रानीगंज विधानसभा में चुनावी सरगर्मी तेज, पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक आमने-सामने
प्रतापगढ़ जिले की रानीगंज विधानसभा सीट पर आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। टिकट की दावेदारी को लेकर नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा अब खुलकर सामने आने लगी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को एक पार्टी प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री प्रो. शिवाकांत ओझा और पूर्व विधायक अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा आमने-सामने आ गए। इस दौरान दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच नारेबाजी और तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में हुआ विवाद
दिलीपपुर बाजार स्थित एक गेस्ट हाउस में पृथ्वीगंज मंडल का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना, नए लोगों को पार्टी में शामिल करना और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति बनाना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद थे।
कार्यक्रम की शुरुआत में पूर्व विधायक धीरज ओझा पहले से ही मौके पर मौजूद थे और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे। इसी दौरान शाम करीब सवा पांच बजे पूर्व मंत्री प्रो. शिवाकांत ओझा अपने पुत्र एवं पूर्व प्रमुख पूर्णांशु ओझा के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।
गेट पर आमना-सामना, समर्थकों में नारेबाजी
जैसे ही पूर्व मंत्री गेस्ट हाउस के गेट पर पहुंचे, उसी समय अंदर से धीरज ओझा भी बाहर आ गए। दोनों नेताओं का आमना-सामना होते ही उनके समर्थकों के बीच अपने-अपने नेता के समर्थन में नारेबाजी शुरू हो गई। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मौके पर मौजूद लोगों को मारपीट की आशंका होने लगी। हालांकि मंच पर पहुंचने के बाद भी दोनों गुटों के बीच खींचतान जारी रही।
पुलिस और संगठन के हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला
घटना की सूचना मिलते ही दिलीपपुर पुलिस मौके पर पहुंची। एसओ बलराम सिंह और संगठन के पदाधिकारियों ने सक्रियता दिखाते हुए दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। समय रहते हस्तक्षेप होने से संभावित बड़ा विवाद टल गया।
पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों के समर्थक केवल नारेबाजी कर रहे थे और किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है।
पहले भी हो चुका है विवाद
यह पहली बार नहीं है जब रानीगंज विधानसभा में इन दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच टकराव हुआ हो। कुछ महीने पहले भी रानीगंज के रेलवे क्रॉसिंग के पास दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच विवाद हुआ था। उस घटना में पूर्व प्रमुख पूर्णांशु ओझा की गाड़ी में तोड़फोड़ की गई थी और मामला दर्ज भी किया गया था।
स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि यदि वरिष्ठ नेता ही इस प्रकार का व्यवहार करेंगे तो कार्यकर्ताओं और संगठन के अन्य पदाधिकारियों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
नेताओं की दावेदारी से बढ़ी प्रतिस्पर्धा
रानीगंज विधानसभा सीट पर टिकट को लेकर दोनों नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा लंबे समय से चली आ रही है। पूर्व मंत्री प्रो. शिवाकांत ओझा पहले इस क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। वहीं पूर्व विधायक धीरज ओझा दोबारा इस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
इसी दावेदारी को मजबूत करने के लिए दोनों नेता लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
पूर्व मंत्री ने लगाया आरोप
प्रो. शिवाकांत ओझा ने आरोप लगाया कि वह संगठन के निर्धारित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे थे, लेकिन पूर्व विधायक और उनके समर्थकों द्वारा अमर्यादित व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि इस घटना से संगठन में नकारात्मक संदेश गया है।
वहीं पूर्व विधायक धीरज ओझा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।
आगे बढ़ सकती है सियासी खींचतान
रानीगंज विधानसभा में यह घटनाक्रम स्पष्ट संकेत देता है कि आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है। टिकट की दावेदारी को लेकर नेताओं के बीच टकराव आगे भी बढ़ सकता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के लिए यह एक चुनौती बन सकता है कि वह संगठन में अनुशासन बनाए रखते हुए चुनावी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करे।
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