गाजियाबाद: अमित चौधरी मौत प्रकरण में नया मोड़, निवाड़ी थाने में पुलिस पिटाई का वीडियो वायरल
गाजियाबाद के मुरादनगर क्षेत्र से जुड़े अमित चौधरी मौत मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। अब निवाड़ी थाने के अंदर कथित पुलिस पिटाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी अमित को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद पूरे मामले को लेकर लोगों में आक्रोश और बढ़ गया है और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मामले की पृष्ठभूमि: सीएचसी से भागने के दौरान ट्रक से हुई थी मौत
मूल रूप से निवाड़ी थाना क्षेत्र के कस्बा पतला निवासी अमित कुमार नगर पंचायत पतला में आउटसोर्सिंग कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार, सात अप्रैल की रात वह अपने कुछ साथियों के साथ शराब पी रहे थे। इसी दौरान गश्त पर निकली पुलिस मौके पर पहुंची और अमित को हिरासत में लेकर थाने ले आई।
इसके बाद मेडिकल परीक्षण के लिए पुलिस अमित को मुरादनगर सीएचसी लेकर गई। आरोप है कि इसी दौरान अमित पुलिस की पकड़ से छूटकर वहां से भाग निकला और दिल्ली-मेरठ मार्ग की ओर दौड़ पड़ा। इसी बीच वह एक ट्रक की चपेट में आ गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उपचार के दौरान 12 अप्रैल को उसकी मौत हो गई।
वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद, पुलिस पर लगे गंभीर आरोप
अब सामने आए वीडियो में दावा किया जा रहा है कि थाने में अमित की पिटाई की गई थी। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की मारपीट के कारण ही अमित को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके चलते उसे अस्पताल ले जाया गया था। उनका कहना है कि यदि पुलिस द्वारा पिटाई न की जाती, तो यह घटना नहीं होती।
इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में पुलिस के खिलाफ नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। सोमवार को अमित की तेरहवीं के बाद पतला गांव में एक पंचायत आयोजित की गई, जिसमें आगे के आंदोलन की रणनीति तैयार की गई।
अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद के नेतृत्व में प्रदर्शन
अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनु चौधरी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग निवाड़ी थाने पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अमित की मौत के मामले में दर्ज मुकदमे को हत्या की धारा में बदलने और संबंधित पुलिसकर्मियों के नाम जोड़ने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान एसीपी मोदीनगर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पुलिस अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए इस पूरे घटनाक्रम को हादसा दिखाने की कोशिश कर रही है। साथ ही मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से कराने की मांग भी उठाई गई है।
पुलिस कार्रवाई और जांच की स्थिति
मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में डीसीपी ग्रामीण द्वारा दो उपनिरीक्षक, एक हेड कॉन्स्टेबल और एक सिपाही को निलंबित किया जा चुका है। वहीं, अमित के पिता सुभाष की तहरीर पर अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्रकरण में निवाड़ी पुलिस की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, जिसके चलते जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मामले की विवेचना मोदीनगर पुलिस को सौंप दी गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आगे की कार्रवाई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी, जिससे मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।
राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ा
इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। क्षेत्रीय सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान भी इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं। लगातार बढ़ते जनदबाव के बीच पुलिस पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि मामले में दर्ज मुकदमे की जांच जारी है और जो भी साक्ष्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की निगरानी उच्चाधिकारियों द्वारा की जा रही है।
निष्कर्ष: वीडियो के बाद जांच की दिशा अहम
अमित चौधरी की मौत का मामला अब केवल एक सड़क हादसा या पुलिस लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस कस्टडी में व्यवहार और जवाबदेही का बड़ा सवाल बन चुका है। वायरल वीडियो ने इस केस की दिशा को बदल दिया है और आने वाले दिनों में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट व जांच के निष्कर्ष इस पूरे मामले की सच्चाई उजागर करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
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