संसद में उठा स्मार्ट मीटर का मुद्दा: सांसद चंद्रशेखर ने गरीबों की परेशानी पर जताई चिंता
नगीना से सांसद चंद्रशेखर ने संसद में स्मार्ट विद्युत मीटर को लेकर आम जनता, खासकर दिहाड़ी मजदूरों और गरीब परिवारों को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में रिचार्ज आधारित बिजली प्रणाली से गरीब तबके के सामने गंभीर समस्याएं खड़ी हो रही हैं।
रिचार्ज सिस्टम पर उठाए सवाल
सांसद प्रतिनिधि एवं जिला पंचायत सदस्य विवेक सेन के अनुसार, चंद्रशेखर ने संसद में स्मार्ट मीटर के रिचार्ज सिस्टम को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले उपभोक्ता बिजली इस्तेमाल करने के बाद बिल जमा करते थे, लेकिन अब स्थिति उलट हो गई है, जहां पहले रिचार्ज करना पड़ता है, तब बिजली मिलती है।
उन्होंने तंज करते हुए कहा कि जहां निजी कंपनियां ‘पहले इस्तेमाल करो, फिर विश्वास करो’ की बात करती हैं, वहीं मौजूदा व्यवस्था में गरीबों के सामने ‘पहले भुगतान करो, फिर बिजली पाओ’ जैसी स्थिति बन गई है।
दिहाड़ी मजदूरों के सामने बढ़ी मुश्किलें
सांसद ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। कई बार उन्हें लगातार काम नहीं मिलता, जिससे उनकी आय रुक जाती है। ऐसे में यदि वे समय पर बिजली का रिचार्ज नहीं कर पाते, तो उनकी बिजली आपूर्ति तुरंत बाधित हो जाती है।
उन्होंने चिंता जताई कि यदि घरों में बिजली नहीं होगी, तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी और परिवार का सामान्य जीवन भी बाधित हो जाएगा।
गरीबों के लिए मुश्किल बना नया सिस्टम
चंद्रशेखर ने कहा कि पहले लोग पूरे महीने काम करके बाद में बिजली बिल जमा करते थे, जिससे उन्हें सुविधा रहती थी। लेकिन अब पहले से रिचार्ज करना गरीब परिवारों के लिए कठिन हो गया है।
सरकार का जवाब: जबरन नहीं लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर
सांसद के सवालों के जवाब में ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सदन में स्पष्ट किया कि देश में कहीं भी स्मार्ट मीटर जबरन नहीं लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से स्वैच्छिक व्यवस्था है और उपभोक्ता की इच्छा के अनुसार ही स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
यह मुद्दा सामने आने के बाद स्मार्ट मीटर को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में इस पर और चर्चा होने की संभावना है।
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