकी से जांच की जा रही है। कानून को बंधक बनाने की कोशिश करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।
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