महाशिवरात्रि पर चंदौली के साहूपुरी में उमड़ा आस्था का महासैलाब
उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद अंतर्गत साहूपुरी क्षेत्र में स्थित वेदव्यास महादेव मंदिर में रविवार को महाशिवरात्रि का पर्व व्यापक श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया गया। भोर के ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिर परिसर और संपर्क मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। हर हर महादेव और बोल बम के जयघोष के बीच शिवभक्त कंधों पर गंगाजल, बेलपत्र और धतूरा लेकर दर्शन के लिए पहुंचे। दूरदराज के गांवों के साथ साथ पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां आए, जिससे क्षेत्र में पूरे दिन धार्मिक उत्सव का माहौल बना रहा।
तपोभूमि में उमड़ा जनसैलाब
हिंदू परंपरा में महान ऋषि वेद व्यास की तपोभूमि माने जाने वाले इस प्राचीन शिवालय में महाशिवरात्रि पर विशेष पूजन और रुद्राभिषेक का आयोजन हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक का क्रम लगातार चलता रहा। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन व्यास शिवलिंग पर जल अर्पित करने से मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार सुबह से देर शाम तक दर्शन का सिलसिला बिना रुके जारी रहा।
काशी यात्रा की पूर्णता का दिन
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के बाद वेदव्यास महादेव मंदिर में शीश नवाना काशी यात्रा की पूर्णता मानी जाती है। इसी परंपरा के कारण वाराणसी और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु साहूपुरी पहुंचे। कई भक्तों ने बताया कि वे रात से ही पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचे और दर्शन के बाद उन्हें अद्भुत मानसिक शांति का अनुभव हुआ। यह परंपरा क्षेत्र में पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसके चलते महाशिवरात्रि पर यहां भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है।
नंदी विहीन शिवालय में अनोखा दर्शन
इस मंदिर की एक विशिष्ट पहचान यह है कि यहां भगवान शिव के साथ नंदी की प्रतिमा विराजमान नहीं है। श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि यह स्थल तप और साधना की भूमि है, जहां शिव तपस्वी स्वरूप में पूजे जाते हैं। इसी अनूठी परंपरा के कारण भक्तों में इस मंदिर के प्रति विशेष आकर्षण है। कई दर्शनार्थियों ने बताया कि यहां का शांत वातावरण और प्राचीन परंपराएं उन्हें बार बार यहां आने के लिए प्रेरित करती हैं।
व्यवस्था पर पड़ा दबाव, स्वयंसेवकों ने संभाली कमान
श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ के कारण मंदिर परिसर और आसपास के मार्गों पर कुछ समय के लिए दबाव की स्थिति बनी। कतारें दूर तक फैली रहीं और कई लोगों को दर्शन के लिए दो से तीन घंटे तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। इसके बावजूद अनुशासन बना रहा। स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों ने जल वितरण और कतार प्रबंधन में सहयोग किया। मंदिर प्रशासन के अनुसार भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस बल भी तैनात रहा, जिससे किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति नहीं बनी।
संतों की सीख और आस्था का संदेश
मंदिर परिसर में मौजूद साधु संतों ने श्रद्धालुओं को संयम और धैर्य बनाए रखने की सीख दी। उनका कहना था कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव भक्तों की श्रद्धा की परीक्षा लेते हैं और कठिनाइयों के बीच भी जो भक्त नियमपूर्वक पूजन करता है, उसे आध्यात्मिक लाभ मिलता है। संतों ने युवाओं से सामाजिक सौहार्द और स्वच्छता बनाए रखने की अपील भी की।
धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं
रिकॉर्ड भीड़ के बीच स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं पर ध्यान दिलाया। उनका कहना है कि यदि सड़क, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता और सुरक्षा को और बेहतर किया जाए तो वेदव्यास महादेव मंदिर भविष्य में पूर्वांचल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो सकता है। प्रशासन से अपेक्षा जताई गई कि ऐसे पर्वों के अवसर पर स्थायी व्यवस्थाओं पर गंभीरता से काम किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा मिले और क्षेत्र का समग्र विकास हो सके।
स्थान और पृष्ठभूमि
वेदव्यास महादेव मंदिर चंदौली जनपद के साहूपुरी क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन धार्मिक स्थल है। यहां पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है, लेकिन महाशिवरात्रि पर भीड़ विशेष रूप से बढ़ जाती है। यह मंदिर काशी क्षेत्र से निकट होने के कारण धार्मिक मार्ग का अहम पड़ाव माना जाता है।
रिपोर्ट: अभिनव वर्मा – क्राइम रिपोर्टर, चंदौली
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