वाराणसी: काशी में महाशिवरात्रि की तैयारियां अपने चरम पर हैं और इसी क्रम में सोमवार को श्रीकृष्ण धाम मथुरा से शगुन सामग्री लेकर श्रद्धालु काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। इस धार्मिक यात्रा ने काशी की आस्था और परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया। मथुरा से आए श्रद्धालुओं के काफिले के धाम पहुंचते ही पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। ढोल नगाड़ों की गूंज और हर हर महादेव के जयकारों से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर श्रद्धा और उल्लास से भर उठा। महाशिवरात्रि के पावन अवसर से पहले इस शगुन सामग्री का आगमन काशी और मथुरा के धार्मिक संबंधों को और मजबूत करता नजर आया।
काशी विश्वनाथ मंदिर में मथुरा से आई शगुन सामग्री को विधि विधान के साथ ग्रहण किया गया। मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने स्वयं आगे बढ़कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया और उन्हें फूलों की माला पहनाई। इस अवसर पर मंदिर प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी और बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु साक्षी बने। स्वागत समारोह के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप और पुष्प वर्षा ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंचकर स्वयं को धन्य बताया और महाशिवरात्रि के पर्व को लेकर अपनी आस्था प्रकट की।
मथुरा से लाई गई शगुन सामग्री को महाशिवरात्रि के विशेष अनुष्ठानों से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण की नगरी से आई सामग्री बाबा विश्वनाथ के श्रृंगार और पूजा में उपयोग होने से पर्व की पवित्रता और बढ़ जाती है। यही कारण है कि हर वर्ष इस परंपरा को श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। काशी और मथुरा दोनों ही नगर सनातन संस्कृति के प्रमुख केंद्र रहे हैं और इस तरह की धार्मिक यात्राएं दोनों के बीच आध्यात्मिक सेतु का काम करती हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह यात्रा केवल परंपरा नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का प्रतीक है।
महाशिवरात्रि को लेकर काशी विश्वनाथ धाम में सुरक्षा व्यवस्था स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। शगुन सामग्री के आगमन के साथ ही यह संकेत भी मिल गया है कि महाशिवरात्रि का पर्व इस बार भी भव्य और दिव्य रूप में मनाया जाएगा। काशी की गलियों से लेकर धाम परिसर तक शिव भक्ति की लहर साफ दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में देश और विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है जिससे काशी एक बार फिर शिवमय हो जाएगी।
