दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ में भूकंप के तेज़ झटके, दहशत में लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकले
अचानक कांपी धरती, कई शहरों में अफरा-तफरी का माहौल
नई दिल्ली/श्रीनगर/चंडीगढ़: शुक्रवार को उत्तर भारत के कई हिस्सों में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ में भूकंप के तेज़ झटके महसूस किए गए। अचानक धरती के कांपने से लोग घबराकर अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। खासकर जम्मू-कश्मीर में एक के बाद एक दो झटकों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी, जिससे कई इलाकों में दहशत का माहौल देखा गया।
दिल्ली-एनसीआर में दफ्तरों और घरों से बाहर निकले लोग
राजधानी दिल्ली और उससे सटे नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे क्षेत्रों में भी भूकंप के झटकों का स्पष्ट असर महसूस किया गया। नोएडा के कई कॉर्पोरेट दफ्तरों में काम कर रहे कर्मचारी तुरंत बाहर निकल आए, वहीं रिहायशी इलाकों में भी लोग अपने घरों से बाहर सड़कों और खुले स्थानों पर जमा हो गए। कुछ समय के लिए सामान्य जनजीवन ठहर सा गया और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए।
किसी बड़े नुकसान की नहीं मिली सूचना
हालांकि राहत की बात यह रही कि देर शाम तक किसी भी क्षेत्र से जानमाल के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां भी सुनिश्चित की गई हैं।
अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा रहा भूकंप का केंद्र
भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा क्षेत्र में बताया जा रहा है, जहां रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.9 दर्ज की गई। इस भूकंपीय गतिविधि का असर उत्तर भारत के कई हिस्सों तक महसूस किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दूरस्थ क्षेत्रों में आए झटके भी बड़े भूभाग को प्रभावित कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर में दो झटकों से बढ़ी दहशत
जम्मू-कश्मीर में लगातार दो झटकों ने लोगों को अधिक भयभीत कर दिया। कई इलाकों में लोग अपने घरों से बाहर खुले स्थानों पर देर तक खड़े रहे। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।
2026 में तीसरी बार महसूस हुए झटके
दिल्ली-एनसीआर में वर्ष 2026 के भीतर यह तीसरी बार है जब भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इससे पहले 19 जनवरी को 2.8 तीव्रता का हल्का भूकंप आया था, जिसका केंद्र नॉर्थ दिल्ली क्षेत्र में स्थित था। इसके बाद 30 जनवरी की रात 3.2 तीव्रता का एक और झटका महसूस किया गया, जिसका केंद्र राजधानी से लगभग 60 से 80 किलोमीटर उत्तर-पूर्व दिशा में था। इन दोनों घटनाओं में भी किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली थी, लेकिन लगातार हो रही इन गतिविधियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है दिल्ली क्षेत्र
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली और उसके आसपास का क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने देश को भूकंप की तीव्रता और जोखिम के आधार पर चार जोनों—जोन II, जोन III, जोन IV और जोन V—में विभाजित किया है। इनमें जोन II अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है, जिसमें प्रयागराज, भोपाल, जयपुर, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर शामिल हैं।
जोन IV में आता है दिल्ली-एनसीआर
वहीं, दिल्ली को जोन IV में रखा गया है, जो उच्च जोखिम वाले भूकंपीय क्षेत्रों में गिना जाता है। इस जोन में 6 से 6.9 तीव्रता तक के भूकंप आने की संभावना रहती है, जो गंभीर नुकसान का कारण बन सकते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ लगातार यह सलाह देते हैं कि राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में भवन निर्माण भूकंपरोधी मानकों के अनुरूप होना चाहिए।
सतर्कता और तैयारी की जरूरत
इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्कता और तैयारी बेहद जरूरी है। हालांकि इस बार किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इस तरह की घटनाएं भविष्य के लिए चेतावनी जरूर देती हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जबकि नागरिकों को भी सतर्क रहने और सुरक्षा उपायों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
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