प्रयागराज में 44 दिनों तक चला माघ मेला महाशिवरात्रि स्नान के साथ संपन्न, रिकॉर्ड जनभागीदारी दर्ज
संगम नगरी प्रयागराज में 44 दिनों तक चला माघ मेला महाशिवरात्रि के पावन स्नान के साथ भव्यता और ऐतिहासिक गरिमा के साथ संपन्न हो गया। वर्ष 2026 का यह माघ मेला श्रद्धा, आस्था और परंपरा का विराट संगम बना। त्रिवेणी संगम के तट पर उमड़ी आस्था की लहर ने देश के बड़े धार्मिक आयोजनों की भीड़ के पुराने मानकों को पीछे छोड़ा। प्रशासन के सामने यह आयोजन सुरक्षा, यातायात और जनसुविधाओं की दृष्टि से बड़ी चुनौती रहा, जिसे योजनाबद्ध ढंग से संभाला गया।
रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति
मेला प्रशासन के अनुसार 44 दिवसीय आयोजन के दौरान कुल 22 करोड़ 10 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र त्रिवेणी संगम में स्नान किया। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं के साथ साधु संत, अखाड़ों के संन्यासी, कल्पवासी परिवार और विदेशी पर्यटक भी इस धार्मिक समागम के साक्षी बने। हर दिन तड़के से लेकर देर शाम तक घाटों पर श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही बनी रही। हर हर महादेव के जयघोष, घंटियों की ध्वनि और मंत्रोच्चार से पूरा मेला क्षेत्र आध्यात्मिक वातावरण में डूबा रहा।
महाशिवरात्रि पर चरम पर पहुंची आस्था की धारा
महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व पर संगम तट पर उमड़ी भीड़ ने मेले को स्मरणीय बना दिया। श्रद्धालुओं की अनुशासित उपस्थिति और प्रशासनिक समन्वय के कारण भीड़ के बावजूद स्थिति नियंत्रित रही। घाटों पर प्रवेश और निकास के अलग अलग मार्ग बनाए गए थे ताकि भीड़ का दबाव संतुलित रहे। इस दिन स्नान करने वालों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक रही, फिर भी किसी बड़ी अव्यवस्था की सूचना सामने नहीं आई।
प्रशासनिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था
माघ मेले के दौरान निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया। यातायात प्रबंधन को लेकर रेलवे, सड़क परिवहन और जलमार्ग से आने जाने वाले यात्रियों के लिए विशेष इंतजाम रहे। मेला क्षेत्र में अस्थायी अस्पताल, चिकित्सा शिविर और स्वच्छता व्यवस्था सक्रिय रही। सुरक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार चौबीसों घंटे निगरानी से किसी भी अप्रिय स्थिति को उभरने नहीं दिया गया। आयोजन की समग्र निगरानी में प्रशासन की भूमिका अहम रही। अधिकृत जानकारी के लिए विभाग की वेबसाइट पर दिशानिर्देश उपलब्ध कराए गए थे।
धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक गतिविधियां
मेला केवल स्नान तक सीमित नहीं रहा। संत समागम, प्रवचन, यज्ञ अनुष्ठान और लोककलाओं की प्रस्तुतियों ने आयोजन को सांस्कृतिक पहचान दी। कल्पवासियों की साधना और विभिन्न अखाड़ों के दर्शन ने श्रद्धालुओं को भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ा। संगम क्षेत्र में अस्थायी नगर की तरह बसे शिविरों में अनुशासन और सेवा भाव का वातावरण देखने को मिला।
पृष्ठभूमि और आयोजन का महत्व
माघ मेला उत्तर भारत की प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जुड़ा आयोजन है, जिसका केंद्र त्रिवेणी संगम माना जाता है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल पर स्नान को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त है। ऐतिहासिक रूप से यह मेला सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक साधना का मंच रहा है। वर्ष 2026 का आयोजन जनभागीदारी के पैमाने पर उल्लेखनीय रहा और प्रशासनिक तैयारियों की कसौटी पर भी खरा उतरा।
आगे के आयोजनों के लिए मानक
करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद शांति और सौहार्द का वातावरण बना रहना इस मेले की बड़ी उपलब्धि रही। सफल प्रबंधन ने भविष्य के धार्मिक आयोजनों के लिए मानक स्थापित किए हैं। संगम तट पर संपन्न हुआ यह महासमागम परंपरा, आस्था और आधुनिक प्रबंधन के संतुलन का उदाहरण बनकर सामने आया।
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