वाराणसी में 9000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य, 29 क्रय केंद्र संचालित; 1109 किसानों ने किया ऑनलाइन आवेदन
वाराणसी (बड़ागांव)। जिले में इस वर्ष रबी विपणन सत्र के तहत गेहूं खरीद की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। प्रशासन ने वर्ष 2026 के लिए कुल 9000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। किसानों की सुविधा और सुचारू खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जनपद में कुल 29 गेहूं क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो 30 मार्च से संचालित हो रहे हैं।
अब तक गेहूं खरीद के लिए 1109 किसानों ने ऑनलाइन पंजीकरण कर आवेदन किया है, जो इस बात का संकेत है कि किसान इस बार सरकारी खरीद प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि इस बार की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और किसान हितैषी बनाया गया है।
पहले दिन बड़ागांव केंद्र पर शुरू हुई खरीद
बुधवार को गेहूं खरीद के पहले दिन बड़ागांव क्षेत्र के बगिया स्थित खाद्य विभाग के क्रय केंद्र पर खरीद प्रक्रिया की शुरुआत हुई। यहां साधोगंज खरावन गांव के किसान मनिहर जायसवाल पहले विक्रेता के रूप में केंद्र पर पहुंचे और अपनी उपज बेची।
केंद्र प्रभारी राजेश कुमार शुक्ला ने उन्हें पहले किसान के रूप में सम्मानित करते हुए माला पहनाई और उनका मुंह मीठा कराया। मनिहर जायसवाल ने कुल 60 बोरी, यानी लगभग 30 क्विंटल गेहूं केंद्र पर विक्रय किया।
48 घंटे में सीधे खाते में भुगतान
केंद्र प्रभारी के अनुसार, इस वर्ष भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है। किसानों को उनके गेहूं का मूल्य एनपीसीआई (NPCI) प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में 48 घंटे के भीतर भेजा जाएगा।
इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा। प्रशासन का कहना है कि भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी न हो, इसके लिए विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है।
ऑनलाइन आवेदन से बढ़ी पारदर्शिता
इस वर्ष गेहूं खरीद के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल हो गई है। किसान घर बैठे ही अपना पंजीकरण कर सकते हैं और नजदीकी क्रय केंद्र का चयन कर सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि इस बार किसानों का सत्यापन तहसील स्तर पर नहीं किया जाएगा। इससे प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और किसानों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी।
किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
प्रशासन का मानना है कि इस बार किसानों की भागीदारी पहले की तुलना में अधिक रहेगी। 1109 किसानों द्वारा पहले ही आवेदन किए जाने से यह संकेत मिल रहा है कि किसान सरकारी खरीद प्रणाली पर भरोसा जता रहे हैं।
इसके अलावा, क्रय केंद्रों की संख्या बढ़ाने और सुविधाओं में सुधार से किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी।
क्रय केंद्रों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त
जिले के सभी 29 क्रय केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। बोरे, तौल मशीन, श्रमिक और परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था की गई है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से केंद्रों का निरीक्षण करें और किसी भी समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।
उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रशासन सतर्क
सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है। इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद की जा रही है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे केवल अधिकृत केंद्रों पर ही अपनी उपज बेचें और किसी भी समस्या की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।
कृषि क्षेत्र में सुधार की दिशा में कदम
जिले में गेहूं खरीद के लिए बढ़ाए गए केंद्रों की संख्या और डिजिटल व्यवस्था यह दर्शाती है कि कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में और अधिक किसानों को इसका लाभ मिलेगा और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
आगे बढ़ेगी खरीद प्रक्रिया
हालांकि अभी अधिकांश क्षेत्रों में गेहूं की कटाई प्रारंभिक चरण में है, इसलिए आने वाले दिनों में खरीद की गति तेज होने की संभावना है। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी उपज को साफ-सुथरा और मानकों के अनुरूप तैयार कर क्रय केंद्रों पर लाएं।
वाराणसी में शुरू हुई यह गेहूं खरीद प्रक्रिया किसानों के लिए राहत भरी साबित हो सकती है। यदि सभी व्यवस्थाएं इसी तरह सुचारू रूप से चलती रहीं, तो निर्धारित लक्ष्य को समय से पहले हासिल किया जा सकता है।
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