महाशिवरात्रि पर काशी में श्रद्धालुओं का सैलाब, बाबा विश्वनाथ के दर्शन को उमड़ी भीड़
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। भगवान शिव के विवाह पर्व के रूप में मनाई जाने वाली इस तिथि पर काशी नगरी में देश के अलग अलग हिस्सों से दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। मंदिर प्रशासन के अनुसार बुधवार तड़के सुबह 2 बजकर 15 मिनट पर बाबा विश्वनाथ की मंगला आरती संपन्न हुई। आरती के बाद भगवान शिव का विशेष दूल्हे के स्वरूप में श्रृंगार किया गया। गर्भगृह में फूलों की साज सज्जा, मोरपंख और रुद्राक्ष की मालाओं से शिवलिंग को सजाया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए।
भोर से ही लंबी कतारें, हर हर महादेव के जयकारों से गूंजा धाम
कपाट खुलते ही मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालुओं की कतार लगभग पांच किलोमीटर तक फैली हुई है। कतार में खड़े भक्तों पर प्रशासन की ओर से पुष्प वर्षा की गई, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था का भाव और प्रबल हुआ। भीड़ अधिक होने के कारण प्रत्येक श्रद्धालु को गर्भगृह में दर्शन के लिए लगभग दो सेकेंड का समय मिल रहा है। इसके बावजूद भक्तों के चेहरे पर संतोष और श्रद्धा साफ दिखाई दे रही है। मंदिर के बाहर लगाए गए पाइपों के माध्यम से श्रद्धालु दूध, जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर रहे हैं ताकि भीड़ के बावजूद पूजा विधान सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
45 घंटे तक लगातार दर्शन, वीआईपी प्रोटोकॉल पूरी तरह निरस्त
मंदिर प्रशासन ने महाशिवरात्रि पर 45 घंटे तक लगातार दर्शन की व्यवस्था की है ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकें। इस दौरान वीआईपी और वीवीआईपी प्रोटोकॉल पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। सभी श्रद्धालुओं के लिए समान व्यवस्था लागू की गई है। प्रशासन का दावा है कि इस बार लाइन में लगने के लगभग 25 मिनट के भीतर श्रद्धालु गर्भगृह के दर्शन कर पा रहे हैं। गर्भगृह के चारों द्वारों से केवल झांकी दर्शन की व्यवस्था की गई है ताकि भीड़ नियंत्रित रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो। बाबा के आंगन में रंगोली सजाई गई है, जो पर्व के उल्लास और परंपरा की जीवंत झलक पेश कर रही है।
शहर के होटल और धर्मशालाएं भरीं, काशी के 500 मंदिरों में भी उत्सव
श्रद्धालुओं की भारी संख्या के चलते वाराणसी शहर के अधिकांश होटल, लॉज और धर्मशालाएं पूरी तरह हाउसफुल हो चुकी हैं। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और प्रमुख मार्गों पर यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। महाशिवरात्रि के अवसर पर केवल काशी विश्वनाथ मंदिर ही नहीं, बल्कि काशी के लगभग 500 छोटे बड़े मंदिरों में भी विशेष पूजा अर्चना और जलाभिषेक किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के साथ साथ बाहर से आए श्रद्धालु घाटों पर गंगा स्नान कर बाबा के दर्शन के लिए मंदिरों की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, पुलिस कमिश्नर स्वयं कर रहे निगरानी
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष बल तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था में 1 के कमांडो भी लगाए गए हैं। पूरे क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों के माध्यम से की जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल नजर रखी जा सके। पुलिस कमिश्नर स्वयं फील्ड में उतरकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं और अधिकारियों को लगातार दिशा निर्देश दे रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बल और संसाधन तैनात किए गए हैं।
पृष्ठभूमि: महाशिवरात्रि का महत्व और काशी की परंपरा
महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक पर्व माना जाता है। काशी नगरी में इस पर्व का विशेष धार्मिक महत्व है। परंपरा के अनुसार इस दिन बाबा विश्वनाथ का दूल्हे के रूप में श्रृंगार कर भक्तों को दर्शन कराए जाते हैं। सदियों से चली आ रही इस परंपरा में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। धार्मिक आस्था के साथ साथ यह पर्व काशी की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की संयुक्त तैयारियों के चलते इस वर्ष भी महाशिवरात्रि का पर्व शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी और लिंक
काशी विश्वनाथ मंदिर से संबंधित आधिकारिक सूचनाएं मंदिर ट्रस्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाती हैं। Shri Kashi Vishwanath Temple Official Website
LATEST NEWS