किसान से बना हजार करोड़ की जीएसटी चोरी का मास्टरमाइंड, भूरा प्रधान का देशभर में फैला नेटवर्क
मथुरा/कोसीकलां। कभी छोटे किसान के रूप में जीवन शुरू करने वाला भगवान सिंह उर्फ भूरा प्रधान आज देश के सबसे बड़े जीएसटी चोरी के मामलों में एक प्रमुख नाम बन चुका है। करीब एक हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने वाला यह आरोपी उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में फैले एक संगठित नेटवर्क का सरगना बताया जा रहा है।
छोटे किसान से शुरू हुआ सफर
करीब 25 वर्ष पहले भगवान सिंह उर्फ भूरा प्रधान एक छोटे किसान के रूप में जीवन यापन करता था। उसके पास सीमित जमीन थी और वह खेती के जरिए परिवार का भरण-पोषण करता था। धीरे-धीरे उसने हरियाणा सीमा के पास ट्रकों के कागजी काम को पास कराने का छोटा काम शुरू किया।
यही काम उसके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस दौरान उसने ट्रांसपोर्ट सिस्टम, टैक्स व्यवस्था और सरकारी प्रक्रियाओं की कमजोरियों को बारीकी से समझ लिया।
ट्रक पास कराने से खड़ा किया नेटवर्क
शुरुआत में भूरा ट्रकों के कागज पास कराने का काम करता था, जिसके बदले वह 20 से 30 हजार रुपये तक वसूलता था। धीरे-धीरे उसने अपने संपर्क बढ़ाए और एक संगठित गिरोह तैयार कर लिया।
इसके बाद उसने अपनी फर्म खोल ली और सीमा क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट से जुड़े कामों पर पकड़ बना ली। कोटवन बॉर्डर पर उसका नाम प्रभावशाली तरीके से लिया जाने लगा।
जीएसटी लागू होते ही बढ़ा खेल
जीएसटी लागू होने के बाद भूरा प्रधान ने इस सिस्टम की खामियों का फायदा उठाते हुए टैक्स चोरी का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। बताया जाता है कि पंजाब के ट्रांसपोर्टरों के संपर्क में आने के बाद उसने इस अवैध कारोबार को विस्तार दिया।
उसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब तक फैल गया। विभिन्न राज्यों में उसने अपने लोगों को सेट कर रखा था, जो ट्रकों और माल की आवाजाही में फर्जी कागजात और टैक्स चोरी के जरिए करोड़ों रुपये का खेल करते थे।
अवैध कमाई से खड़ी की संपत्ति
जीएसटी चोरी से कमाए गए पैसों से भूरा प्रधान ने बेशकीमती जमीनें खरीदीं। इसके अलावा होटल और स्कूल तक में निवेश करने की बात सामने आई है। वह अब एक बड़े कारोबारी के रूप में खुद को स्थापित कर चुका था।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि वह राजनीतिक पहुंच का भी दावा करता था और खुद को एक बड़े नेता का करीबी बताता था, जिससे उसका दबदबा और बढ़ गया था।
आपराधिक इतिहास और दर्ज मुकदमे
कोसीकलां थाने में उसके खिलाफ कुल पांच मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से तीन मामलों में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी है, जबकि दो मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है।
वर्ष 2024 में जीएसटी अधिकारियों को बंधक बनाकर मारपीट करने और दस्तावेज छीनने के दो मामलों में उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है।
इसके अलावा वर्ष 2016 में अनुसूचित जाति की महिला से छेड़छाड़, वर्ष 2017 के एक अन्य मामले और वर्ष 2022 में नगर पालिका की करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि को साजिश के तहत बेचने जैसे गंभीर आरोप भी उस पर लगे हैं, जिनमें पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगाई है।
जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना नेटवर्क
भूरा प्रधान का नेटवर्क इतना मजबूत और विस्तृत था कि जांच एजेंसियों के लिए इसे तोड़ना बड़ी चुनौती बन गया। कई राज्यों में फैले इस गिरोह ने टैक्स चोरी के जरिए सरकार को भारी नुकसान पहुंचाया।
मुरादाबाद में जीएसटी चोरी के एक बड़े मामले के खुलासे के बाद प्रदेश के कई जिलों में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
फिक्स रेट पर चलता था अवैध कारोबार
जानकारी के अनुसार भूरा प्रधान ने अपने नेटवर्क के जरिए ट्रकों को छुड़ाने और कागजी कार्रवाई में राहत दिलाने के लिए निश्चित दरें तय कर रखी थीं। हर ट्रक के लिए 20 से 30 हजार रुपये तक वसूले जाते थे।
रुपये उसके खातों में आने के बाद नेटवर्क के जरिए ट्रकों को छुड़ाने की प्रक्रिया पूरी की जाती थी। इस संगठित सिस्टम के कारण उसका नेटवर्क तेजी से बढ़ता गया।
पुलिस और एजेंसियां कर रहीं गहन जांच
पुलिस और जीएसटी विभाग की टीमें अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी कई लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है, जिनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर एक व्यक्ति ने अवैध साम्राज्य खड़ा कर लिया, लेकिन अब कानून की पकड़ से बच पाना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा है।
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