कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट: मेरठ के अल्फा अस्पताल तक पहुंचे तार, संचालक समेत तीन नामजद
कानपुर में उजागर हुए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के तार अब मेरठ तक जुड़ते नजर आ रहे हैं। इस मामले में मेरठ के अल्फा अस्पताल का नाम सामने आया है, जहां के संचालक अमित कुमार समेत तीन लोगों को मुकदमे में नामजद किया गया है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है।
अस्पताल संचालक ने आरोपों से किया इनकार
अल्फा अस्पताल के संचालक अमित कुमार ने कहा कि उनका अवैध किडनी ट्रांसप्लांट से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि अब तक कानपुर पुलिस की ओर से उनसे कोई संपर्क भी नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नामजद किए गए डा. अफजल को वह जानते तक नहीं हैं।
2022 में स्थापित हुआ था अल्फा अस्पताल
मूल रूप से मुजफ्फरनगर निवासी फिजियोथेरेपिस्ट अमित कुमार ने वर्ष 2022 में मंगल पांडेय नगर में विक्की चौहान और विजय गुप्ता के साथ मिलकर अल्फा अस्पताल की स्थापना की थी। इससे पहले वह सरस अस्पताल का संचालन कर चुके हैं।
अमित कुमार के अनुसार, बाद में इनाम, नासिर, परवेज और फरियाद को भी अस्पताल में साझेदार के रूप में शामिल किया गया था। अस्पताल में कई अन्य डॉक्टर भी सेवाएं दे रहे हैं।
डेंटल सर्जन का भी नाम आया सामने
इस मामले में शास्त्रीनगर की सेंट्रल मार्केट निवासी डेंटल सर्जन डा. वैभव मुदगल का नाम भी सामने आया है। उन्होंने स्वीकार किया कि किडनी ट्रांसप्लांट से पहले उनसे कुछ मामलों में मेडिकल संस्तुति ली जाती थी, लेकिन उनका इस अवैध गतिविधि से कोई सीधा संबंध नहीं है।
डा. वैभव ने यह भी कहा कि उन्हें इस पूरे प्रकरण की जानकारी मीडिया के माध्यम से ही मिली है और वह अन्य अस्पतालों में भी अपनी सेवाएं देते हैं।
तीसरे नामजद डॉक्टर से अनजान होने का दावा
अमित कुमार ने बताया कि मुकदमे में नामजद तीसरे डॉक्टर अफजल से उनका कोई परिचय नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का संचालन नियमों के तहत किया जा रहा है और किसी भी अवैध गतिविधि में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
फर्जी दारोगा प्रकरण से भी जुड़ा नाम
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, हाल ही में पकड़े गए एक फर्जी दारोगा ने भी खुद को अल्फा अस्पताल का हिस्सेदार बताया था, जिसके बाद मेडिकल थाने में उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।
आईएमए ने की कड़ी निंदा
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) मेरठ के अध्यक्ष डा. मनीष त्यागी ने इस मामले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अवैध किडनी ट्रांसप्लांट जैसे मामलों में शामिल चिकित्सकों और अन्य आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे लोगों के साथ आईएमए कभी खड़ा नहीं होगा।
जांच के बाद होगा बड़ा खुलासा संभव
फिलहाल कानपुर पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं।
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