रामनगर की मां मनसा देवी मंदिर पर उठे सवाल आस्था इतिहास और ट्रस्ट गठन को लेकर छिड़ी नई बहस
वाराणसी/रामनगर: गंगा के पूर्वी तट पर बसे रामनगर की गलियों में सदियों पुरानी परंपराएं राजसी विरासत और धार्मिक आस्था आज भी एक साथ सांस लेती दिखाई देती हैं। इन्हीं आस्थाओं के बीच किला रोड स्थित मां मनसा देवी मंदिर एक ऐसा धार्मिक केंद्र माना जाता है जहां वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था जुड़ी रही है। मंदिर केवल पूजा अर्चना का स्थल भर नहीं बल्कि स्थानीय समाज की सांस्कृतिक स्मृतियों और धार्मिक विश्वासों का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। लेकिन अब यही मंदिर एक नए विवाद के कारण चर्चा के केंद्र में आ गया है।
मंदिर के नाम पर ट्रस्ट गठन को लेकर शुरू हुई बहस ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित सुधाकर मिश्र ने खुलकर आपत्ति दर्ज करते हुए इसे केवल प्रशासनिक या धार्मिक प्रक्रिया नहीं बल्कि मंदिर की व्यवस्था और संपत्ति से जुड़े गंभीर प्रश्नों का विषय बताया है।
मंदिर ट्रस्ट गठन पर मुख्य पुजारी ने जताई आपत्ति
रविवार को रामनगर की गोलामंडी स्थित मंदिर परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्य पुजारी पंडित सुधाकर मिश्र ने कहा कि मां मनसा देवी मंदिर सेवा न्यास के गठन की जानकारी उन्हें बाद में मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के नाम पर किए जा रहे इस प्रयास में पुजारी परिवार से कोई विचार विमर्श नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियों से उनका परिवार मंदिर की सेवा और व्यवस्था संभालता आ रहा है। उनके अनुसार मंदिर के नाम पर ट्रस्ट गठन यदि पारदर्शिता और सर्वसम्मति के आधार पर नहीं होता तो इसका दुरुपयोग होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पंडित सुधाकर मिश्र ने यह भी कहा कि पूर्व काशी नरेश स्वर्गीय ईश्वरी नारायण सिंह के काल में निर्मित इस मंदिर की व्यवस्था वर्षों से स्थानीय श्रद्धालुओं और पुजारी परिवार के सहयोग से संचालित होती रही है। उनका आरोप है कि बीते कुछ समय से मंदिर के आसपास अतिक्रमण और अवैध कब्जों की गतिविधियां बढ़ी हैं तथा मंदिर परिसर में हस्तक्षेप के प्रयास किए जा रहे हैं।
पत्रकार वार्ता में उन्होंने स्पष्ट कहा कि मंदिर के नाम पर किसी भी प्रकार की व्यवस्था या न्यास गठन से पहले सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लेना चाहिए था। उनका कहना था कि बिना संवाद के लिया गया निर्णय धार्मिक भावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
मां मनसा देवी श्रद्धा और लोकविश्वास का केंद्र
मां मनसा देवी को भारतीय धार्मिक परंपरा में मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी के रूप में देखा जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में मां मनसा की पूजा अलग अलग स्वरूपों में होती है। लोकमान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और सच्चे मन से मां के दरबार में पहुंचने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।
रामनगर स्थित यह मंदिर भी वर्षों से स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र रहा है। विशेष पर्वों नवरात्र और धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह और शाम की आरती के दौरान धार्मिक वातावरण भक्तों को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।
इतिहास और विरासत से जुड़ी पहचान
स्थानीय स्तर पर मंदिर को लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक पहचान के रूप में देखा जाता रहा है। हालांकि मंदिर के विस्तृत इतिहास और स्थापना से जुड़ी प्रमाणिक ऐतिहासिक जानकारियां अलग अलग लोककथाओं और परंपराओं में मिलती हैं। मंदिर के वर्तमान विवाद के बीच इसका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व एक बार फिर चर्चा में है।
धार्मिक जानकारों का मानना है कि ऐसे प्राचीन धार्मिक स्थलों की सबसे बड़ी शक्ति उनकी दीवारें नहीं बल्कि पीढ़ियों से जुड़ी आस्था होती है। यही कारण है कि जब भी मंदिरों की व्यवस्था स्वामित्व या संचालन से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं तो वह केवल प्रशासनिक प्रश्न नहीं रहते बल्कि समाज और श्रद्धा से जुड़ा विषय बन जाते हैं।
आस्था के साथ संवाद की भी जरूरत
रामनगर का मां मनसा देवी मंदिर आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है जहां एक तरफ धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी परंपराएं हैं तो दूसरी ओर नई व्यवस्थाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर उठते सवाल हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस पूरे मामले में संबंधित पक्ष किस तरह संवाद और सहमति का रास्ता निकालते हैं।
फिलहाल मंदिर और ट्रस्ट गठन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद रामनगर के धार्मिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
LATEST NEWS