प्रयागराज के मांडा में प्रधानाध्यापिका निलंबित, अनुपस्थित शिक्षक का वेतन जारी करने का आरोप
प्रयागराज, 16 फरवरी 2026: मांडा क्षेत्र स्थित कंपोजिट विद्यालय राजापुर में फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद प्रधानाध्यापिका रजिया फरहाना को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि विद्यालय के एक सहायक अध्यापक के लंबे समय से अनुपस्थित रहने के बावजूद उनका वेतन जारी किया जाता रहा। मामले का खुलासा बेसिक शिक्षा अधिकारी के औचक निरीक्षण के दौरान हुआ।
औचक निरीक्षण में खुली परतें
बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने 14 फरवरी को यमुनापार स्थित कंपोजिट विद्यालय राजापुर का निरीक्षण किया। विद्यालय में कुल 337 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज है। निरीक्षण के दौरान लगभग 70 प्रतिशत छात्र उपस्थित पाए गए, हालांकि शैक्षिक स्तर और शिक्षकों की कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं मिली।
विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक, चार सहायक अध्यापक, दो अनुदेशक और एक शिक्षामित्र तैनात हैं। निरीक्षण के समय प्रधानाध्यापिका रजिया फरहाना बीआरसी मांडा में प्रशिक्षण के लिए गई हुई थीं। दो अनुदेशक एक घंटे की देरी से विद्यालय पहुंचे, जिन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
सहायक अध्यापक एक अक्टूबर से गायब
निरीक्षण के दौरान सहायक अध्यापक कौशल सिंह विद्यालय में अनुपस्थित पाए गए। जांच में पता चला कि वे एक अक्टूबर 2025 से बिना किसी सूचना के विद्यालय नहीं आ रहे थे। ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी उनकी अनुपस्थिति को लेकर शिकायत की थी। छात्रों से बातचीत में यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि वे कौन सा विषय पढ़ाते थे, जिससे उनकी लंबे समय से अनुपस्थिति की आशंका जताई गई।
इसके बावजूद उनका वेतन नियमित रूप से जारी होता रहा। आरोप है कि प्रधानाध्यापिका और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से वेतन निकाला जाता रहा। इसे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ और सरकारी नियमों के विरुद्ध आचरण बताया गया है।
दोनों शिक्षकों पर कार्रवाई
मामले को गंभीर मानते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रधानाध्यापिका रजिया फरहाना और सहायक अध्यापक कौशल सिंह दोनों को निलंबित कर दिया है। दोनों से 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।
बीएसए अनिल कुमार ने बताया कि यह कृत्य उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के विपरीत है। विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और दोष सिद्ध होने पर आगे की कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस प्रकरण ने सरकारी विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के बावजूद वेतन जारी होना निगरानी तंत्र की कमजोरी को दर्शाता है। शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि अन्य विद्यालयों का भी औचक निरीक्षण किया जाएगा, ताकि इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
फिलहाल मामले की विभागीय जांच जारी है और संबंधित अभिलेखों की समीक्षा की जा रही है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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