सक्तेशगढ़ क्षेत्र में अवैध बोल्डर और भस्सी का कारोबार जारी, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : सक्तेशगढ़ क्षेत्र के कई गांवों में अवैध बोल्डर और भस्सी का कारोबार बड़े पैमाने पर संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानक के विपरीत ट्रैक्टर और पिकअप वाहनों में ओवरलोड सामग्री भरकर घनी बस्तियों के बीच से तेज रफ्तार में परिवहन किया जा रहा है। इससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है और ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
कई गांवों तक फैल चुका है अवैध परिवहन
बताया जा रहा है कि यह अवैध परिवहन गोल्हनपुर मुख्य मार्ग से शुरू होकर अतरी लहौरा, सरसों सेमरी, टेढिया, बलुआ बजाहुर, समुदवा और कुंबा सहित कई गांवों तक निर्बाध रूप से चल रहा है। इन क्षेत्रों में अवैध खनन की गतिविधियां भी बड़े स्तर पर जारी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय और सुबह के शुरुआती घंटों में भारी मात्रा में सामग्री का उठान किया जाता है, जिससे प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बिना नंबर प्लेट वाहनों की आवाजाही
स्थानीय निवासियों के अनुसार कई वाहन बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं। ओवरलोड वाहनों की तेज रफ्तार से न केवल सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, बल्कि आम लोगों की जान को भी खतरा बना हुआ है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई का अभाव दिखाई देता है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप
सूत्रों का दावा है कि इस अवैध कारोबार में कुछ क्षेत्रीय नेताओं और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता है। यह भी कहा जा रहा है कि सत्ताधारी दल के सहयोगी दल के एक मंत्री के करीबी होने का दावा कर पुलिस और खनन विभाग पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी इन चर्चाओं के कारण स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं तस्वीरें
कुछ समय पहले अवैध बोल्डर से लदी पिकअप वाहनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद भी क्षेत्र में गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता की जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
जिलाधिकारी के निर्देशों का असर नहीं
जिलाधिकारी द्वारा अवैध खनन रोकने के सख्त निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद सक्तेशगढ़ पुलिस चौकी के अंतर्गत आने वाले गांवों में इन निर्देशों का अपेक्षित प्रभाव नहीं दिख रहा है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि खनन और परिवहन से जुड़े वाहनों की नियमित जांच की जाए तथा बिना परमिट संचालन पर कठोर कार्रवाई हो।
दुर्घटना की आशंका और ग्रामीणों की चिंता
घनी आबादी वाले क्षेत्रों से ओवरलोड वाहनों की आवाजाही के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को विशेष खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब देखना यह होगा कि विभागीय अधिकारी इस मामले में कब प्रभावी कार्रवाई करते हैं और अवैध खनन तथा परिवहन पर किस प्रकार अंकुश लगाया जाता है। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन पारदर्शिता और सख्ती के साथ कदम उठाएगा, ताकि कानून व्यवस्था और जनसुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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