लखनऊ में संघ प्रमुख और मुख्यमंत्री की मुलाकात
लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर भेंट की। यह मुलाकात संघ के शताब्दी वर्ष के तहत चल रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला के बीच हुई। दो दिवसीय प्रवास के दौरान डॉ मोहन भागवत ने संगठन विस्तार और सामाजिक समरसता से जुड़े विषयों पर संवाद किया। राज्य की राजधानी में इस भेंट को संगठन और सरकार के बीच समन्वय के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दो दिवसीय प्रवास और प्रमुख जन गोष्ठी
लखनऊ प्रवास के अंतिम दिन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में डॉ मोहन भागवत ने संघ की कार्यपद्धति और समाज के सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि संघ की सबसे बड़ी समस्या हिंदू समाज को जागरूक करना है क्योंकि सामाजिक चेतना को व्यापक स्तर पर सक्रिय करने में निरंतर प्रयास की आवश्यकता पड़ती है। कार्यक्रम में मौजूद दिलीप कुमार ने अवसरवादिता को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद कुछ लोग निजी लाभ के लिए संघ से जुड़ने की कोशिश करते हैं जिससे समर्पित कार्यकर्ताओं में उदासीनता आती है। इस पर डॉ मोहन भागवत ने कहा कि ऐसे लोगों को अपने समर्पण की जांच करनी चाहिए और संघ में वही टिक पाते हैं जो सेवा भाव से जुड़े रहते हैं।
संघ की कार्यपद्धति पर वक्तव्य
डॉ मोहन भागवत ने कहा कि संघ की कार्यपद्धति देश के उत्थान के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं पर आधारित है। संगठन केवल सेवा और समर्पण की अपेक्षा करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवसरवादी प्रवृत्ति के लोग लंबे समय तक संगठन में नहीं टिक पाते क्योंकि यहां निजी लाभ की कोई गुंजाइश नहीं होती। उनके अनुसार सेवा आधारित अनुशासन ही संगठन की पहचान है और इसी के आधार पर समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।
मंदिरों की आय और जन कल्याण
डॉ श्वेता श्रीवास्तव और कर्नल एम के सिंह के प्रश्न पर डॉ मोहन भागवत ने कहा कि मंदिरों से होने वाली आय का उपयोग जन कल्याण के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की बागडोर सरकार के बजाय जिम्मेदार भक्तों के हाथ में होनी चाहिए। उन्होंने पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि देश के प्रमुख मंदिरों के संचालन और आय के उपयोग पर ईमानदार संस्थाओं की निगरानी होनी चाहिए। उनके अनुसार संघ इस दिशा में तैयारी कर रहा है और आने वाले समय में इसके परिणाम सामने आएंगे।
टैरिफ वार और आर्थिक दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री के सलाहकार और पूर्व आईएएस अवनीश अवस्थी के प्रश्न के उत्तर में डॉ मोहन भागवत ने टैरिफ वार को लेकर कहा कि इसे दिल पर नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापार विश्वास पर चलता है और जबरदस्ती टैरिफ लगाने वाले अपना विश्वास खोते हैं। उनका कहना था कि देश के विकास के लिए मास प्रोडक्शन से अधिक प्रोडक्शन बाई मास का सिद्धांत अपनाना जरूरी है। उन्होंने हर भारतीय में विकसित राष्ट्र बनाने की भावना को आवश्यक बताया।
एआई युग में संस्कृति पर दृष्टि
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरसंघचालक ने कहा कि संस्कृति पर कोई संकट नहीं है। व्यक्ति का निर्माण तकनीक से नहीं बल्कि संस्कारों से होता है। उन्होंने कहा कि तकनीक का स्वामी बनना चाहिए न कि उसका गुलाम। उनके अनुसार नए आविष्कार मनुष्य की सहायता के लिए हैं और गलत उपयोग से पतन की स्थिति पैदा हो सकती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष संगठन के लिए आत्ममंथन और विस्तार की अवधि के रूप में देखा जा रहा है। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रमों में सामाजिक समरसता संगठन विस्तार और जन सहभागिता पर फोकस रखा गया। राज्य सरकार के स्तर पर भी सामाजिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों में समन्वय पर चर्चा होती रही है। इस पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री से हुई भेंट को औपचारिक संवाद के साथ नीतिगत विषयों पर विचार विमर्श का अवसर माना जा रहा है।
आधिकारिक संदर्भ
संगठन से जुड़ी जानकारी के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आधिकारिक वेबसाइट पर विवरण उपलब्ध है https://rss.org। राज्य सरकार से जुड़े कार्यक्रमों और सूचनाओं के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर विवरण देखा जा सकता है https://up.gov.in।
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