प्रयागराज में 75 हजार की रिश्वत लेते बारा थाने के इंस्पेक्टर गिरफ्तार, एंटी करप्शन की कार्रवाई
प्रयागराज में एंटी करप्शन टीम ने बारा थाने में तैनात प्रभारी निरीक्षक को 75 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि एक मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए आरोपी पक्ष से धनराशि की मांग की गई थी। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन विभाग ने योजना बनाकर थाने के भीतर ही कार्रवाई की और लेनदेन के दौरान इंस्पेक्टर को पकड़ लिया।
फाइनल रिपोर्ट के नाम पर मांगी गई थी घूस
भदोही जिले के सुरियावां थाना क्षेत्र के लुकमानपुर निवासी संतोष कुमार दुबे के खिलाफ बारा थाने में एक मुकदमा दर्ज था। संतोष कुमार दुबे ने एंटी करप्शन विभाग में शिकायत दी कि मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार सोनकर ने उनसे 75 हजार रुपये की मांग की है। शिकायत के बाद विभाग ने प्रारंभिक जांच कराई, जिसमें आरोपों की पुष्टि होने पर आगे की कार्रवाई की गई।
थाने में बिछाया गया जाल
एंटी करप्शन टीम ने इंस्पेक्टर को रंगे हाथ पकड़ने के लिए रणनीति तैयार की। तय योजना के अनुसार बुधवार दोपहर करीब 2 बजकर 40 मिनट पर शिकायतकर्ता संतोष कुमार दुबे धनराशि लेकर बारा थाने पहुंचे। फोन पर बातचीत के बाद इंस्पेक्टर ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाया। जैसे ही 75 हजार रुपये इंस्पेक्टर ने लिए, टीम ने तत्काल दबोच लिया।
घूरपुर थाने ले जाकर की जा रही कार्रवाई
कार्रवाई एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में की गई। गिरफ्तारी के बाद विनोद कुमार सोनकर को घूरपुर थाने ले जाया गया, जहां उनके खिलाफ आवश्यक लिखा पढ़ी की जा रही है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण संबंधी प्रावधानों के तहत विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
पूर्व में भी रही तैनाती
गिरफ्तार इंस्पेक्टर विनोद कुमार सोनकर मूल रूप से वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। वर्ष 2012 में वह दरोगा पद से पदोन्नत होकर इंस्पेक्टर बने थे। इससे पहले वह प्रयागराज में खुल्दाबाद थाने के प्रभारी निरीक्षक रह चुके हैं। खुल्दाबाद से उनका स्थानांतरण शाहगंज थाना प्रभारी के रूप में हुआ था, जहां शिकायतों के बाद उन्हें हटाकर पुलिस लाइन में तैनात किया गया था। करीब छह महीने पूर्व उन्हें बारा थाने का प्रभारी बनाया गया था।
पीड़ित का आरोप
संतोष कुमार दुबे का कहना है कि इंस्पेक्टर ने उन्हें जबरन एक मुकदमे में नामजद किया था। उनका दावा है कि वह मूल रूप से उस मामले में नामजद नहीं थे, लेकिन जांच के दौरान उनका नाम जोड़ दिया गया। नाम हटाने के एवज में पहले भी उनसे धनराशि ली गई थी और अब दोबारा 75 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। इसी के बाद उन्होंने एंटी करप्शन विभाग में शिकायत की।
फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है। एंटी करप्शन विभाग का कहना है कि भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों पर साक्ष्य के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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